डॉ. नेहा आनंद
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हर छह महीने में लेती हूं एक सेशन
- डॉ. नेहा आनंद, मेंटल हेल्थ काउंसलर
मरीज की परेशानी सुनने के साथ ही हमें इस बात का ध्यान रखना होता है कि हम उस नकारात्मकता के प्रभाव में न आएं। इसके लिए हमें डिटॉक्सिफिकेशन तकनीक का सहारा लेना पड़ता है। हम हैं काउंसलर, मनोवैज्ञानिक, पर इससे पहले हम इंसान हैं। एक्सरसाइज, ध्यान जैसी चीजों से हम मेंटल हाइजीन को बनाए रखने की कोशिश करते हैं। इसके साथ-साथ जो सबसे ज्यादा जरूरी चीज है वो है खुद की मानसिक स्थिति का मूल्यांकन करना। इसके लिए हम छह महीने पर प्रोफेशनल काउंसलर से एक सेशन जरूर लेते हैं। दरअसल, बहुत सी चीजें ऐसी हैं, जिनसे कोई भी बच नहीं पाता है। दुख-तकलीफ, रोना-हंसना स्वाभाविक प्रक्रिया है और हम लोग इससे अछूते कैसे रह सकते हैं, पर हमारे परामर्श देने से पहले खुद को इसके लिए तैयार रखना पड़ता है।