पुणे में एक झुग्गी में रहने वाला बच्चा आरती के वक्त मंदिर आता, आरती में हिस्सा लेता और आरती खत्म होने के बाद कूड़े के ढेर से उठाकर लाई गई कॉपी-किताबों से पढ़ाई करता। बच्चे के कपड़े फटे थे। ‘हमने बच्चे को कपड़े खरीदने के लिए पैसे देने चाहे तो उसने मना कर दिया। बहुत जोर देने के बाद उस बच्चे ने पैसे तो नहीं लिए पर पढ़ाई के लिए कुछ किताबें लाने को कहा।’ लखनऊ के रहने वाले अनूप मिश्रा और उनकी पत्नी रीना मिश्रा ने उस बच्चे को किताबें लाकर दे दीं लेकिन इस घटना से कक्षा चार में पढ़ने वाले उनके बच्चे आनंद कृष्ण मिश्रा पर गहरा असर हुआ।
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बाल चौपाल
- फोटो : amar ujala
छुट्टियों से वापस लौटे आनंद ने अपने माता-पिता से गरीब बच्चों की मदद की इच्छा जताई। आनंद के पिता उन्होंने अपने बेटे की इस नेक इच्छा को पूरा करने फैसला लिया। यहीं से शुरुआत हुई आनंद के छोटा मास्टरजी बनने की। उन्होंने आसपास के ऐसे बच्चों को ढूंढ़ना शुरू किया जो पैसों की कमी के चलते पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे।
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बाल चौपाल
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आनंद के माता-पिता उसे लखनऊ के बाहरी क्षेत्रों के कुछ ग्रामीण इलाकों में भी लेकर गए। इन इलाकों के ज्यादातर बच्चे पढ़ाई न करके खाली घूमकर समय बर्बाद कर रहे थे। आनंद ने यहां के कुछ बच्चों को समझाकर पढ़ने के लिए तैयार किया। धीरे-धीरे इन बच्चों को देखकर दूसरे बच्चे भी आने लगे और आनंद की ‘बाल चौपाल’ शुरू हो गई।
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बाल चौपाल
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2012 में शुरू हुई बाल चौपाल के माध्यम से आनंद अब तक करीब 758 बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित कर चुके हैं।
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बाल चौपाल
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इलाके के लोग उन्हें छोटे मास्टर जी के रूप में जानते हैं। आनंद ने बताया, मैं बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने की कोशिश करता हूं ताकि उनको पढ़ाई बोझिल न लगे।
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आनंद बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाने के अलावा उनमें संस्कार डालने की भी कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि बाल चौपाल की शुरुआत ‘हम होंगे कामयाब’गीत से होती है और छुट्टी के वक्त राष्ट्रगान गाते हैं।
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आनंद खुद लखनऊ के एलडीए कॉलोनी के सिटी मांटेसरी स्कूल में कक्षा सात में पढ़ते हैं। स्कूल से आकर अपनी पढ़ाई करने के बाद वह शाम को बच्चों को पढ़ाने का वक्त निकालते हैं।
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आनंद को इस काम के लिए सत्यपथ बाल रत्न और सेवा रत्न सम्मान सहित कई पुरस्कार मिल चुके हैं। आनंद अपने कुछ टॉपर साथियों को भी इस अभियान से जोड़ रहे हैं और गरीब बच्चों के लिए लाइब्रेरी भी खोलने की योजना है।
5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर आनंद ने चलो पढ़ो अभियान की शुरुआत की इसके अलावा नवरात्र में बेटी बचाओ ही नहीं पढ़ाओ भी अभियान के तहत बच्चियों को स्कूल बैग बांटे।