लखनऊ में टिकट दलालों का रैकेट फैला हुआ है। प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से टिकट बनाए जा रहे हैं। लेकिन आरपीएफ की सुस्ती रेलवे बोर्ड की ‘मुखबिरी’ से टूटी। दलालों के पते बताए जाते रहे और आरपीएफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करती रही। पिछले 13 दिन में आरपीएफ ने करीब 15 लाख रुपये के 879 रेलवे टिकट और 82 फर्जी आईडी बरामद की हैं। दरअसल, राजधानी लखनऊ में टिकट दलालों का रैकेट इतना विकराल हो गया है कि आरक्षण केंद्र की कतारों में खड़े यात्रियों को मुश्किल से तत्काल का कन्फर्म टिकट मिलता है। शहरभर में प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर से टिकट बनाने वाले दलाल भरे पड़े हैं। डीआरयूसीसी सदस्य एसएस उप्पल ने बताया कि अभी तक रेलवे की सुस्ती से यह कारोबार फल-फूल रहा था। पिछले दो हफ्तों से जैसी ताबड़तोड़ कार्रवाई की जा रही है, यह सालभर पहले अपनाई गई होती तो टिकट दलाली पर पूरी तरह अंकुश लग सकता था।