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लखनऊ पीजीआई में जल्द शुरू होगी रोबोटिक सर्जरी, ऐसे करेगा काम और होगा यूं आराम

Mon, 03 Sep 2018 11:12 AM IST
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
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robotic surgery - फोटो : amar ujala
लखनऊ के संजय गांधी पीजीआई में अब रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की तैयारी है। रोबोटिक सर्जरी प्रदेश में पहली बार होगी। इसके लिए नया मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार किया जा रहा है। निदेशक डॉ. राकेश कपूर के मुताबिक करीब तीन माह में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो जाएगी। शुरुआत यूरोलॉजी विभाग से होगी। हालांकि शुरुआती दिनों में छोटे ऑपरेशन किए जाएंगे, बाद में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और कैंसर सहित अन्य विभागों में भी रोबोटिक सर्जरी हो सकेंगी। 
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sgpgi lucknow - फोटो : amar ujala
सजीपीजीआई ने इसके लिए बैंक से कर्ज भी लिया है। करीब 473 करोड़ के लोन में करीब सौ करोड़ रोबोटिक सर्जरी पर खर्च करने की तैयारी है। इसमें 30 करोड़ रुपये का सिर्फ रोबोट ही आएगा। संस्थान में बने एमआरआई कक्ष के ऊपर रोबोटिक सर्जरी के लिए नई तरह का मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर तैयार कराया गया है।
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robotic surgery - फोटो : amar ujala
ये मशीन क्यों खास
जर्मनी में बनी दा विंसी सर्जिकल रोबोटिक मशीन में हाई डेफिनिशन थ्री-डी कैमरा लगा होता है। इससे अंदरूनी अंगों की सटीकता से जानकारी मिलती है। इसकी मदद से छोटे उपकरण शरीर में प्रवेश कराए जा सकते हैं, जो इंसानों के हाथ से कहीं ज्यादा घूमते हैं।

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robotic surgery - फोटो : amar ujala
ऐसे करता है काम
यह सिस्टम एक तरह से यह कंप्यूटराइज्ड सिस्टम से कंट्रोल होता है। सर्जन हाथ से ऑपरेशन करने के बजाय कई रोबोटिक आर्म के सहारे सर्जरी करता है। इन रोबोटिक हाथों को कंसोल के जरिए सर्जन गाइड और कंट्रोल करता है। 
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robotic surgery - फोटो : amar ujala
सर्जन बनाम रोबोटिक सर्जरी
एक सर्जन जहां 10 मिलीमीटर तक सटीकता के साथ काम कर सकते हैं, वहीं एक रोबोट एक मिमी की सटीकता के साथ किसी भी प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा कर सकता है।
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robotic surgery - फोटो : amar ujala
कम समय में अस्पताल से छुट्टी
चीरे बहुत छोटे लगते हैं। इससे मरीज जल्द रिकवर होता है। सामान्य सर्जरी में मरीज को दो घंटे बाद ही छुट्टी मिल जाती है। मरीज को अस्पताल में कम समय रहना पड़ता है। 
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Surgery
पर खर्च ज्यादा
यह मानवीय सर्जरी से करीब 50 हजार से दो लाख रुपये तक महंगी पड़ती है।

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robotic surgery - फोटो : amar ujala
निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का संस्थान को भी फायदा होता है। इसमें अस्पताल प्रशासन को कम स्टाफ लगाना पड़ता है। यह हृदय शल्य चिकित्सा, कोलोरेक्टल सर्जरी, जनरल सर्जरी, गाइनेकोलॉजिकल सर्जरी कर सकती है। उदाहरण के तौर पर ओपन हार्ट सर्जरी में में 10 से 12 इंच तक का चीरा लगता है। इसके बाद सीने की हड्डी को अलग करने के बाद पसलियों के अंदर ऑपरेशन किया जाता है। इसके बाद रोगी को हार्ट मशीन पर रखकर ऑपरेशन किया जाता है, लेकिन इसमें सिर्फ एक चीरे से काम चल जाता है।

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robotic surgery - फोटो : amar ujala
पहले से ज्यादा हो सकेंगे ऑपरेशन
रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से ज्यादा से ज्यादा ऑपरेशन हो सकेंगे। मरीजों के बढ़ते भार को देखते हुए यह जरूरी हो गया है। यह संस्थान का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लिए सरकारी तौर पर नियमानुसार सभी जरूरी अनुमति ली जा चुकी है। इसे शुरू करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञ भी तैयार हैं।
- डॉ. अमित अग्रवाल, सीएमएस, एसजीपीजीआई
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robotic surgery - फोटो : amar ujala
देश में बढ़ रही रोबोटिक सर्जरी
डॉ. राकेश कपूर ने बताया कि अमेरिका में रोबोटिक ऑपरेशन में तमाम नए-नए प्रयोग हुए हैं। भारत में रोबोट का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट से पता चला है कि यहां हर माह करीब 800 सर्जरी इस तकनीक से हो रही है। भारत रोबोट की बिक्री और सर्जरी के मामले में दुनिया का दूसरा बड़ा बाजार बनने की दौड़ में शामिल है। अभी भारत में 50 से ज्यादा सर्जिकल रोबोट हैं, जिसमें 300 से ज्यादा ट्रेंड रोबोट सर्जन हैं। एसजीपीजीआई में रोबोटिक सर्जरी प्रशिक्षण के लिहाज से भी जरूरी है। यहां ट्रेंड होने वाले सर्जन पूरे प्रदेश में काम करेंगे। रोबोटिक सर्जरी के मामले अमेरिका पहले पायदान पर है। इसी तरह जर्मनी और फ्रांस सहित यूरोप के अन्य देशों मेें भी यह प्रणाली लोकप्रिय है। देश में एम्स नई दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़, एम्स ऋषिकेश सहित तमाम निजी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो गई है।
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