लखनऊ में ढाई महीने के लंबे इंतजार के बाद सोमवार को धर्मस्थलों के दरवाजे तो खुले, लेकिन न घंटे गूंजे, न कतारें लगीं और न ही समूह में जुटकर लोगों ने आराधना की। सिर्फ शीश झुकाकर कोरोना के खात्मे और देश-दुनिया में अमन-चैन की मन्नत मांगी। इस दौरान धर्मस्थलों पर हर श्रद्धालु के हाथों को सैनिटाइज किया गया और थर्मल स्क्रीनिंग की गई। इस दौरान पब्लिक एड्रेस सिस्टम से निर्देश दिए जाते रहे। धर्मस्थलों के गेट पर तापमान जांचने, रजिस्टर में नाम, मोबाइल नंबर और सैनिटाइजेशन की व्यवस्था दुरुस्त थी। सुबह से ही मनकामेश्वर में 5-5 की कतारों में पहुंचे भक्तों ने दूर से ही महादेव के दर्शन किए। सात फुट लंबे धातु के अर्घ्य से श्रद्धालुओं ने घर से लाए पानी भरे पात्र से जलाभिषेक किया। सुबह पांच बजे और शाम सात बजे के बाद महंत देव्या गिरी ने महादेव की आरती की। दोपहर एक बजे तक 750 और शाम 6 बजे तक 1100 से अधिक श्रद्धालु मंदिर जा चुके थे। सिविल डिफेंस के रामशंकर ने बताया कि दोपहर के समय धूप में चलकर आए तमाम श्रद्धालु जिनका तापमान 100 फारेनहाइट से अधिक पाया गया। उन्हें रोका गया। वहीं, गाइडलाइन के तहत दर्शन पूजन का क्रम राजेंद्र नगर स्थित महाकाल मंदिर में भी सुबह और शाम के समय में चला। भक्त अतुल मिश्रा की अगुवाई में गेट पर श्रद्धालुओं की पड़ताल की गई। गोमती नगर के लॉर्ड अय्यप्पा मंदिर, चौक के बड़ी काली जी मंदिर, शास्त्री नगर के दुर्गा जी मंदिर में भी लंबे समय बाद श्रद्धालु मास्क पहने हुए दर्शन करने पहुंचे। राजाजीपुरम के टडियन हनुमानजी मंदिर में बिना मास्क पहुंच रहे कई भक्तों को शाम को पुजारियों ने लौटा दिया। दोपहर बाद यहां मंदिर के बाहर लटक रहे घंटों को ढकने की कवायद हुई।