राजधानी लखनऊ में कोविड 19 वायरस कमजोर नहीं हुआ है। हालांकि, बीते दिनों में नए मरीजों की संख्या में कमी आई है। विशेषज्ञ इसके लिए टीकाकरण और हर्ड इम्युनिटी को कारण मान रहे हैं। टीकाकरण की वजह से लोग कम संक्रमित हो रहे हैं। वहीं, सीरो सर्वे के अनुसार 70 फीसदी से ज्यादा आबादी संक्रमित हो चुकी है। ऐसे में हर्ड इम्युनिटी विकसित होने से उन्हें वायरस के मौजूदा स्ट्रेन से ज्यादा खतरा नहीं है। हमारे शरीर ने इस वायरस के हिसाब से खुद को तैयार कर लिया है। खतरे की बात तब होगी जब वायरस अपना स्वरूप बदले, हालांकि फिलहाल ऐसा नहीं हो रहा है। बावजूद इसके अब भी पूरी सावधानी बरतनी होगी। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ज्यादा से ज्यादा कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से ही कोरोना से निजात मिल सकती है।
राजधानी में एक सप्ताह से रोजाना आठ से दस हजार लोगों की आरटीपीसीआर जांच की जा रही है। किसी भी दिन संक्रमितों का आंकड़ा पांच के ऊपर नहीं पहुंचा है। जनपद में हो रही आरटीपीसीआर जांच में ज्यादातर संख्या कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की है। बाकी हिस्सा रेंडम सैंपलिंग तथा अस्पताल में इलाज कराने आने वालों का है। जो लोग संक्रमित मिल रहे हैं, उनकी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है। संक्रमण के ज्यादातर केस अस्पताल में इलाज के लिए आए लोगों या फिर रेंडम सैंपलिंग में से हैं। कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग से संक्रमण का एक भी मामला इस समय नहीं मिल रहा है।