कमेंट्रेटर वसीम रजा ने एक भी मैच नहीं किया मिस
अरे भाई, किधर चले जा रहे हो दिखता नहीं बाउंड्री लाइन का चूना लगा हुआ है, बाहर निकलिए। ग्राउंड के एक कोने पर बनी मचान पर बैठे 67 वर्षीय बुजुर्ग वसीम रजा मुस्तैदी से माइक संभालकर कुछ इस अंदाज में कमेंट्री के साथ स्कोरिंग की दोहरी भूमिका निभाते दिखे। वर्ष 1991 में प्रतियोगिता शुरू होने के समय से कमेंट्री कर रहे वसीम ने शायद ही कोई मैच मिस किया हो। आवाज में भले ही उनकी पुरानी वाली खनक नहीं है, लेकिन दर्शक आज भी उनकी कमेंट्री का पूरा लुत्फ उठाते है। वसीम के साथ युवा कमेंट्रेटर राहुल भी रोचक अंदाज में कमेंट्री करते दिखे। अगर दर्शक को किसी काम से मैदान छोड़ना पड़ जाता है तो वे वसीम और राहुल की जुगलबंदी वाली कमेंट्री सुनकर खुद को अपडेट कर लेते है।