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घर खरीदना आसान तो किसी को बड़ी राहत, जानें- बजट पर क्या कहती है जनता

Thu, 02 Feb 2017 06:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
बजट का इंतजार था। इंतजार इसलिए भी कि उम्मीदों की प्याली में नोटबंदी के बाद की परेशानियों के 'कसैले स्वाद' को भुला देगी। नई ताजगी... नया उत्साह होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कोशिशें भी कीं। कम आमदनी वालों को आयकर की छूट की सीमा को तीन लाख कर दिया।

पांच लाख की आय पर टैक्स की दर आधी कर दी। नोटबंदी के बाद से ग्राहक को तरस रहे रियल एस्टेट सेक्टर को बूस्टर डोज भी देने की कोशिश की। पर उम्मीद की प्याली में भी कुछ कमी रह गई। लोगों का कहना है कि थोड़ी चीनी कम है...। बैलेंस तो बनाया गया पर नोटबंदी का असर झेल रहे लोगों को तो कुछ ज्यादा ही मिठास की आस थी। जानिए हर वर्ग की उम्मीदें और उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरा यह बजट-
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बजट का महंगाई पर असर नहीं
प्रतिक्रिया - कुसुम का कहना है कि नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार महंगाई कम करने और आमजन को राहत देने के लिए कोई खास कदम उठाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आयकर सीमा में छूट भी ज्यादा नहीं दी गई। जिन योजनाओं की घोषणा की गई वो दूरदर्शी नहीं हैं। ऐसे में इस बजट का तत्काल फायदा किसी को नहीं मिलने वाला है। सरकार को चाहिए था कि मध्यम वर्ग की जरूरतों को समझते हुए कुछ फैसले लिए जाते। इसमें सबसे ज्यादा जरूरत रोजमर्रा के सामान की कीमतों को नियंत्रित किया जाना है।

समूह - गृजेश कुमार पांडेय, कुसुम पांडेय, निकिता

नंबर - 06/10 (बज‌ट को दस में से छह नंबर दिए।)
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अब खुद का मकान खरीदना हुआ आसान
प्रतिक्रिया- आरिश का कहना है कि छोटे मकान खरीदने के लिए बजट में काफी कुछ रियायत दी गई है। इससे अब खुद का मकान खरीदना संभव हो जाएगा। अभी तक मकान या फ्लैट खरीदने के बारे में सोचना ही एक बड़ी बात थी। इसकी वजह से घर की कीमतों का आसमान छूना था। अब जब कम कीमत में फ़्लैट या मकान मिल पाएंगे ऐसे में इसके बारे में सोचा जा सकता है। वहीं 24,000 की जगह 60,000 रुपए किराए पर छूट की सीमा आयकर में शामिल होने से भी राहत मिलेगी।

समूह - इनायत हाशमी, आरिश अदीब, परवीन जाफरी, नसरीन।

नंबर - 07/10 (दस में से सात अं‌क दिए।)

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लोन की ईएमआई कम नहीं हुई
प्रतिक्रिया - पेशे से चिकित्सक डॉ. विष्णुदेव का कहना है कि अरुण जेटली का बजट अच्छा है। इसमें उन्होंने सभी का ध्यान रखा गया है। इसके उलट अभी मध्यम वर्ग को कर्ज में छूट दिए जाने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए थे। अगर टैक्स में थोड़ी ज्यादा राहत मिलती। जैसे आयकर की छूट की सीमा को तीन की जगह पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए था। इसके अलावा ब्याज की दरों को कम करने की उम्मीद नोटबंदी के बाद थी। इससे महंगाई से जूझ रहे परिवारों की ईएमआई कम होने से राहत मिलती। केंद्रीय परीक्षाओं के लिए जो घोषणाएं हुई हैं। इन्हें जितना जल्दी सरकार अमल में लाएगी उतना ही बेहतर होगा।

समूह - संध्या देव, डॉ. विष्णु देव, उत्कर्ष देव, विशाखा देव

नंबर - 07/10 (दस में से सात अंक दिए।)
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बुनियादी शिक्षा को रखा अछूता
प्रतिक्रिया : बजट में स्किल डवलपमेंट की बात की गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में बुनियादी शिक्षा को अछूता रखा गया है। भारत की ज्यादातर आबादी गांवों में रहती है, इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार की व्यवस्था होनी चाहिए। बजट को औसत कहा जा सकता है। स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप आदि की व्यवस्था हो सकती थी, लेकिन नहीं की गई। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी कोई खास कदम नही उठाए गए हैं। हां, यह कहा जा सकता है कि बजट में बढ़ा-चढ़ाकर वायदे नहीं किए गए हैं। सब कुछ जमीनी स्तर का है।

समूह - सोमोजिता, रीमा, श्रेया, अथोबी

नंबर - 05/10
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नहीं हुई रोजगार की बात
प्रतिक्रिया - केंद्रीय स्तर पर सभी परीक्षाएं एक ही स्तर पर कराने की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन पढ़ाई के बाद रोजगार कैसे मिलेगा बजट में इसकी अनदेखी की गई है। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम का दायरा कक्षा आठ तक के बजाय कक्षा 12 तक होना चाहिए। बजट मेंऑनलाइन कोर्स और स्किल डवलपमेंट की बात कही गई है, लेकिन प्राइमरी शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी ध्यान होना चाहिए। सबसे बड़ी जरूरत शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की थी, लेकिन बजट में इसके लिए कुछ नहीं है। बालिका शिक्षा भी बड़ा मुद्दा है इसकी अनदेखी की गई है। कुल मिलाकर बजट औसत से नीचे के स्तर का है।

समूह - सौम्या, सृष्टि, निकिता, पूनम, श्रेष्ठी

नंबर - 04/10
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नहीं मिला रोजगार और महंगी शिक्षा का विकल्प
प्रतिक्रिया-  दुर्बल आय वर्ग के बच्चे उच्च शिक्षा कैसे प्राप्त कर सकते हैं, इसके बारे में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था होनी चाहिए थी, जिससे कि वे अपनी पढ़ाई कर सकें। बजट में रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कोई योजना ही नहीं है।। सरकार ने पिछले साल भी जितने रोजगार देने की बात कही थी, इस साल तो वह दावा भी नहीं किया गया। स्किल डवलपमेंट, ऑनलाइन कोर्स आदि को व्यवहारिक रूप से सफल नहीं हो सकते। बजट में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे योजनाएं धरातल पर लाई जा सकें।

समूह - प्रांजल दीक्षित, सोनू यादव, अंकुर सिंह, अंकित कुमार, गौरव त्रिपाठी, बिलाल

नंबर - 06/10

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राज्य कर्मचारियों ने कहा, सरकार ने राहत नहीं दी
प्रतिक्रिया : पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले आए आम बजट से राज्य कर्मचारियों को काफी उम्मीद थी, लेकिन बजट उस पर खरा नहीं उतरा। इंदिरा भवन के कर्मचारियों ने कहा कि सरकार ने आयकर की सीमा ढाई से बढ़ाकर तीन लाख करके आंसू पोंछने का काम किया है, लेकिन कोई राहत नहीं दी। पांच लाख तक पांच फीसदी टैक्स करने का कोई खास फायदा नहीं होगा। सरकार ने महंगाई भत्ता और डीए भी नहीं बढ़ाया जबकि पूर्व में 7 फीसदी तक मिला है। सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद अब तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि आयकर सीमा पांच लाख तक की जाएगी। कर्मचारियों ने रेलवे और रोडवेज के सफर में छूट देने की अपेक्षा की। साथ ही सस्ते आवास भी देने की मांग की ताकि उन्हें किराए के मकान में काफी पैसा ना खर्च करना पड़े।

समूह- इजहार अहमद, एसएन मिश्रा, अजय कुमार द्विवेदी, विकास गौतम, फैयाज अहमद, शकील अहमद।

नंबर - 04/10

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वेतन की तुलना में बढ़ती आयकर सीमा
प्रतिक्रिया : आम बजट से केंद्रीय कर्मचारी भी बहुत खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि सातवें वेतन आयोग में वेतन ढाई फीसदी बढ़ा है, उसी के सापेक्ष सरकार को आयकर सीमा भी बढ़ानी चाहिए थी। ऐसा न करने से उन्हें सातवें वेतन आयोग का कोई फायदा ही नहीं मिलेगा। बढ़ा हुआ वेतन टैक्स में चला जाएगा। सरकार ने कोई अलाउंस नहीं घोषित किया। उम्मीद है कि विधानसभा चुनाव के बाद शायद घोषणा हो। प्रधान डाकघर कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को सभी को बराबर टैक्स देने की व्यवस्था करनी चाहिए। हालांकि कर्मचारियों ने माना कि अन्य देशों की अपेक्षा भारत में टैक्स कम लिया जा रहा है। सरकार अर्थव्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास कर रही है। डाकघर से पासपोर्ट बनाने की घोषणा का कर्मचारियों ने स्वागत किया है। उनका कहना था कि अब तक हम आवेदन फार्म लेते थे, अब पूरा पासपोर्ट बनाएंगे। हमारे पास इससे जुड़े सभी डाटा उपलब्ध हैं।

समूह - रामसुख, रमेश चंद्र, ज्योति गुप्ता, श्रीराम दुबे, एचआर चौरसिया, वीपी पांडेय।

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बजट महज खानापूर्ति, कुछ खास नहीं
प्रतिक्रिया : लोहिया अस्पताल के डॉक्टर कहते हैं कि केंद्र सरकार का बजट कुछ खास नहीं रहा। उम्मीद थी कि टैक्स में राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। कुुछ योजनाएं देशहित के लिए बेहतर हैं, लेकिन उनके क्रियान्वयन में समय लगेगा। बजट में सेंट्रलाइज एग्जाम सिस्टम और हायर एजुकेशन में सुधार की बात की गई है। सरकार को चाहिए था कि इसके लिए सबसे पहले वो बेसिक एजुकेशन सिस्टम को ठीक करे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं रहा। नोट बंदी के बाद बजट से आस थी कि मोदी सरकार देशवासियों को कुछ खास तोहफा देगी, लेकिन सब सपना रह गया। बजट में भी काले धन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का इंतजाम किया गया है। तीन लाख से अधिक की राशि का लेनदेन कैश में नहीं होगा। ये अच्छा फैसला है। जिस तरह से गंभीर बीमारियां फैल रही हैं उस आधार पर सरकार को बजट में कुछ खास कदम उठाने चाहिए थे, जिससे रोगियों और उनके परिवारीजनों को इलाज की राह आसान हो सके।

समूह - डॉ. एके श्रीवास्तव, डॉ. संजीव खटवानी, डॉ. संदीप चौधरी, डॉ. पंकज वर्मा, डॉ. सुभाष

नंबर : 05/10
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