चारबाग रेलवे स्टेशन की बनावट दिल को छू लेने वाली है। आसमान से देखने पर यह शतरंज की बिसात सा नजर आता है, जहां मुहरें खड़ी दिखती हैं। यह तो हो गई चारबाग स्टेशन की बात। वहीं लोको वर्कशॉप है, जहां भाप के इंजनों की मरम्मत होती थी और कैरिज एंड वैगन वर्कशॉप में लकड़ी की बोगियों की मरम्मत की जाती थी। ऐसे ही रेलवे पुलों के लिए गर्डर बनाने के लिए ब्रिज वर्कशॉप तो डीजल इंजनों के लिए डीजल शेड। ये उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ऐसी ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जो रेलवे की शान बढ़ाती हैं। ये खुद में स्वर्णिम इतिहास को समेटे हुए हैं। 16 अप्रैल 1853 को मुम्बई से थाणे के बीच पहली रेल चलाई गई थी, जिसे रेल सप्ताह के तौर पर मनाया जाता है।