उज्ज्वला कनेक्शन धारी तो दूर सामान्य गैस कनेक्शन के गरीब व मध्यम वर्ग के लोग भी गैस की रीफिलिंग कराने से मुंह मोड़ रहे हैं। गृहणियों ने चाय व भोजन आदि का कार्य करने के लिए पारंपरिक लकड़ी, उपली का प्रयोग करना शुरू कर दिया हैं। इसकी वजह इन दिनों गैस सिलिंडर के दामों में हुई बेतहाशा मूल्य वृद्धि है। हाल ही में 50 रुपये हुई मूल्य वृद्धि के बाद अब घरेलू गैस की कीमत 1054 रुपये हो गई है। उसमें भी मिलने वाली सब्सिडी बंद हो गई है। ऐसे में उपभोक्ता करे तो क्या करें।
गरीब मध्यम वर्ग के लोग काफी परेशान हैं। कुछ गृहणियां तो चाय नाश्ते के लिए गांवों में गैस का उपयोग कर रही हैं। भोजन बनाने के लिए लकड़ी व उपली आदि का प्रयोग कर रही हैं। कुछ ने तो गैस रीफिलिंग कराना एकदम बंद कर दिया है। अमेठी के ब्लॉक क्षेत्र के रामगंज स्थित शशांक गैस सर्विस की स्थिति देखने से अंदाजा लगाया जा सकता है की कितने उपभोक्ता गैस की रीफिलिंग करा रहे हैं।
आलम यह है की उज्ज्वला योजना के महज 20 प्रतिशत उपभोक्ता रीफिलिंग करा रहे हैं, वहीं सामान्य गैस कनेक्शन के एक तिहाई से कम उपभोक्ता रीफिलिंग करा रहे हैं। सभी को मिलाकर हर माह रीफिलिंग कराने वालों की संख्या पिछले सालों की तुलना में घटती जा रही है। घरेलू गैस में आए दिन हो रही मूल्य वृद्धि को लेकर गृहणियों में काफी आक्रोश व्याप्त है।