कोरोना महामारी के साये में रहे साल 2020 का अंत सियासी तपिश के साथ हो रहा है। करीब 6 माह तक ठप रही राजनीतिक गतिविधियां तेजी पकड़ने लगी हैं। विलंब से ही सही, शिक्षक व स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव संपन्न हो गए। 7 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव और राज्यसभा चुनाव हो गए। साल के आखिरी महीने में तीन कृषि बिलों को लेकर राजनीति गरमाई रही।
सपा, कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने जहां सरकार को घेरा, वहीं मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायकों समेत पूरी भाजपा सम्मेलनों और सभाओं के जरिये किसानों की लामबंदी करके इसका जवाब देती रही।
सपा नेता किसानों के समर्थन में गांवों में चौपाल लगा रहे हैं तो कांग्रेस साल के अंत में भी वजूद के लिए सड़कों पर जूझती दिखी। आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी प्रदेश में सियासी जमीन तलाशने के लिए पहुंच गईं। प्रदेश में छोटे दलों के गठबंधन की आहट सुनाई देने लगी है।