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यूपी में भाजपा के दबदबे के बीच ओवैसी की इंट्री ने मचाई हलचल, साल के अंत में आक्रामक हुए अखिलेश

Thu, 31 Dec 2020 04:28 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ओवैसी व अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
कोरोना महामारी के साये में रहे साल 2020 का अंत सियासी तपिश के साथ हो रहा है। करीब 6 माह तक ठप रही राजनीतिक गतिविधियां तेजी पकड़ने लगी हैं। विलंब से ही सही, शिक्षक व स्नातक क्षेत्र से विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव संपन्न हो गए। 7 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव और राज्यसभा चुनाव हो गए। साल के आखिरी महीने में तीन कृषि बिलों को लेकर राजनीति गरमाई रही।

सपा, कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों ने जहां सरकार को घेरा, वहीं मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायकों समेत पूरी भाजपा सम्मेलनों और सभाओं के जरिये किसानों की लामबंदी करके इसका जवाब देती रही।

सपा नेता किसानों के समर्थन में गांवों में चौपाल लगा रहे हैं तो कांग्रेस साल के अंत में भी वजूद के लिए सड़कों पर जूझती दिखी। आम आदमी पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम भी प्रदेश में सियासी जमीन तलाशने के लिए पहुंच गईं। प्रदेश में छोटे दलों के गठबंधन की आहट सुनाई देने लगी है।
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- फोटो : amar ujala
लॉकडाउन में सियासी चौसर पर भारी पड़ी भाजपा
लॉकडाउन के दौरान जब देश-प्रदेश में राजनीतिक, धार्मिक व आर्थिक गतिविधियां ठप हो गईं थी तब भाजपा ने ‘सेवा ही संगठन’ के नए नारे के साथ मैदान में उतरकर लोगों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

खास बात यह रही कि पूरे कोरोना काल में विपक्ष एक तरह से भाजपा के पीछे चलता नजर आया। सेवा कार्यों के बहाने ही सही, कोरोना की चुनौतियों के बीच भाजपा नेतृत्व ने लोगों से लगातार डिजिटल संवाद व संपर्क किया। इसी साल भाजपा को प्रदेश की नई टीम, राधामोहन सिंह के रूप में नए प्रदेश प्रभारी और दो सह महामंत्री (संगठन) कर्मवीर सिंह और भवानी सिंह मिले।
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- फोटो : अमर उजाला
भाजपा का दबदबा: राज्यसभा में बढ़ी ताकत, सियासी समीकरण उभरे
नवंबर माह में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव में जहां भाजपा की ताकत बढ़ी है, वहीं नए सियासी संकेत भी मिले। अपने दांव से बसपा एक सीट पाने में कामयाब जरूर रही, लेकिन उसमें बगावत की चिंगारी भी फूट गई। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह समेत भाजपा के 8 नेता राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुन लिए गए।

सपा से रामगोपाल यादव और बसपा से रामजी गौतम भी राज्यसभा के लिए चुने गए। उधर, बसपा उम्मीदवार गौतम के चार प्रस्तावकों ने नामांकन पत्र पर अपने हस्ताक्षर होने से इन्कार किया था। इसके बावजूद उनका नामांकन सही ठहराया गया। बसपा के कुछ विधायकों की बगावत के बाद मायावती ने यह कहकर नई राजनीति का संकेत दिया कि विधान परिषद चुनाव में सपा को हराने के लिए वह भाजपा का समर्थन कर सकती है। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनके बयान को गलत ढंग से लिया गया है।

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- फोटो : amar ujala
विधानसभा उपचुनावों में दिखाया दम
नवंबर में विस की 7 सीटों पर उपचुनाव में भाजपा ने 6, सपा ने एक सीट बरकरार रखी। 6 सीटों को फिर से जीतकर भाजपा ने अपना दबदबा बरकरार रखा। कांग्रेस बांगरमऊ (उन्नाव) में और बसपा बुलंदशहर और घाटमपुर में दूसरे स्थान पर रही।

इन उपचुनाव में दिवंगत कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान की पत्नी संगीता चौहान नौगांवा सादात (अमरोहा) से, विधायक वीरेंद्र सिंह सिरोही की पत्नी उषा सिरोही बुलंदशहर से और पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव मल्हनी (जौनपुर) से विजयी रहे।
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- फोटो : amar ujala
आखिर में सपा हुई आक्रामक: अखिलेश मैदान में उतरे, किसानों को लेकर घेराबंदी
सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नए कृषि बिलों के विरोध और किसान आंदोलन के समर्थन में इस साल के जाते-जाते तेवर दिखा ही दिए। 8 दिसंबर को उन्होंने किसान यात्रा में शामिल होने के लिए कन्नौज जाने का एलान किया था।

पुलिस ने विक्रमादित्य मार्ग पर उनके आवास से सपा मुख्यालय तक बैरिकेडिंग करके जबरदस्त घेराबंदी की। पहले उन्हें बाहर ही नहीं निकलने दिया गया। इसके बावजूद वह बंदरिया बाग चौराहे तक पहुंचे गए। पुलिस ने उन्हें वहां रोका तो उन्होंने सड़क पर बैठकर धरना दिया। उनके खिलाफ महामारी एक्ट में केस दर्ज किया है।
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- फोटो : एएनआई
सियासी जमीन की तलाश: साल भर संघर्ष करती नजर आई कांग्रेस
वर्ष 2020 में कांग्रेस ने अपने वजूद के लिए मजबूती से संघर्ष किया। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ मुजफ्फरनगर से आजमगढ़ तक महासचिव प्रियंका गांधी सड़कों पर नजर आईं। सोनभद्र के उभ्भा कांड के समय चुनार किले में नजरबंद महासचिव प्रियंका गांधी शायद ही यूपी के किसी मसले पर चुप बैठीं हों। हाथरस की बेटी के इंसाफ के लिए प्रियंका व राहुल सड़कों पर लड़ते दिखे।

कोरोना व नए कृषि कानूनों के पहले से किसानों के लिए जमीन पर काम कर रही कांग्रेस ने फरवरी में किसान जनजागरण अभियान शुरू किया था। सितंबर में अयोध्या में भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों के आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू शामिल हुए। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इस साल राजनीतिक आंदोलनों में लल्लू सबसे ज्यादा बार गिरफ्तार किए गए और लंबे समय तक जेल में भी रहे।
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अरविंद केजरीवाल - फोटो : ANI
राजनीति की नई धार..: आप तलाशेगी यूपी में सियासी जमीन
यूपी में सियासी जमीन तलाश में आम आदमी पार्टी (आप) ने एकाएक सक्रियता बढ़ा दी। प्रदेश प्रभारी प्रदेश संजय सिंह ने पल्स ऑक्सीमीटर व इंफ्रारेड थर्मामीटर खरीद घोटाला, हाथरस कांड, गन्ना किसानों के बकाया भुगतान, शिक्षक भर्ती में पिछड़ों का आरक्षण समेत कई मुद्दे उठाकर आप को चर्चा में बनाए रखा। दिसंबर में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने बाकायदा यूपी में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।
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- फोटो : ANI
ओवैसी की एंट्री, नए गठबंधन के संकेत
बिहार चुनाव में 5 सीटें जीतने से उत्साहित एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में छोटे दलों के साथ मिलकर लड़ने का एलान किया है। साल बीतने से पहले वह लखनऊ आकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से मिले। जल्द ही उनकी मुलाकात प्रसपा (लोहिया) के मुखिया शिवपाल सिंह यादव व अन्य दलों के नेताओं से हो सकती है।
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