राजकुमारी जहांनारा और रौशनारा के बीच मतभेद के दृश्यों ने दर्शकों को माथे पर बल ला दिए।
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...और मंच पर उतर आया ‘औरंगजेब’
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पूरे नाटक के कई दृश्य यह सोचने पर मजबूर करने वाले थे कि जो इतिहास लिखा गया वह सही है या जो हमारे सामने हो रहा है वो।
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...और मंच पर उतर आया ‘औरंगजेब’
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1657 में मुगलिया सल्तनत की सत्ता हासिल करने की घटना से शुरू हुआ नाटक दर्शकों का ध्यान कई मोड़ों पर आकर्षित करता है।
...और मंच पर उतर आया ‘औरंगजेब’
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‘एक मुल्क, एक जुबान और एक मजहब’ के अपने ख्वाब को पूरा करने के लिए हिंदुस्तान में भारी कत्लेआम और खून की नदियां बहाईं, लेकिन अंत तक एकाकी जीवन की कशमकश से जूझता रहा।
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...और मंच पर उतर आया ‘औरंगजेब’
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औरंगजेब के जीवन की उधेड़बुन जब मंच पर उतरकर आई तो दर्शक सोच में पड़ गए।
गुरुवार को रेपट्वा नाट्य समारोह का उद्घाटन हुआ। इस मौके पर संगीत नाटक अकादमी के मंच पर इंदिरा पार्थ सारथी द्वारा लिखे गए नाटक 'औरंगजेब' का मंचन किया गया। (सभी फोटो: अमित सिंह)