गंदे बदबूदार ट्रैक। कीचड़ से भरी हुई पटरियां। टूट-फूटे प्लेटफॉर्म। बैठने की अपर्याप्त व्यवस्था। खराब डिस्प्ले बोर्ड। यहां-वहां घूमते जानवर और जर्जर सीढ़ियां। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर सात की यही पहचान रही है।
लेकिन अब इसकी सूरत बदलने वाली है। प्लेटफॉर्म नए कलेवर में नजर आएगा। रेलवे 6.87 करोड़ रुपये से इसे ‘आदर्श प्लेटफॉर्म’ बना रहा है। इसका काम शुरू हो गया है। उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के एवन श्रेणी के चारबाग रेलवे स्टेशन पर रोजाना 285 से अधिक ट्रेनों का आना-जाना होता है।
इनसे सवा लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। यहां प्लेटफॉर्म नंबर एक वीआईपी माना जाता है, जो लंबाई के लिहाज से सबसे अच्छा है। एसी एक्सप्रेस सरीखी ट्रेनें इसी प्लेटफॉर्म से रवाना होती हैं। जबकि प्लेटफॉर्म नंबर छह-सात दुर्दशा के शिकार रहे हैं, जो स्टेशन की छवि को दागदार करते रहे हैं। अब इन प्लेटफॉर्मों की तबीयत सुधारी जा रही है।
क्रमवार पूरा किया जाएगा काम
डेमो
मंडल रेल प्रबंधक सतीश कुमार ने बताया कि प्लेटफॉर्मों की मरम्मत 6.87 करोड़ रुपये से होगी। इनकी सरफेस को तोड़ा जा रहा है और उसकी जगह मोटी कंक्रीट का प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्म पर लगे वाटर कूलरों को बदला जाएगा।
ये स्टेनलेस स्टील के लगाए जाएंगे। फिलहाल जो लगे हैं, वह पुराने व जर्जर हो रहे हैं। साथ ही यहां पर स्टील की कुर्सियां व बेंचें लगाई जाएंगी। क्रमवार काम को पूरा किया जाएगा।
चूहे नहीं बना पाएंगे सुरंग
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प्लेटफॉर्म का शेड छोटा है, जिससे बारिश के दौरान यात्रियों को ट्रेन के इंतजार के लिए खुले में खड़ा होना पड़ता है तथा ठंड व गर्मी में भी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। लिहाजा उनकी सुविधा के लिए शेड की लंबाई बढ़ाई जा रही है। इसके लिए फाउंडेशन रखे जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्लेटफॉर्मों के दोनों छोर पर ट्रेन कोच गाइडेंस सिस्टम भी लगेंगे।
प्लेटफॉर्म का सरफेस तोड़ा जा रहा है और उसकी जगह कंक्रीट की मोटी सतह बिछाई जा रही है। यह इतना मजबूत है, जिसमें चूहे सुरंग नहीं बना पाएंगे। इससे प्लेटफॉर्म के धसकने का डर भी खत्म हो जाएगा और रेलवे को चूहों को मारने के लिए पैसा भी खर्च नहीं करना पड़ेगा।
शुरू हुआ कायाकल्प का काम
प्लेटफॉर्म नंबर छह व सात दुर्दशा के शिकार थे। अब वे आदर्श प्लेटफॉर्म बनेंगे। 6.87 करोड़ रुपये से प्लेटफॉर्मों का का कायाकल्प करवाया जाएगा। इसके लिए सरफेस बनाने का काम शुरू भी हो गया है। साथ ही शेडों की लंबाई भी बढ़ेगी। - सतीश कुमार, डीआरएम, उत्तर रेलवे