कितने तेरे रूप कितने तेरे नाम रे....सिर्फ नाम ही नहीं नटखट नागर के ऐसे अनगिनत रूपों की एक बार फिर से साक्षी बनी लखनऊ की सरजमीं। मौका था ‘अमर उजाला’ के सालाना आयोजन ‘घर-घर कान्हा’ का। अपने उसी अंदाज, उसी त्यौहारी रौनक के बीच कार्यक्रम का आयोजन रविवार को डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान परिसर में किया गया।
हर बार की तरह दूर-दराज के इलाकों से लोग अपने-अपने लाडले और लाडलियों को कान्हा और राधा के रूप में सजा-संवार कर लेकर आए। कोई पहली बार आया, तो किसी के लिए यह तीसरा साल था। खास बात रही कि जो पहले भी आ चुके थे, वे परिवार अपने साथ इस बार अपने दोस्त के परिवार, नाते-रिश्तेदारों को लेकर भी आए।
किसी परिवार के लिए यह आयोजन बच्चे की प्रतिभा को एक मंच देने का जरिया है तो किसी माता-पिता के लिए बच्चों में आत्मविश्वास को बढ़ाने का साधन। साथ ही भला कौन है जो नहीं चाहता कि उससे कलेजे के टुकड़े को लोग सजा-संवार देखें।
सेल्फी के इस दौर में हर मां की ख्वाहिश थी कि उसके कान्हा बने बच्चे के साथ उसकी भी फोटो अखबार में छपे और यही चाहत उन्हें हर बार इस कार्यक्रम तक खींच लाती है। आगे देखें, तस्वीरें-