उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित पीसीएस परीक्षा-2018 का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। परीक्षा में लखनऊ के मेधावियों ने अपने हुनर का करिश्मा दिखाया तथा मेरिट में जगह बनाई। पुलिस कांस्टेबल की बेटी ज्योति शर्मा ने परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल किया तो दिव्या, श्रुति, आकांक्षा, अजेंद्र, आशुतोष तिवारी, अंकित सिंह और प्रशांत सिंह के साथ ही काफी परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की। पीसीएस अभ्यर्थी काफी समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे। पीसीएस-2018 के इंटरव्यू हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। अब जाकर परिणाम घोषित किया गया है। ‘अमर उजाला’ ने मेधावियों से बात करके उनकी सफलता की कहानी जानने का प्रयास किया। पेश है रिपोर्ट :
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ज्योति शर्मा
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ज्योति ने हासिल की तीसरी रैंक
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2018 की परीक्षा में तीसरा स्थान ज्योति शर्मा ने राजधानी का नाम रोशन किया है। मूल रूप से मथुरा निवासी ज्योति इस समय अयोध्या के मिल्खीपुर ब्लॉक में बीडीओ के पद पर हैं। उनके पिता देवेंद्र शर्मा पुलिस विभाग में हैं और लखनऊ में तैनात हैं, मां उमा शर्मा गृहिणी हैं। ज्योति का परिवार लखनऊ में ही रह रहा है और उन्होंने यहीं से परीक्षा की तैयारी भी की है। ज्योति ने बताया कि पिछली बार पीसीएस परीक्षा-2017 का रिजल्ट 11 अक्तूबर को आया था। बीडीओ पद पर नाम आने से थोड़ी निराशा हुई थी। 18 अक्तूबर को पीसीएस-2018 का इंटरव्यू था, इसलिए काफी अपसेट थी, पर इंटरव्यू अच्छा हो गया। अगला लक्ष्य आईएएस बनना है। जूनियर्स को ज्योति शर्मा सलाह देती हैं कि सिविल सेवा में तैयारी के लिए कड़ी मेहनत के साथ लगन भी जरूरी है। किसी की आलोचना को सकारात्मक रूप में लें तथा उन्हें गलत साबित करने का प्रयास करें। ज्योति की छोटी बहन कीर्ति शर्मा ओएनजीसी में वैज्ञानिक और भाई दीपक शर्मा वॉलीबाल का राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी है।
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दिव्या त्रिपाठी
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सच्चे मन से प्रयास दिलाता है सफलता
मेरे भाई रितेश त्रिपाठी का चयन डीएसपी 2017 में हुआ है और बहन प्रज्ञा त्रिपाठी का चयन 2017 में डिस्ट्रिक एंप्लॉयमेंट ऑफिसर के पद पर हुआ है। मेरे पिता स्व. मोहनचंद्र त्रिपाठी का सपना था कि हम सभी प्रशासनिक सेवा में जाएं। आज रिजल्ट घोषित हुआ तो उनका यह सपना सच हो गया। मेरा यह पहला प्रयास था। मैंने इंजीनियरिंग की है उसके बाद मैं सैमसंग में कार्यरत रही। काम करते हुए ही मेरा चयन एसएससी सीजीएल के पद पर हुआ। उसके बाद से मैंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। मेरा मानना है कि सच्चे मन से अगर प्रयास किया जाए तो फिर सफलता जरूर हाथ लगती है। - दिव्या त्रिपाठी, डिस्ट्रिक्ट इंप्लायमेंट ऑफिसर
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डॉ श्रुति पांडेय
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नियमित पढ़ाई और रिवीजन जरूरी
पीसीएस की पिछली परीक्षा में मेरा चयन सीटीओ के पद पर हुआ था। इस बार मैंने दोबारा मेहनत की और मुझे असिस्टेंट कमिश्नर टैक्स का पद मिला है। मेरे पिता पारस नाथ पांडेय पासपोर्ट ऑफिस में कार्यरत हैं। सफलता हासिल करने के लिए जरूरी है कि हिम्मत न हारी जाए। लगातार प्रयास करने से सफलता जरूर मिलती है। प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए यह जरूरी है कि नियमित पढ़ाई करें तथा उसको लगातार रिवाइज भी करते रहें। परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए मैं अपने परिवार तथा सबसे ज्यादा अपने पापा को श्रेय देना चाहूंगी। - डॉ. श्रुति पांडेय, असिस्टेंट कमिश्रर टैक्स
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आकांक्षा सिंह
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सच्ची लगन से मिलती है जीत
मेरी मां सावित्री सिंह भारतीय किसान यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। पिता जय किशोर पीएससी में कार्यरत हैं। घर पर मां को किसानों के लिए दिन रात काम करते देख मेरे अंदर भी यह जज्बा है कि मैं भी किसानों और पिछड़ों के लिए कुछ कर पाऊं। एसडीएम के पद पर तैनात होकर मैं उनके लिए काफी कुछ कर सकती हूं। मैंने आईटी कॉलेज से स्नातक और लखनऊ विद्यालय से भूगोल में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की है। सच्ची लगन से मेहनत की जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता है। - आकांक्षा सिंह, एसडीएम 28वी रैंक
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प्रीति श्रीवास्तव
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उत्तर लेखन का करें अभ्यास
वर्ष 2007 में जब एमए की पढ़ाई कर रही थी तब मेरी शादी हो गई थी। बच्ची जब थोड़ी बड़ी होने लगी तो मेरी दिलचस्पी पीसीएस परीक्षा के लिए जागी और 2016 में मैंने तैयारी शुरू कर दी। दूसरे प्रयास में जिला लेखा परीक्षा के लिए चयनित हो गई। शादी के इतने साल बाद दोबारा पढ़ाई करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसमे पति विकास श्रीवास्तव ने भरपूर साथ निभाया। बच्ची और घर की भी देखभाल उन्होंने की। अपनी सफलता का श्रेय मैं उनको ही देती हूं। दूसरे अभ्यर्थियों की मेरी सलाह है कि वे जमकर उत्तर लेखन करें। साथ ही जीएस की भी तैयारी करते रहें। - प्रीति श्रीवास्तव, जिला लेखा परीक्षा अधिकारी
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भतीजे प्रशांत सिंह को जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ने दी बधाई
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फोकस होकर करें पढ़ाई
मैंने दूसरे अटेंप्ट में सफलता प्राप्त की है और वाणिज्य उपकर अधिकारी के पद पर चयनित हुआ हूं। इस बार पेपर पैटर्न में जो बदलाव आया खासकर नेगेटिव मार्किंग शामिल करना और मेंस मे सब्जेक्टिव प्रश्न पूछना, यह काफी फायदेमंद रहा। गाजियाबाद से सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद मैंने तैयारी शुरू की। लक्ष्य मेरा आईएएस अधिकारी बनना है। मैंने पढ़ने के सोर्सेस को सीमित रखा और उतर लेखन का जमकर अभ्यास किया। पिछले कई सालों के मॉक प्रश्न पत्र सॉल्व किए और समय-समय पर रिवीजन किया। तैयारी करने वाले दूसरे अभ्यर्थियों को मेरी सलाह है कि वे फोकस होकर पढ़ाई करें। पिता एसएन सिंह स्वास्थ्य विभाग में हैं और मां सरोज सिंह गृहिणी हैं। - प्रशांत सिंह, वाणिज्य उपकर अधिकारी
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अंकित सिंह
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धैर्य रखें सफलता जरूर मिलेगी
लखनऊ से इंटर की पढ़ाई करने के बाद यूजी और पीजी की पढ़ाई के लिए अवध विवि में दाखिला लिया। यह मेरा दूसरा प्रयास है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी में मैंने सातवीं रैंक हासिल की है। इससे पहले 2017 में मैं मेंस क्लीयर नहीं कर पाया था। इस बार प्रीलिम्स के साथ ही मैंने मेंस की भी तैयारी की। दूसरे अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे धैर्य रखकर तैयारी करें। किसी को जल्दी सफलता मिलती है तो कोई बाद में सफल होता है। पिता राम गोपाल सिंह बीएसएनएल से सेवानिवृत हैं। - अंकित सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी
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आशुतोष तिवारी
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निरंतर जारी रहे प्रयास
बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना था। मोंटफोर्ट से प्रारंभिक पढ़ाई करने के बाद गाजियाबाद से बीटेक किया था। इसके साथ ही सिविल सेवा की तैयारी भी करता रहा। यह मेरा पहला प्रयास था, पहले ही प्रयास में डीएसपी पद पर चयनित होना मेरे लिए गौरव की बात है। मेरे पिता हरिशंकर तिवारी सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के निदेशक शिशिर के वैयक्तिक सहायक हैं। मेरा लक्ष्य आगे भी प्रयास करते रहना है। - आशुतोष तिवारी, डिप्टी एसपी
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संगम कुमार
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सेल्फ स्टडी पर ज्यादा जोर
मैं 2013 से बाराबंकी स्थित परिषदीय विद्यालय में सहायक अध्यापक के तौर पर कार्यरत हूं। यह मेरा चौथा प्रयास है। जिसमें मैंने असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्शियल टैक्स में 34वी रैंक हासिल की है। इससे पहले 2017 में में डिप्टी एसपी पद के लिए भी चयनित हो चुका हूं। मेरा लक्ष्य एसडीएम पद का है। फिलहाल मैं यूपीपीएससी 2019 की परीक्षा की भी तैयारी कर रहा हूं। पिता पीआर प्रजापति यूपी पुलिस से सेवानिवृत हैं। मैंने हमेशा सेल्फ स्टडी पर फोकस किया। ज्यादा से ज्यादा पढ़ना और लिखकर अभ्यास करना मेरी सफलता का मंत्र है। दूसरे अभ्यर्थियों को भी यही सलाह है कि सेल्फ स्टडी करें। अखबार पढ़ें, लिखने पढ़ने की आदत डालें। - संगम कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर कॉमर्शियल टैक्स
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फाल्गुनी सिंह
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जमकर करें प्रश्नों का अभ्यास
मेरा लक्ष्य आईएएस ऑफिसर बनना है। बीबीडी से इंजीनियरिंग करने के बाद मैंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी। 2018 में जब पीसीएस के पेपर पैटर्न में बदलाव हुआ तो मैंने इसकी भी परीक्षा दी। पहले ही प्रयास में एसडीम पद पर चयनित हो गई। पेपर पैटर्न में बदलाव होने के बाद उत्तर लेखन पर पकड़ बनाना बहुत जरूरी हो गया है। दूसरे अभ्यर्थियों को भी मैं यही सलाह देती हूं। लगन के साथ तैयारी करें और जमकर अभ्यास करें। पिता संजय सिंह वन विभाग में एसीएफ पद पर हैं जबकि मां कल्पना सिंह गृहिणी हैं। - फाल्गुनी सिंह, एसडीएम रैंक 26
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डॉ अखिलेश पटेल
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लविवि के पूर्व छात्र का हुआ चयन
जवाहर नवोदय विद्यालय बाराबंकी से पढ़ाई करने के बाद उच्च शिक्षा लखनऊ विश्वविद्यालय से पूर्ण की है। हमेशा से ही प्रशासनिक सेवा में जाना था। इस बीच रामनगर पीजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर चयन हो गया। इसके बावजूद मैंने प्रयास जारी रखा। अपनी सफलता का श्रेय मैं सभी को देता हूं। - डॉ. अखिलेश पटेल
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सुप्रिया गुप्ता
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बीकेटी की सुप्रिया गुप्ता बनीं एसडीएम
पीसीएस में 78वीं रैंक आना सपना पूरा होने जैसा है। भौली गांव के सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभिक शिक्षा के बाद लॉरेंस होमन पब्लिक इंटर कॉलेज से शिक्षा पूर्ण करने के बाद दिल्ली में रहकर तैयारी की है। अपनी सफलता का श्रेय अपने पिता राजेंद्र गुप्ता के साथ ही परिवार को देना चाहती हूं। मेरा मानना है कि सच्चे मन और पूरी लगन से की गई मेहनत बरबाद नहीं जाती है। - सुप्रिया गुप्ता, एसडीएम 78वी रैंक
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प्रज्ञा पांडेय
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पिता के सपनों को किया साकार
पिता स्व. जयप्रकाश पांडेय की एडिशनल एसपी पद पर रहते हुए वर्ष 2016 में बीमारी से मौत हो गई थी। उनका सपना था कि मैं भी प्रशासनिक सेवा जॉइन करूं। मदनमोहन मालवीय विवि गोरखपुर से बीटेक करने के बाद तैयारी शुरू की थी। यह मेरा दूसरा प्रयास था। मां और भाई के साथ ही चाचा हरिश्चंद्र को अपनी सफलता का श्रेय देना चाहती हूं। - प्रज्ञा पांडेय, एसडीएम 45वीं रैंक
कभी हार न मानें, एक दिन जरूर मिलेगी सफलता
जीवन में कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। मैंने अपने जीवन में इसका पालन किया। नतीजा है कि आज मेरा चयन श्रम प्रवर्तन अधिकारी के रूप में हुआ है। मेरे पिता केशव देव शर्मा रिटार्यड अधिशासी अभियन्ता हैं। हुसैनाबाद इंटर कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद शिया कॉलेज से उच्च शिक्षा पूरी की है। - मनोज शर्मा, श्रम प्रवर्तन अधिकारी
श्वेता वर्मा का डिप्टी एसपी पद पर हुआ चयन
चिनहट के गोविंदपुरम की रहने वाली श्वेता वर्मा ने डिप्टी एसपी पद पर सफलता प्राप्त की है। श्वेता ने हाईस्कूल और इंटर सेंट्रल स्कूल से किया है। इसके बाद उन्होंने बीबीडी से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। श्वेता इससे पहले नेट व जेआरएफ में भी सफलता हासिल कर चुकी हैं। श्वेता की सफलता की खबर मिलते ही परिवारीजनों व सगे संबंधियों में खुशी की लहर दौड़ गई। श्वेता ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता व शिक्षकों को दिया। उनके पिता एमपी वर्मा गाजीपुर में सहायक अभियंता के पद पर तैनात हैं।
कैसरबाग बस डिपो के एआरएम बने एक्साइज इंस्पेक्टर
कैसरबाग बस डिपो में तैनात सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) गौरव वर्मा आबकारी विभाग में एक्साइज इंस्पेक्टर बन गए हैं। यूपी पीसीएस के परिणाम में उन्हें सफलता मिली है। साल 2015 में परिवहन निगम में भर्ती हुए थे। एमडी डॉ. राजशेखर ने परिणाम आने के बाद उन्हें बधाई दी। गौरव वर्मा ने अपनी कामयाबी का श्रेय पत्नी श्रुति वर्मा को दिया।