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पीसीएस-जे में इन्होंने लिखी कामयाबी की इबारत, बेहद प्रेरक हैं इनकी सक्सेज स्टोरी, यहां देखें

Mon, 22 Jul 2019 10:32 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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pcs J - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सिविल जज) (जूनियर डिवीजन) परीक्षा-2018 में राजधानी के मेधावियों ने अपना परचम लहराया। लखनऊ के मूल निवासी और यहां रहकर पढ़ाई करने वाले 50 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने परीक्षा में सफलता हासिल की। इनमें से सबसे ज्यादा विद्यार्थी लखनऊ विश्वविद्यालय के विधि संकाय के हैं। अमर उजाला ने इन मेधावियों से बात कर जानी उनकी सफलता की कहानी। पेश है रिपोर्ट :
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- फोटो : amar ujala
एलएलबी के साथ ही की परीक्षा की तैयारी
गंधर्व पटेल- 5वीं रैंक
पीसीएस-जे में अलग से पढ़ने की जरूरत नहीं है। परीक्षा के लिए मैंने एलएलबी ऑनर्स के साथ ही तैयारी जारी रखी। एलएलबी के बाद इसीलिए मुझे पहले प्रयास में सफलता हासिल हुई। परीक्षा की तैयारी के लिए मैंने नियमित पढ़ाई की और नोट्स भी बनाए। रिवीजन का बड़ा योगदान होता है। पिता रामप्रताप वर्मा और मां गायत्री देवी शिक्षक हैं।

समय से न्याय दिलाने का करूंगी प्रयास
ऋचा शुक्ला-24वीं रैंक
मेरी कोशिश होगी कि लोगों को समय से न्याय दिलाऊं। काफी संख्या में केस पेंडिंग पड़े हैं। कोशिश करूंगी कि जो केस फर्स्ट ट्रायल में पूरे हो सकते हैं, उन्हें न्याय मिल जाए। मैंने लखनऊ विवि से 2016 में एलएलबी किया। यह दूसरा अटेंप्ट है। खुद से तैयारी की। पूर्व के वर्षों के पेपर लेकर उनका रिवीजन किया। पैटर्न क्या है, इस पर फोकस किया। नोट्स तैयार कर रिवीजन किया। पिता रामकुमार शुक्ला डूडा में हेड क्लर्क व मां कुसुमा शुक्ला गृहणी हैं।
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समय प्रबंधन से पाई कामयाबी
शिप्रा दूबे- 42वीं रैंक
समय प्रबंधन मेरी सफलता का राज है। जिन विषयों पर मेरी पकड़ कम थी उन पर ज्यादा फोकस किया और अभ्यास किया। मैंने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। सफलता का श्रेय पिता लल्लन दुबे, मां मधुलिका दुबे समेत अपने शिक्षकों को देती हूं। अन्य अभ्यर्थियों के लिए टिप्स है कि वे किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ज्यादा सोचें नहीं, बस लगन के साथ जुट जाएं।

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कोचिंग नहीं खुद पर रखें भरोसा
देवप्रीत सारस्वत- 38वीं रैंक
कोचिंग से ज्यादा खुद पर भरोसा रखना जरूरी है। प्री की तैयारी के साथ मेन्स की तैयारी करना सही रहता है। मैंने लविवि से एलएलबी ऑनर्स किया। शिक्षकों व साथियों ने भी काफी मदद की। मैं झांसी में अपने घर में रहने के दौरान लगातार उनसे संपर्क में रहा। सफलता में मेरे परिवार के साथ ही शिक्षक और साथियों का योगदान अहम है।

पहले मेंस की तैयारी की
मनीषा गुप्ता- 166वीं रैंक
मूल रूप से गोरखपुर निवासी हूं। मैंने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विवि से बीए एलएलबी की पढ़ाई के दौरान ही पीसीएस-जे की तैयारी शुरू कर दी थी। पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। पहले मैंने पूरे फोकस के साथ मेंस की तैयारी की। इससे प्री की तैयारी स्वत: हो गई। मैंने सहज होकर साक्षात्कार दिया। पिता विनोद गुप्ता और मां सुमन गुप्ता को सफलता का श्रेय देती हूं। विवि के शिक्षकों का भी योगदान है। दूसरे अभ्यर्थियों के लिए भी यही टिप्स हैं कि वे मेंस की तैयारी जमकर करें।
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सेल्फ स्टडी पर था भरोसा
अक्षिता मिश्रा-46वीं रैंक
मैंने अपनी सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया और पहले प्रयास में सफलता हासिल की। सभी विषयों पर बराबर फोकस किया। स्टडी मैटीरियल, किताबें, न्यूजपेपर से तैयारी संग अभ्यास किया। पिता डॉ. एनके मिश्रा और मां तुलिका मिश्रा को सफलता का श्रेय देती हूं। शिक्षकों का योगदान रहा। अन्य अभ्यर्थियों के लिए टिप्स हैं कि सभी विषयों पर अपनी मजबूती बनाएं।
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पापा ने कराई तैयारी
प्रशांत मौर्य-175वीं रैंक
सामान्य अध्ययन और लोकल लॉ मेरी कमजोर थी। इसके लिए ज्यादा मेहनत की। पिता एसडी मौर्य ने लोकल लॉ में मेरी तैयारी कराई और पहले ही प्रयास में मैंने सफलता हासिल की। अपनी सफलता के लिए विशेष रूप से पिता और मां पुष्पलता को श्रेय देता हूं। साक्षात्कार के दौरान पूछे गए प्रश्नों से मैं बिल्कुल भी विचलित नहीं हुआ। इसके लिए पहले ही मन बना लिया था। दूसरे अभ्यर्थियों के लिए टिप्स है कि वे लगन के साथ सभी विषयों पर अपनी मजबूती बनाएं।

पहले सिलेबस को समझा
वर्तिका पटेल- 349वीं रैंक
पहले मैंने सिलेबस को समझा फिर समय का प्रबंधन कर उसी के अनुसार तैयारी की। सभी विषयों पर बराबर फोकस किया। जो टॉपिक कमजोर थे, उनका ज्यादा अभ्यास किया। मैंने पहले मेंस पर पकड़ बनाई इससे मेरी प्री की तैयारी ज्यादातर आसान हो गई। पिता कृष्ण कुमार वर्मा और राजकुमारी वर्मा को अपनी सफलता का श्रेय देती हूं। दूसरे अभ्यर्थियों के लिए टिप्स हैं कि वे परीक्षा के सिलेबस को अच्छी तरह से समझ लें और सभी विषयों पर मजबूती बनाएं।
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नोट्स बनाएं और धैर्य रखें
अजय सिंह-48वीं रैंक
सिविल या फिर न्यायिक सेवा में सफलता हासिल करने के लिए धैर्य जरूरी है। कड़ी मेहनत और लगन से तैयारी करें तो सफलता जरूर मिलेगी। पूर्व के वर्षों में आए सवालों के साथ ही मॉडल प्रश्नपत्र का अभ्यास करना परीक्षा में सफलता हासिल करने में लाभदायक रहता है। नोट्स बनाकर तैयारी करें। मेरे पिता अशोक सिंह इंजीनियर तथा मां उषा सिंह हैं। इस समय मैं लविवि से पीएचडी कर रहा हूं।

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बिना कोचिंग हासिल की सफलता
रजत शुक्ला- 70वीं रैंक
एलएलबी में अच्छी पढ़ाई करने से ही पीसीएस-जे की तैयारी हो जाती है। मैंने लविवि से एलएलबी ऑनर्स की पढ़ाई के साथ ही तैयारी शुरू कर दी थी। यह मेरा पहला प्रयास था। मेरे पिता रामकुमार शुक्ला सरकारी सेवा में हैं व मां अर्चना शुक्ला गृहिणी हैं। अपने जूनियर्स से कहना चाहता हूं कि वे एलएलबी की किताबों को अच्छी तरह से पढे़ं तो किसी कोचिंग की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

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आत्मविश्वास बनाए रखें
ऋचा अवस्थी- 122वीं रैंक
तैयारी के दौरान मैंने लॉ और सामान्य अध्ययन पर ज्यादा फोकस किया। रेगुलर सभी विषयों की तैयारी की और समय का भी ध्यान रखा। सफलता का श्रेय पिता कुलदीप अवस्थी व मां शशि अवस्थी को जाता है। दूसरे अभ्यर्थियों से कहना चाहती हूं कि वे अपना आत्मविश्वास बनाए रखें। तैयारी के दौरान घबराएं नहीं।
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सकारात्मक सोच रखें
शुभम द्विवेदी- 123वीं रैंक
परीक्षा में सकारात्मक सोच रखना अहम है। टाइम मैनेजमेंट, जनरल स्टडीज पर कमांड और कड़ी मेहनत जरूरी हैं। मेरे पिता चंद्र प्रकाश द्विवेदी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हैं और मां नीलम द्विवेदी गृहिणी हैं।
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