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... तो इस वजह से भीषण गर्मी में ट्रेन यात्रियों को झेलनी पड़ रही है परेशानी

Sat, 26 May 2018 03:49 PM IST
न्यूज डेस्क/अमरउजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
कमाई के चक्कर में यात्री सुविधाओं को नजरंदाज करने की रेलवे की नीति ने भीषण गर्मी में ट्रेनों से सफर को दुखदायी बना दिया है। रेलवे मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियां दौड़ाने में लगा है। इससे ये ट्रेनें लेटलतीफी का शिकार हो रही हैं।
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- फोटो : डेमो
ऐसे में चारबाग व लखनऊ जंक्शन पर ट्रेनों के इंतजार में यात्रियों के पसीने छूट रहे हैं। वहीं बीच रास्ते ट्रेनें खड़ी कर दिए जाने से भी यात्रियों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। लखनऊ-गोरखपुर के 275 किमी लंबे व्यस्ततम रेलखंड पर रोजाना चलने वाली 42 मालगाड़ियां इस रूट पर 80 मेल-एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रही हैं। 
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डेमो - फोटो : डेमो
मालगाड़ियों को प्राथमिकता पर चलाने के कारण ही पूर्वोत्तर रेलवे ने पिछले दो वर्षों में इनसे 223 करोड़ रुपये और उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने मालभाड़े से 607 करोड़ रुपये कमाए हैं। इससे रेलवे को आमदनी तो हो रही है, लेकिन यात्रियों को असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। 

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- फोटो : डेमो
लखनऊ से गोरखपुर, लखनऊ से वाराणसी और लखनऊ से कानपुर रूट की ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बेपटरी है। मालगाड़ियों की वजह से ही रेलवे मेल-एक्सप्रेस को अधिकतम स्पीड 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से नहीं चला पा रहा है।
 
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- फोटो : डेमो
शाम होते ही रनवे बन जाता है ट्रैक
दिलकुशा केबिन और आलमबाग केबिन के आउटर पर शाम को रेलवे ट्रैक दिल्ली-मुंबई जैसे व्यस्ततम एयरपोर्ट के रनवे जैसा बन जाता है। यहां एक के पीछे एक ट्रेनें लाइन से सिग्नल के इंतजार में खड़ी हो जाती हैं। यह भीड़ शाम छह से रात 12 बजे तक लगती है। दिलकुशा में बिहार सप्तक्रांति(12565), गोरखधाम एक्सप्रेस(12555), वैशाली एक्सप्रेस(12583) के साथ अमूमन ऐसी दिक्कतें आती हैं।
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- फोटो : डेमो
54 कॉशन रोक देते हैं रफ्तार
लखनऊ से गोरखपुर के बीच पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में कुल 54 कॉशन हैं, जहां ट्रेनों की स्पीड 15 से 20 किमी प्रति घंटा रहती है। इसमें लखनऊ से बाराबंकी से बीच महज 30 किलोमीटर के बीच छह कॉशन हैं। गोंडा से बाराबंकी के बीच 22 कॉशन लगे हुए हैं। इन कॉशनों की वजह से भी ट्रेनों की रफ्तार पर लगाम लग जाती है। 
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- फोटो : डेमो
इंटरचेंज पॉइंट पर रोजाना माथापच्ची
लखनऊ-गोरखपुर के बीच बाराबंकी और लखनऊ कानपुर रेलखंड पर कानपुर ब्रिज इंटरचेंज प्वॉइंट हैं। बाराबंकी उत्तर रेलवे का स्टेशन है, इसके आगे पूर्वोत्तर रेलवे शुरू हो जाता है। ऐसे ही कानपुर ब्रिज उत्तर रेलवे और उसके बाद उत्तर मध्य रेलवे शुरू हो जाता है। ऐसे में इंटरचेंज प्वॉइंट पर हर रेलवे जोन अपनी ट्रेनों को प्राथमिकता पर रवाना करने की फिराक में रहता है, जिसमें रोजाना माथापच्ची होती है और ट्रेनें पिटती हैं।

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- फोटो : डेमो
लॉन्ग हाल के आते ही थम जाती हैं ट्रेनें
लॉन्ग हाल पूर्वोत्तर रेलवे की ऐसी मालगाड़ी है, जिसे दो मालगाड़ियों को जोड़कर बनाया गया है। इसमें 60 से अधिक डिब्बे होते हैं। रेलवे अधिकारियों की मानें तो जब यह ट्रेन पटरियों पर दौड़ती है तो अन्य ट्रेनों के पहिए खुद ब खुद थम जाते हैं। बड़ी होने के कारण यह ट्रेन पूरा ब्लॉक सेक्शन कवर कर लेती है, जिससे आगे व पीछे की ट्रेनों को सिग्नल नहीं मिल पाते। कई बार ट्रेन के एक्सीडेंट होने पर ट्रेनों का पूरा संचालन ध्वस्त हो चुका है।

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- फोटो : डेमो
चारबाग से भी गुजर रहीं मालगाड़ियां
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में मालगाड़ियों के लिए बाईपास बना हुआ है। जो मल्हौर से ट्रांसपोर्टनगर होते हुए कानपुर की ओर निकल जाता है। इससे चारबाग में मालगाड़ियों को नहीं ले जाना पड़ता।
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- फोटो : डेमो
फोरलेन से घटेगा आउटर पर लोड
चारबाग रेलवे स्टेशन व लखनऊ जंक्शन पर आने वाली ट्रेनों की लेटलतीफी की एक वजह यह भी है कि ट्रेनें आउटर पर खड़ी रहती हैं। एंट्री-एग्जिट फोरलेन होने पर इस समस्या से निजात मिलेगी। दरअसल, बाराबंकी व उतरेठिया से दो-दो लेन दिलकुशा केबिन पहुंचती हैं, जिसके आगे चारबाग के लिए ये फोरलेन दो लेन में बदल जाता है। ऐसे ही आलमबाग केबिन की ओर कानपुर व मुरादाबाद से दो-दो लेन आती हैं। पर, आगे यह दो लेन ही रह जाती हैं, इससे ट्रेनों की भीड़ बढ़ जाती है और आउटर पर ट्रेनों का जमावड़ा लग जाता है।
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