बुजुर्ग रामेश्वर प्रसाद थाने में
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हाथ में यूरिन बैग पकड़े बेटी के घर पहुंचे तो उसने कहा- बेटे हैं तो उनके पास जाओ
अकसर कहा जाता है कि जिसकी औलादें हों, उसे बुढ़ापे की क्या चिंता, लेकिन 85 साल के रामेश्वर प्रसाद के मामले में ऐसा नहीं है। दो कमाऊ बेटे और चार बेटियां होते हुए वे दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं। बेटों ने उन्हें घर से निकाल दिया तो बेटी ने साफ कह दिया- बेटे हैं तो उनके पास जाओ, हम नहीं रख सकते। हाथ में यूरिन बैग, थैला लिए सड़क पर पड़े रामेश्वर प्रसाद को वहां से गुजर रहीं प्रियंका सिंह की सूचना पर 181 वन स्टॉप सेंटर की टीम ने पिछले सोमवार को सरोजनीनगर स्थित एसएस वृद्धाश्रम में आश्रय दिलवाया।
सेंटर में काउंसिलिंग के दौरान रामेश्वर प्रसाद ने एक पत्र लिखकर दर्द बया किया। बताया कि पुराना टिकैतगंज में घर है। खड़े मसाले का काम था, जो उनकी उम्र बढ़ने के साथ बंद हो गया। चार बेटियां हैं, जिनकी शादी हो गई है। बेटे ड्राइवर हैं, जिन्होंने घर से निकाल दिया। तबीयत बिगड़ने पर बलरामपुर अस्पताल में जाकर भर्ती हो गए, वहां से शनिवार को डिस्चार्ज किया गया तो बेटी के घर गए, लेकिन उसने भी पनाह नहीं दी। भीगी आंखों से बताया कि कमाई बंद हुई तो मैं बोझ बन गया, बड़ा लड़का तो दो बार मार भी चुका है।