राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ऐसे चर्चे हैं कि अमर और मुलायम फिर से दोस्त बनने जा रहे हैं। हालांकि इन 'दोस्तों' ने अभी अपनी तरफ से कुछ नहीं कहा है।
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फिर लिखी जा रही है अमर-मुलायम की प्रेम कहानी
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यूपी की राजनीति में इन दिनों एक कयास यह तैर रहा है कि अमर सिंह फिर से समाजवादी होने जा रहे हैं। जनेश्वर मिश्र पार्क में हुए कार्यक्रम में अमर सिंह के शामिल होने के बाद इन अटकलों को थोड़े पंख लगे थे, फिर मुलायम सिंह बीमार हुए तो अमर सिंह ने उनका हालचाल लिया।
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पिछले दिनों दिल्ली में अमर सिंह मुलायम सिंह यादव के घर गए और कुछ घंटे साथ ही बिताए। वहां बातचीत क्या हुई किसी को नहीं पता लेकिन इस मुलाकात को अमर वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।
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‘हरि अनंत, हरि कथा अनंता’ की तर्ज पर आजकल सियासी हल्कों में नया जुमला चला है। जुमला है 'अमर सुनाए अमर कथा अनंता'। दरअसल, ‘नेताजी’ रह-रहकर अमर प्रेम दिखाते हैं तो कुछ लोग जुमलेबाजी करने ही लगते हैं।
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दिल्ली में नेताजी ने अपने पुराने साथी से घंटों अमर-कथा क्या सुनी, सूबे की हुकूमत चलाने वाले दल में हलचल मच गई। नेताजी के ‘यस मैन’ समझे जाने वाले कई महकमों के ताकतवर वजीर ने तो मीडिया से मुखातिब होकर अमर-प्रेम को पारिवारिक रिश्ते से जोड़ दिया।
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फिर क्या था? साइकिल पर सवार नेता इसके निहितार्थ निकालने लगे। सपा मुख्यालय पर ‘वफादारी’ निभाने वाले एक पुराने नेता से किसी कार्यकर्ता ने पूछ ही लिया, क्या अमर की जय बोलना शुरू कर दें। जवाब तीसरे नेता ने दिया। कहा, समझदार को इशारा काफी होता है।
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‘अमर सुनाएं और नेताजी सुनें तो समझो अमर-कथा अनंता’। साफ है, जल्द घर वापसी होने वाली है। भैया, वो पार्टी में हों या न हों, जो नेता का करीबी है, उसकी जय बोलने में हर्ज क्या है ? एक खांटी नेता ने तपाक से तंज कसा, अमर-समाजवाद की जय!
हालांकि यह बात अलग है कि अमर सिंह यह बात कई दफे कह चुके कि दोबारा समाजवादी पार्टी में जाना उनके लिए मरने जैसा है। लेकिन यह बात तो आप भी जानते हैं कि ऐसी किसी "वचन" का राजनीति में एक ही जवाब होता है। वह है 'राजनीति में संभावनाएं कभी खत्म नहीं होतीं'। अब देखते ही इस कथा का क्या अंत होता है।