राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा हमेशा रहती है कि सीएम अखिलेश यादव के उनके चाचा शिवपाल सिंह के साथ संबंध तल्ख हैं। लेकिन यह तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि अब चाचा और भतीजे के बीच तल्खी नहीं रही।
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चाचा और भतीजे अखिलेश के बीच चला मुस्कुराहटों भरा संवाद
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लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच मंगलवार को दिखी तल्खी बुधवार को गायब थी। एक-दूसरे से न कोई शिकवा न शिकायत। दोनों के चेहरों पर मुस्कुराहट और एक सुर में फूटते बोल। मौका था राजधानी के अलीगंज में प्रदेश स्तरीय पंचायत भवन और प्रशिक्षण केंद्र के उद्घाटन का।
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शिवपाल शाम चार बजे ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए थे लेकिन मुख्यमंत्री करीब पौने पांच बजे आए। मंच पर लगे सोफे पर दोनों अगल-बगल बैठे। स्वागत की औपचारिकताओं के बाद पंचायतीराज मंत्री कैलाश यादव, राज्यमंत्री कमाल अख्तर, अभिषेक मिश्र, प्रमुख सचिव चंचल तिवारी बोले। इस दौरान शिवपाल और अखिलेश गुफ्तगू करते रहे।
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कभी चाचा ने मुस्कुराते हुए हुए भतीजे के कान में कुछ कहा तो कभी भतीजे ने हंसते हुए चाचा को कुछ बताया। इस दौरान दोनों के ही चेहरों पर मुस्कराहट दिखी। जबकि मंगलवार को सिंचाई विभाग के 1020 नलकूपों के लोकार्पण के मौके पर दोनों के बीच शब्दों के तीखे तीर चले थे।
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चाचा शिवपाल के मुंह से तो यहां तक निकल गया था, ‘कुछ लोगों ने मुख्यमंत्री के कान भर दिए। इससे योजना में विलंब हुआ।’ भतीजे अखिलेश भी पीछे नहीं रहे। कुछ-कुछ तंज जैसी भाषा में कहा था, ‘चाचा ने पूरे मूड में भाषण दिया है।’
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बुधवार को चाचा शिवपाल ने जो कुछ कहा, भतीजे अखिलेश ने गुरुवार को एक तरह से उसका समर्थन करते हुए उन्हें और मजबूती देने की कोशिश की। शिवपाल बोले, ‘गांधी और लोहिया की परिकल्पना थी कि गांव स्वच्छ हों, उनमें अच्छा वातावरण हो, पंचायतों के स्तर पर ही कुछ मामले निपटा लिए जाएं। गांव स्वच्छ हो सकते हैं, लेकिन काम झाड़ू लगाने से नहीं होगा।
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इसके लिए मन ठीक करना होगा, दृढ़ इच्छाशक्ति दिखानी होगी।’ साफ है कि शिवपाल का इशारा भ्रष्टाचार रोकने की तरफ था। मुख्यमंत्री ने भी अपने संबोधन में चाचा की बात को ही आगे बढ़ाया। कतर्नियाघाट के पास किसी पंचायत का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां कुछ लोहिया गांव मंजूर हुए थे। इनमें बुराई (भ्रष्टाचार) की शिकायत मिली। जांच कराई तो पता लगा, संपन्न लोगों को भी लोहिया आवास मिल गए।