नाइट कर्फ्यू से होटल और रेस्टोरेंट कारोबारी अजीब विडंबना से घिर गए हैं। एक तरफ वो मौजूदा हालातों में प्रशासन के फैसले को सही ठहरा रहे हैं, वहीं जब आर्थिक मोर्चे के नजरिए से सोचते हैं तो फिर बड़े घाटे की चिंता सताने लगती है।
कारोबारियों का कहना है कि जिस समय से उनका काम शुरू होता है, वो वक्त जिला प्रशासन ने प्रतिष्ठान बंद करने का तय कर दिया है। ऐसे में उनके लिए होटल-रेस्टोरेंट खोलना ही घाटे का सौदा हो गया है। कहते हैं कि नवरात्र और सहालग का दौर शुरू हो रहा है, कारोबार चमकने और पिछले साल हुए नुकसान को कवर करने की उम्मीद अचानक से खत्म हो गई है।
उत्तर प्रदेश होटल एसोसिएशन के श्याम कृष्णानी कहते हैं कि डायनिंग तो शाम आठ-नौ बजे के बाद शुरू होती है, ऐसे में रेस्टोरेंट का काम एकदम खत्म हो गया है। होम डिलीवरी तो पहले ही लगभग खत्म थी, क्योंकि कोरोना के कारण लोग बाहर का मंगाकर खाने से बचने लगे हैं। 13 अप्रैल से नवरात्र, फिर सहालग, अच्छा मौका था कमाने का, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि अप्रैल खाली जाएगा।