मेरा पसंदीदा किरदार वही रहा है, जिससे एक्टर की छवि बिगड़ने का डर हो। एक एक्टर को एक्टिंग करनी चाहिए, उसके पास हर किस्म के किरदार हों। अगर, इमेज की चिंता की तो फिर काहे का एक्टर। यह कहना है इन दिनों सबसे चर्चित फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी का। वह रविवार को अपनी आगामी फिल्म ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ के प्रमोशन के लिये स्टारकॉस्ट के साथ अमर उजाला कार्यालय पहुंचे तो फिल्म के साथ-साथ कई और किस्से भी सुनाए।
ताड़ने आया हूं.., पॉपकार्न और ट..टा..टाई ब्रेकर जैसे डायलॉग के साथ अपनी नई मूवी ‘बाबूमोशाय बंदूकबाज’ के साथ आने को तैयार नवाजुद्दीन सिद्दीकी मानते हैं कि अब लीक से हटकर रिस्क फैक्टर वाली मूवी ही उनकी पसंद बनती जा रही हैं। रिस्क फैक्टर मतलब वो फिल्में जिनसे करने से किसी एक्टर को लगता है कि उसकी छवि बिगड़ जाएगी। स्क्रिप्ट सामने आते ही वो बस इसी फैक्टर को कैप्चर करते हैं। नवाजुद्दीन ने वर्ष 1991-92 में बीएनए, अपने सर पद्मश्री राज बिसारिया और लखनऊ की गंजिंग के किस्से भी साझा किए।
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बिंदास है बेलौस है ‘बंदूकबाज’
नवाजुद्दीन ने बताया कि फिल्म में उनका किरदार सुपारी किलर सा है, बेलौस और बिंदास है। जो सच है वो सामने और जो गलत वो नजरों से इतर। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिये बंदूक चलाना उसका बिजनेस है। ऐसे में गलत सही का कोई सवाल ही नहीं। हां, बस बिना पैसे लिये वो कुछ नहीं करता। शूटिंग लखनऊ और आसपास की दर्जन भर लोकेशन पर 40 दिनों में हुई। इस दौरान अपना शहर और अपनों के बीच ज्यादा मजा आया।
अब लगता है थियेटर से डर
बोले, अब थियेटर से डर लगने लगा है। एक लंबा अरसा हो गया है थियेटर पर उतरे, ऐसे में आडियंस के सामने जाना डॉयलाग डिलीवरी में कुछ-कुछ डर लगने लगा है। थियेटर किए 15 साल से अधिक हो गया। शरीर भी अब थियेटर वाला नहीं रहा। मुझे लगता है कि उतना कंफर्टेबल नहीं हूं। इसीलिए अवार्ड समारोह में मैं अपने आपको असहज पाता हूं।
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- फोटो : amar ujala
नो पालिटिक्स, हां रामलीला आई सोचूंगा
राजनीति में आने की बात नवाजुद्दीन ने कहा, कोई पॉलिटिक्स नहीं जॉइन करनी। दूसरी बात पिछले वर्ष जिस रामलीला में किरदार को लेकर हंगामा हुआ था वह गांव में करना चाहता था, जहां से मेरे इमोशन्स जुड़े हैं, फिल्मों में या कहीं और रामलीला करने का तो कोई प्लान ही नहीं है। अगर आने वाले समय में कोई अच्छा ऑफर आया तो रामलीला के बारे में सोचूंगा जरूर। वहीं, राजनेता के किरदार बोले, ऐसा कोई बंदा मुझे नहीं लगता, जिसका मैं किरदार कर सकूं।
बेटा बना कृष्ण तो मिली सबसे बड़ी खुशी
दो साल का बेटा यानी बीते दिनों स्कूल में कृष्ण बना तो सबसे बड़ी खुशी मिली। आश्चर्य है कि इस बार लोगों ने इसका बखेड़ा नहीं बनाया। आने वाले प्रोजेक्ट के बारे में नवाजुद्दीन ने बताया कि जल्द ही उनकी अगली मूवी सआदत हसन मंटो पर बनकर आएगी।
जल्द ही खतौली का करूंगा दौरा
पैतृक गांव बुढ़ाना मुजफ्फरनगर के नजदीक शनिवार को खतौली में हुई ट्रेन दुर्घटना के बारे में नवाब जी ने बताया। घटना पर पहले ही ट्वीट कर दुख जता चुके नवाजुद्दीन ने बताया कि नेता-अधिकारियों जमघट वहां से खिसक जाये तो किसी दिन घटनास्थल पर जाएंगे।
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बंदूकबाज की फुलवा ने नवाज को लगाया थप्पड़
कई बंगाली फिल्मों में अभिनय के साथ ही कोलकाता में मॉडलिंग कर रही एक्ट्रेस बिदिता ने बताया कि वह फिल्म में पहले एक छोटा सा रोल कर रही थीं। लेकिन किस्मत ने कुछ ऐसी बाजी पलटी कि लीड हीरोइन फुलवा बन र्गइं।
बिदिता ने बताया कि उन्होंने सुन रखा है कि बालीवुड में अक्सर ऐसी ही घटनाओं से सुपरस्टार सामने आते हैं, लकी टचवुड। चित्रांगदा के जाने के बाद आनन-फानन जब स्टारकास्ट की खोज हो रही थी तो कामन फ्रेंड के साथ निर्देशक ने चर्चा की। ईमेल से स्क्रिप्ट पर छोटा सा ऑडिशन और अगले दिन लखनऊ में सुबह की फ्लाइट से आने के बाद शॉट दे रही थी।
फिल्म में यादगार सीन पूछने पर बिदिता ने बताया कि एक सीन में नवाज को चांटा मारना था तो मेरी हालत देख नवाज ने कहा कि तू मुझे असली का थप्पड़ मार देना। फिल्म में उन्हें वो असली का थप्पड़ पड़ा है। शूटिंग के दौरान यहां के गांव वाले कभी अपने ही बर्तन दे देते तो कभी पूरा बरामदा ही। यहां के कबाब खाते हुये शूट करना हमेशा याद रहेगा।
बस मेरा किरदार बोल्ड एंड लाउड है..
फिल्म में दूसरा सशक्त किरदार निभा रही श्रद्धा दास ने बताया कि वह नवाजुद्दीन से जुड़ा एक मजबूत किरदार कर रही हैं। वह बी-ग्रेड भोजपुरी मूवी की स्टार भी हैं। उनका अंदाज ही उनकी पहचान है। रिलीज से पहले खुद के किरदार के बारे में सस्पेंस बनाकर रखने वाली श्रद्धा ने बताया कि ये उनकी पांचवीं हिंदी मूवी है। इसके अलावा कई बंगाली, दक्षिण भारतीय फिल्में कर चुकी हैं।