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तीन तलाक बिल पास होने के बाद मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि बोले- अब सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

Wed, 31 Jul 2019 04:55 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
एक साथ तीन तलाक पर पाबंदी लगाने वाले मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019 को लोकसभा के बाद मंगलवार को राज्यसभा में भी पारित किए जाने पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अब सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेने की बात कही है। वहीं तीन तलाक कानून की हिमायत में आंदोलन कर रहीं मुस्लिम महिलाओं और उलमा का कहना है कि बिल में कई ऐसे बिंदु हैं जिन्हें मांग के बावजूद हटाया नहीं गया। ऐसे में भविष्य ही तय करेगा कि तीन तलाक पर कानून बनने के बाद यह महिलाओं को कितना फायदा पहुंचाने वाला साबित होगा।
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मौलाना सूफियाना निजामी - फोटो : अमर उजाला
भविष्य में तय होगा कानून कितना फायदेमंद
ऑल इंडिया इमाम काउंसिल के महासचिव मौलाना सुफियान निजामी ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का हक है। संसद में जिसका बहुमत होता है उसकी जीत होती है। लिहाजा एक सांविधानिक तरीके से तीन तलाक बिल पास हुआ है। भविष्य में इस बात का अंदाजा हो जाएगा कि यह बिल महिलाओं के लिए फायदेमंद है या नुकसानदेह। राज्यसभा से तीन तलाक बिल पास करवाने में उन पार्टियों के सदस्यों का भी योगदान है जिन्होंने सदन से वॉकआउट किया।
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मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन - फोटो : अमर उजाला
महिलाओं के सवालों को किया नजरअंदाज
मुस्लिम वीमेन लीग की महासचिव नाईश हसन ने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून में महिलाओं को फायदा देने वाले सवालों को शामिल करवाने की हमारी मांग थी। हम चाहते थे कि बिल में सुधार किया जाए, सरकार ने उसे नजरअंदाज किया। अब बिल राज्यसभा से पास हो गया है। ऐसे में तीन तलाक के खिलाफ संघर्ष कर रहीं महिलाओं  के लिए शोध का विषय होगा कि इस कानून से मुस्लिम महिलाओं को फायदा हो रहा है या नुकसान। इसे समझने के लिए हम लोगों को एक साल तक का समय लग सकता है। 

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बेगम शहनाज सिदरत - फोटो : अमर उजाला
डर का माहौल बनने से रुकेगा महिलाओं का शोषण
बज्म-ए-ख्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज सिदरत ने बिल का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार ने बिल में जमानत का प्रावधान शामिल किया है, जो ठीक है। कांग्रेस के शासनकाल में महिलाओं के हित के बारे में नहीं सोचा गया। यह कानून शरियत पर हमला नहीं है बल्कि इससे डर का माहौल बनेगा जिसकी वजह से महिलाओं का शोषण रुकेगा। जो लोग शरियत पर अमल करते हैं, उन्हें इस कानून की कोई जरुरत ही नहीं है। शरियत पर अमल न करने वालों में इस कानून से डर जरूर बनेगा।
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जफरयाब जीलानी - फोटो : अमर उजाला
लीगल कमेटी की बैठक में तय होगी रणनीति
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जीलानी का कहना है कि तीन तलाक बिल भाजपा सरकार के एजेंडे में शामिल था। उसे इस बिल को हर कीमत पर पास करवाना ही था। तीन तलाक पर कानून बनाकर यूनिफॉर्म सिविल कोड की तरफ केन्द्र सरकार पहला कदम बढ़ाना चाहती है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पास इस बिल को रोकने के लिए दो रास्ते थे। एक यह कि वो सुप्रीम कोर्ट जाए और दूसरा राज्यसभा में इसे रुकवाने की कोशिश करे। हम दूसरे विकल्प पर काम कर रहे थे। हालांकि, अब बिल राज्यसभा से पास हो गया है तो हम इसको सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज करेंगे। बोर्ड की लीगल कमेटी की इस संबंध में जल्द ही बैठक बुलाई जाएगी जिसमें आगे की रणनीति तय होगी।
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मौलाना सैफ अब्बास नकवी - फोटो : अमर उजाला
तलाक देने वाले पति की 50 फीसदी सम्पत्ति पत्नी के नाम हो
शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी ने कहा कि तीन तलाक बिल महिलाओं को कोई फायदा होने वाला नहीं है। अभी यह बिल अधूरा है, इसमें संशोधन किए बिना मुस्लिम महिलाओं को कोई फायदा नहीं होने वाला है। जहां तक कानून के डर का सवाल है तो ऐसे तमाम कानून हैं, उसके बावजूद अपराध हो रहे हैं। तलाक देने वाला जेल चला जाएगा तो तीन साल तक महिलाओं को क्या मिल सकेगा। हमारा सुझाव है कि बिल में शामिल किया जाए कि तीन तलाक देने वाले पति की 50 फीसद संपत्ति उसकी पत्नी के नाम हो जाए ताकि संपत्ति जाने के डर से वो तलाक न देने पाए।
 
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शाइस्ता अय्यर - फोटो : अमर उजाला
अब तलाक का कोई नहीं कर पाएगा खिलवाड़
ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर कहती हैं कि तलाक-ए-बिद्दत अल्लाह को पसंद नहीं है। इसे रोकने का काम हमारे उलमा का था, लेकिन उन्होंने अपना काम नहीं किया। इसकी वजह से इस पर कानून बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को आदेश देना पड़ा। हम तीन तलाक को आपराधिक बनाए जाने के पहले से ही खिलाफ हैं। इस पर कानून बनने का स्वागत है। उम्मीद करते हैं कि अब तलाक के मामलों में कमी आएगी। हमारी अपील है कि पति व पत्नी अपने कर्तव्य पहले देखें, इससे उनके अधिकार खुद ही मिल जाएंगे। सरकार को यह देखना होगा कि पति-पत्नी दोनों को इस कानून के जरिए न्याय मिल सके। अन्याय किसी के भी साथ नहीं होना चाहिए।
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फरहाना मालिकी - फोटो : अमर उजाला
तीन तलाक बिल पास होने का स्वागत
बेगमात रॉयल फैमिली ऑफ अवध की अध्यक्ष फरहाना मालिकी ने तीन तलाक बिल राज्यसभा से पास होने का स्वागत किया। इस मौके पर निशात परवीन, फरजाना आब्दी, अनम अख्तर, अफीफा रिजवी और फरहाना मालिकी ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर खुशी मनाई।  
 
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