अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी समेत 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाए जाने का मुस्लिम नेताओं ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे मुसलमानों में इंसाफ की उम्मीद बंधी है।
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दोषियों को सजा मिलनी तय
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के समन्वयक जफरयाब जिलानी ने कहा सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक फैसला है। इससे आम आदमी में न्यायालय के प्रति भरोसा बढ़ेगा। एक बार फिर साबित हो गया है कि न्यायालय किसी भी दबाव से मुक्त होता है। सरकार चाहे किसी की हो। इस फैसले के बाद दो साल में दोषियों को सजा मिलनी तय है।
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ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली का कहना है कि घटना के जिम्मेदार कौन हैं, इसका पता लगाना बहुत जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मुसलमानों को उम्मीद बंधी है। अब ऐसा लग रहा है कि दो साल में दोषियों की जिम्मेदारी तय करके उन्हें सजा मिल जाएगी।
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इस पर एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी का कहना है कि सरकार अगर सचमुच इंसाफ करना चाहती है तो उसे कल्याण सिंह को राज्यपाल पद से हटा देना चाहिए कि वे मुकदमें का सामना करें।
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बाबरी मस्जिद के याचिकाकर्ता व पक्षकार हाजी महबूब का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से बहुत खुश हूं। सुबह से मिठाई बांटी जा रही है।अब बाबरी मस्जिद ढहाने वाले लोगों को सजा जरूर मिलेगी। मामले में आडवाणी, उमा भारती, विनय कटियार, कल्याण सिंह समेत 13 लोग आरोपी हैं, जिनमें कुछ की मौत हो चुकी है। इनके कारण ही देश का नाम विश्व में बदनाम हुआ था और गंगा-जमुनी तहजीब प्रभावित हुई थी।
बाबरी मस्जिद मामले के पक्षकार मो. इकबाल कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्वागत योग्य है। छह दिसंबर 1992 को ढांचा ढहाए जाने के आरोपियों को जल्द से जल्द सजा होनी चाहिए।