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मुलायम को सपा नेता का पत्र- सीएम की सौतेली मां का राजनीतिक चेहरा हैं शिवपाल

Mon, 24 Oct 2016 12:26 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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सपा के विधान परिषद सदस्य उदयवीर सिंह ने बुधवार को पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव को पत्र लिखकर उनसे अखिलेश यादव को सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की गुहार लगाई है। उन्होंने सपा सुप्रीमों से पार्टी के संरक्षक की भूमिका निभाने का भी अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि शिवपाल सिंह यादव मुख्यमंत्री से ईर्ष्या रखते हैं। वह सीएम की सौतेली मां का राजनीतिक चेहरा हैं।
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उनका कहना है कि पारिवारिक दवाब, षडयंत्र और एकतरफा सूचनाओं की वजह से सपा मुखिया का अखिलेश के प्रति सौतेला व्यवहार है। समाजवादी युवजन सभा व छात्र सभा के राष्ट्रीय सचिव रह चुके उदयवीर सिंह स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की मैनपुरी, एटा, मथुरा सीट से एमएलसी हैं। वह सीएम अखिलेश यादव के नजदीकी माने जाते हैं।
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उन्होंने मुलायम को लिखे पत्र में कहा है कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने जो आरोप लगाकर सात युवा नेताओं को निष्कासन किया है, वे पूरी तरह असत्य, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाले हैं। ये कुछ साजिश कर्ताओं की क्षुद्र मानसिकता की उपज हैं । शिवपाल का यह फैसला पूरी तरह अन्यायपूर्ण और पार्टी के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।

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अनुशासनहीनता तो शिवपाल ने की
उदयवीर ने अपने पत्र में लिखा है कि मुख्तार अंसारी के प्रबल पैरोकार शिवपाल यादव ने इटावा, मैनपुरी के सपा नेताओं पर जमीन कब्जाने, अवैध शराब का काम करने के आरोप लगाकर उनके खिलाफ कार्रवाई न होने पर सार्वजनिक रूप से इस्तीफे की धमकी दे डाली। यह घोर अनुशासनहीनता है। इसे संज्ञान में लेने की बजाय आपने इसे प्रोत्साहित किया।
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15 अगस्त को आपने कहा, ‘शिवपाल और मैं अलग हो जाएंगे तो पार्टी की ऐसी की तैसी हो जाएगी।’ इसके बाद एटा के विधायक और जिलाध्यक्ष ने रामगोपाल यादव पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की लेकिन आपने संज्ञान नहीं लिया। शिवपाल के आवास के बाहर सीएम और रामगोपाल यादव के खिलाफ अमर्यादित नारेबाजी की गई, लेकिन आपने कार्रवाई नहीं की और युवा नेताओं पर एकतरफा कार्रवाई कर दी गई।
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अखिलेश से ईर्ष्या व परिवार में षडयंत्र
उदयवीर ने कहा, 2012 में जैसे ही यह बात बाहर आई कि आप अखिलेश यादव को सीएम बनाना चाहते हैं तो उनके खिलाफ घर में ही षडयंत्र शुरू हो गया। अखिलेश की सौतेली मां तो सामने नहीं आई लेकिन उनका राजनीतिक चेहरा बनकर शिवपाल ने इस फैसले को रुकवाने की हरसंभव कोशिश की। पारिवारिक ईर्ष्या से उपजी शिवपाल की महत्वाकांक्षा तभी से अखिलेश का पीछा कर रही हैं।
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शिवपाल ने कई बार उनका सार्वजनिक मजाक उड़ाया। समय के साथ आपकी पत्नी, पुत्र, पुत्रवधू और भाई के साथ रिश्तेदार, मौकापरस्त नेता और ठेकेदार अखिलेश के खिलाफ साजिश रचते रहे। इस गैंग को चतुर चालबाज की जरूरत थी। यह भूमिका अमर सिंह से बेहतर कौन निभा सकता था। इस कमी को आपने पूरा कर दिया।

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आप एकतरफा और गलत सूचनाओं से घिरे
पत्र में उदयवीर ने नेताजी से कहा है, आपके परिवारीजनों से उपकृत स्टाफ और आपके सुरक्षाकर्मी, आम कार्यकर्ताओं और नेताओं को आपसे मिलने नहीं देते। वे ही आपसे मिल पाते हैं, जिन्हें वे मिलवाना चाहते हैं। इसीलिए आप एकतरफा और गलत सूचनाओं से घिर गए हैं। कोई सरकार की तारीफ करने लगे तो आप उसे चापलूस घोषित कर चुप करा देते हैं।

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आपने मुख्यमंत्री को उनके अधीनस्थों के सामने डाटा ही नहीं, उन्हें अपशब्द भी कहे। एक सामान्य व्यक्ति को इस तरह का आचरण अपने नाकारा पुत्र से भी नहीं मिलता। हम इस सौतेले व्यवहार का कारण आप पर पारिवारिक दबाव, षडयंत्र और एकतरफा सूचनाओं को मानते हैं।

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नेताजी! बड़े राजनीतिक षडयंत्र की बू आ रही
उदयवीर ने कहा है, इस प्रकरण में पारिवारिक ईर्ष्या और राजनीतिक महत्वाकांक्षा के बड़े षडयंत्र की बू आ रही है। हमारा शक विवाद के समय को लेकर और पुख्ता हुआ है। जब सर्वे लोकप्रियता में मुख्यमंत्री को नंबर-1 दिखने लगे उसी समय पार्टी की लड़ाई को सड़कों पर ला दिया गया।

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तंत्र-मंत्र, जादू-टोने की बात आम, भरोसा टूटा
सपा एमएलसी ने कई घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि अखिलेश को अपमानित करने और कमजोर दिखाने का कोई हथकंडा छोड़ा नहीं गया। इसके साथ ही तंत्र-मंत्र. पूजा-पाठ और जादू-टोने कराने की आम खबरों से स्पष्ट है कि आप लोगों के रिश्तों में कुछ भी आ जाए, आपसी भरोसा आना या तो संभव नहीं है या फिर इसमें बहुत वक्त लगेगा।

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मुखौटा नहीं बनना चाहते सीएम
उदयवीर ने मुलायम से कहा है मुखौटों पर न तो वोट मिलता है और न ही मुख्यमंत्री मुखौटा बनना चाहते हैं। यदि सीएम के नाम व काम पर चुनाव लड़ना है तो चुनाव से संबंधित सारे फैसले उन पर छोड़ने चाहिएं। यदि आप ऊपर से शांति करा देंगे तो संघर्ष के समय सीएम के विरोधी लोग आपकी बात नहीं मानेंगे और भितरघात करेंगे।
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वारिस को लेकर दुविधा है तो स्पष्ट कीजिए
उदयवीर ने कहा, आपको महसूस करना चाहिए कि अखिलेश यादव आपके राजनीतिक वारिस है, विकल्प नहीं है, आप पार्टी और मुख्यमंत्री, दोनों के संरक्षक हैं। हमारा विनम्र अनुरोध है कि आप पार्टी के संरक्षक ही बन जाएं और राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को सौंप दें। यदि वारिस को लेकर आपके मन में कोई दुविधा है या अन्य कुछ विचार हैं तो स्पष्ट तौर पर प्रदर्शित कर दें ताकि कार्यकर्ता असमंजस में न रहे।
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