मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मजदूर दिवस के दिन पंजीकृत मजदूरों को 10 रुपये में दोपहर का भरपेट भोजन देने की योजना का तोहफा दिया है। सीएम ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजधानी लखनऊ के लिए इस योजना का शुभारंभ किया।
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उन्होंने विधानभवन के सामने बन रहे नए सचिवालय के मजदूरों के साथ जमीन में बैठकर खाना खाया। मुख्यमंत्री ने भोजन करते समय इस मौके पर मजदूरों की समस्याएं भी जानी।
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विधानभवन के सामने टेंट लगाकर मजदूरों को पंगत में बैठाया गया था। यहां पर मुख्यमंत्री के साथ ही श्रम एवं सेवायोजन मंत्री शाहिद मंजूर, राजनैतिक पेंशन मंत्री राजेन्द्र चौधरी सहित कई नेताओं व अफसरों ने भी मजदूरों के साथ जमीन में बैठकर भोजन किया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि विकास परियोजनाएं मजदूरों की मेहनत व पसीने की ही देन हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर यह योजना लखनऊ में शुरू की गई है। कुछ समय बाद इसे दूसरे जिलों में भी शुरू किया जाएगा। योजना के तहत कार्यस्थल पर दोपहर के भोजन के समय मजदूरों को उनकी इच्छा के अनुसार रोटी एवं चावल दो अलग-अलग मीनू में खाना उपलब्ध कराया जाएगा।
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उन्होंने बताया कि खाना सेंट्रलाइज्ड किचन में तैयार होकर मजदूरों को मिलेगा, इसलिए इसकी गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। यदि खाना गड़बड़ हुआ तो सभी जगह गड़बड़ होगा। उन्होंने अफसरों से समय-समय पर खाने की गुणवत्ता जांचने के निर्देश भी दिए।
प्रमुख सचिव श्रम अनीता भटनागर जैन ने बताया कि इस योजना के लिए टेंडर रेलवे की कैटरिंग एजेंसी आईआरसीटीसी को मिला है। इस खाने की लागत 41 रुपये आ रही है। इसमें 31 रुपये उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा दिए जाएंगे। जबकि मजदूरों से केवल 10 रुपये लिए जाएंगे। इसी बोर्ड में पंजीकृत मजदूर ही इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। मजदूरों को भोजन टिफिन में पैक करके दिया जाएगा।