फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लखनऊ को अपनी 'यशोदा' कहते थे अटल जी, यहीं किए विकास के प्रयोग और फिर देश भर में लागू किया

Tue, 25 Dec 2018 03:21 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
1 of 7
कलाकारों ने पूर्व पीएम अटलजी को कैनवास पर उतारा - फोटो : amar ujala
घूमफिर फिर एक बार फिर 25 दिसंबर की तारीख आ गई, पर वह बात नहीं जो हर साल इस दिन खास तौर से लखनऊ में दिखाई देती थी। न ‘तुम जियो हजारों साल...’ का गीत गूंजेगा न दीर्घायु व स्वस्थ होने की कामना करने वाली होर्डिंगें हैं। आयोजन तो आज भी हो रहे हैे हवन-पूजन भी हो रहा है, अटल की तस्वीर भी है, पर लंबी उम्र नहीं बल्कि उनकी आत्मा की शांति के लिए। अस्वस्थता के चलते अटल एक दशक से लखनऊ नहीं आये थे, बावजूद इसके लखनऊ वालों को भरोसा रहता था कि किसी न किसी 25 दिसंबर का सूरज काल के कपाल पर लिखकर मिटा देने वाले और मौत से ठान लेने वाले उनके प्रिय नेता अटल के आने का संदेश लेकर जरूर आएगा। पर, ऐसा न हुआ। लखनऊ को कभी निराश न करने वाले अटल 2007 में ‘लौटके आऊंगा लखनऊ’ के वायदे पर नियति के निर्णय के चलते ‘अटल’ नहीं रह सके। पर, यह अटल है कि लखनऊ में उनका काम और नाम हमेशा ‘अटल’ रहेगा।
विज्ञापन

2 of 7
अटल जी - फोटो : डेमो
लखनऊ अटल की जन्मभूमि नहीं, पर पता नहीं वह क्या बात थी जिसके चलते लखनऊ और अटल जीवन भर एक-दूसरे के पर्याय बने रहे। आगरा के बटेश्वर के अटल को लखनऊ ने ऐसा मोहा कि वे इसे ‘यशोदा’ कहने लगे। इस शहर ने अटल को संघ के जीवनव्रती कार्यकर्ता के रूप में देखा तो एक प्रचारक के रूप में भी देखा। कवि व पत्रकार के रूप में अंग्रेजों की नीतियों का प्रतिरोध करते देखा तो आपातकाल के आंदोलन की अगुवाई कर जेल जाते हुए भी। जनसंघ ने जब अटल के जरिये दिल्ली की संसद की दहलीज लांघने की रणनीति बनाई तो भी उन्होंने लखनऊ को चुना। वैसे तो लखनऊ ने पहली कोशिश में अटल की इच्छा पूरी नहीं होने दी, लेकिन जब सांसद बनाया तो नेता प्रतिपक्ष और फिर प्रधानमंत्री बनाने का भी इतिहास रच दिया। अटल कहते भी थे... वाह रे लखनऊ... नहीं दिया तो नहीं दिया। देना शुरू किया तो झोली भर दिया। अक्सर कहते थे, ‘मैं भी पक्का नखलऊवा हूं। इतनी जल्दी पिंड छोड़ने वाला नहीं।’
विज्ञापन

3 of 7
अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : amar ujala
लखनऊ ही ‘अटल’
अटलजी ने लखनऊ को अपनी ‘यशोदा’ कहा भर नहीं, बल्कि निभाया भी। सांसद रहे, नेता प्रतिपक्ष रहे या प्रधानमंत्री... लखनऊ से उनका नाता कभी खत्म नहीं हुआ। प्रधानमंत्री बने तो लखनऊ उनके कामों की प्रयोगशाला बन गया। हर योजना और हर काम का परीक्षण पहले लखनऊ में किया। सफल होने के बाद उसे देश भर में लागू किया... प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, पांच, दस और 15 रुपये रोज पर गरीबों को मकान, किसान क्रेडिट कार्ड, राष्ट्रीय राजमार्गों का सुदृढ़ीकरण और चौड़ी सड़कें। अटल ने लखनऊ के विकास और लागों के स्वास्थ्य, शिक्षा खासतौर से लड़कियों की शिक्षा के लिए जितना काम किया, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। अटल जब लखनऊ से सांसद चुने गए तब महोना विधानसभा में न तो सड़कें थीं और न अस्पताल। उन्होंने 1991 में लखनऊ में ‘सड़क में गड्ढे या गड्ढे में सड़क’ का चर्चित भाषण दिया। जीतने के बाद उन्होंने सड़कों को गड्ढों से निकालने का अभियान चलाया तो लखनऊ की तस्वीर बदलने लगी।

4 of 7
Atal Bihari Vajpayee
हर सरोकार का ख्याल
वर्ष 1991 में जब वे लखनऊ से सांसद चुने गए तब लड़कियों की शिक्षा के लिए गोमती के इस पार कोई कॉलेज नहीं था। गोमती के उस पार अर्थात 1975 के बाद विकसित हुए लखनऊ में भी ऐसा ही हाल था। उन्होंने न सिर्फ लड़कियों की हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई के लिए स्कूल खुलवाए बल्कि गोमती के दोनों तरफ दो सरकारी डिग्री कॉलेज भी स्थापित कराए। प्रधानमंत्री बने तो तत्कालीन राज्य सरकार से कहकर हर ब्लॉक में लड़कियों के लिए एक हाईस्कूल की योजना शुरू कराई। लखनऊ को जाम से निजात दिलाने के लिए कई जगह फ्लाई ओवर का निर्माण हुआ। लखनऊ में रिंग रोड और शहीद पथ बनवाकर पूर्वांचल से पश्चिम को जाने वाले भारी वाहनों के शहर के बाहर से निकल जाने की राह खुलवाई। 
विज्ञापन

5 of 7
अटल बिहारी वाजपेयी
इसी प्रयोग का विशाल स्वरूप देश के चारों कोनों तक जोड़ने वाली स्वर्णिम चतुर्भुज के रूप में आगे बढ़ा। लखनऊ वालों को पीने के पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नए जलकल की स्थापना कराई। बिजली सुधार के काम कराए। पुराने लखनऊ में सीवर लाइन डालकर वहां के माहौल को आने-जाने लायक बनाया गया। जिन रास्तों में पहले मोटर साइकिल भी ठीक से नहीं जा पाती थीं, वहां कारें दौड़ने लगी। पटरी पर दुकानें लगाने वालों को हटाकर सड़कों को ठीक किया गया। पर, उन्हें रोजी-रोटी के लिए वैकल्पिक जगह भी दी गई। लखनऊ में अटल का यह प्रयोग प्रधानमंत्री बनने पर देश भर में फेरी वालों को शोषण से मुक्ति दिलाने और इंस्पेक्टर व पुलिसिया राज से निजात दिलाने के लिए राष्ट्रीय फेरी नीति के रूप में सामने आया।
विज्ञापन

6 of 7
अटल बिहारी वाजपेयी
कई काम रहेंगे याद
अटल ने देश के विभिन्न हिस्सों में जाने के लिए नई रेलगाड़ियों का संचालन तो अमौसी हवाई अड्डे का विस्तार कर देश और विदेश के लिए कई हवाई सेवाओं की शुरुआत कराई। गोमती की सफाई के लिए नालों को मोड़कर इस नदी को उसका प्राचीन स्वरूप देने का काम शुरू कराया। सर्कुलर रेल की योजना परवान चढ़ी तो अन्य कई काम शुरू हुए। अटल आज भले नहीं है लेकिन लखनऊ पर उनके कामों की अमिट छाप लंबे समय तक रहेगी। राजनाथ की विरासत अब राजनाथ के हाथ में है। अटल ने विकास के कामों को जो दिशा दी थी राजनाथ उसी दिशा में कामों को लेकर जा रहे हैं। अटल ने शहीद पथ बनवाकर और सर्कुलर रेल जैसी योजनाओं से राजधानी के यातायात को दुरुस्त कराने की कोशिश की थी तो राजनाथ आऊटर रिंग रोड से इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं। नये फ्लाई ओवरों का निर्माण अटल के काम को आगे बढ़ा रहा है। राजधानी की सड़कों की सफाई के कई नए प्रयोग अटल ने शुरू कराए। बाद में उनकी सरकार में यह प्रयोग देशभर में आगे बढ़े।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
अटलजी - फोटो : amar ujala
याद रहेंगी वे बातें भी
लखनऊ वालों ने अटल से कहा कि आम आदमी को बेटे-बेटियों की शादी या अन्य समारोह करने के लिए इस शहर में आसानी से सस्ती और अच्छी जगह ही नहीं मिलती। अटल कल्याण मंडप और सामुदायिक केंद्र लेकर सामने आए। इनमें लोगों को बर्तन भी मुहैया कराने की शुरुआत कराई। उन्होंने एक दिन देखा कि अस्पतालों में अपने लोगों का इलाज कराने आने वालों को फुटपाथ पर ठंड की रातें गुजारनी पड़ती हैं तो रैन बसेरे बनवाने लगे। इनमें गरीबों को सस्ता भोजन देने की शुरुआत हुई। बाद में यही प्रयोग देशभर में गरीबों को सस्ते में अनाज देने के लिए अंत्योदय योजना के रूप में सामने आया। आज राजनाथ और प्रदेश की योगी सरकार उनके काम आगे बढ़ा रही है। कल कोई और बढ़ाएगा। नाम बदल जाएंगे और चेहरे भी। पर, अटल लखनऊ में अटल ही रहेंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें