लखनऊ के अमीनाबाद में मंगलवार दोपहर भूकंप आने से कई इमारतें जमींदोज हो गईं। चारों ओर हाहाकार मच गया, लोग मलबे में दबे हुए थे। इसी बीच सेनाओं ने मोर्चा संभाल लिया और लोगों को मलबे से निकालकर इलाज के लिए पहुंचाया। कुछ इस तरह छावनी स्थित सूर्या खेल परिसर में ‘मेडेक्स-2019’ के तहत भारत समेत 18 देशों के सैन्य चिकित्साधिकारियों ने आपदा प्रबंधन के गुर सीखे।
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- फोटो : amar ujala
छावनी स्थित सूर्या खेल परिसर में ‘मेडेक्स-2019’ के तहत मास कैजुएल्टी मैनेजमेंट का प्रदर्शन किया गया। इसमें म्यांमार की ओर से एडवांस ड्रेसिंग कैंप लगाया गया था। इस मौके पर ब्रिगेडियर डीएन करण ने बताया कि दूसरे दिन पोस्ट अर्थक्वैक पॉली ट्रॉमा मैनेजमेंट का प्रदर्शन किया गया।
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मिलिट्री मेडिसिन के अंतर्गत एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर(एसओपी) होता है, जिसे आसियान व आसियान प्लस देश पालन करते हैं। किस देश के पास क्या सुविधाएं हैं, इसका डाटा बैंक बना हुआ है और आपदा के दौरान उनसे वह मदद ली जाती है।
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देखते ही देखते धराशायी हो गईं इमारतें
एम्बुलेंस और स्ट्रेचर से इलाज को भेजा
मंगलवार दोपहर 12.07 बजे अचानक अमीनाबाद में भूकंप के झटके लोगों को महसूस हुए। देखते ही देखते कई इमारतें धराशायी हो गईं। सैकड़ों लोग घायल हो गए। तत्काल सेनाओं ने मोर्चा संभाला और राहत कार्य शुरू कर दिए। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला और एम्बुलेंस, स्ट्रेचर से इलाज के लिए रवाना कर दिया।
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घायलों का तत्काल उपचार शुरू
कैजुएल्टी कलेक्शन पोस्ट(सीसीपी)
राहत कार्यों का पहला चरण कैजुएल्टी कलेक्शन पोस्ट(सीसीपी) था, जिसे अमीनाबाद में ही स्थापित किया गया। एंबुलेंस से लाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। यहां तैनात कैप्टन नम्रता पाटिल ने बताया कि आपदा के बाद पहला रेस्पॉंडर सीसीपी होता है। इसे लेवल वन ट्रीटमेंट कहते हैं, जिसमें सीसीपी व एडीएस यानी एडवांस ड्रेसिंग सिस्टम आता है। सीसीपी में छोटे ऑपरेशन की भी सुविधाएं होती हैं। यहां 35 कैजुएल्टी को संभाला जा सकता है। इसमें ऑक्सीजन सिलेंडर, ईसीजी मशीन, पोर्टेबल वेंटिलेटर वगैरह उपकरण होते हैं। मरीजों का डाटाबैंक बनाया जाता है।
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3. चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान में भी नहीं है ये ताकत
एडवांस ड्रेसिंग सिस्टम(एडीएस), लालकुंआ
सीसीपी के बाद गंभीर मरीजों को एडीएस में ले जाया जाता है। ये सीसीपी से कुछ दूरी पर लालकुंआ में बनाया गया था। सैन्याधिकारियों ने बताया कि एडीएस को 24 घंटे में सेटअप किया जाता है। यह ताकत सिर्फ हिंदुस्तानी सेना के पास ही है। जापान, ऑस्ट्रेलिया व चीन से आए प्रतिनिधि यह देखकर दंग रह गए। एडीएस में एक समय पर 12 मरीजों का ट्रीटमेंट हो सकता है। गंभीर मरीजों को रेड पोर्शन, मध्यम को यलो और मामूली घायलों को ग्रीन हिस्से में ले जाते हैं। यहां ईसीजी, कॉर्डिएक मॉनिटर, ऑक्सीजन व ऑपरेशन थिएटर होता है।
4. जांच से लेकर ऑपरेशन तक की है सुविधा
-फॉरवर्ड सर्जिकल सेंटर(एफएससी), निशातगंज
लालकुंआ से आगे निशातगंज में एफएससी बनाया गया, जिसे एक पूर्ण अस्पताल कहा जा सकता है। तत्काल ऑपरेशन वाले मरीजों को एफएससी लाया गया। एफएससी में लैब होती है, जहां ब्लड व यूरिन की जांचें तत्काल होती हैं। एक्सरे, डेंटल सहित अन्य मशीनें होती हैं। जरूरत पड़ने पर ओटी ऑन व्हील्स(चलता-फिरता अस्पताल) बनाया जाता है। इसके लिए चार गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है और छह घंटे में यह तैयार हो जाता है। ओटी के अलावा जेनरेटर सेट व एक क्रेन भी है। यहां क्रिटिकल केयर एंबुलेंस को तैयार रखा जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर आसपास के अस्पतालों में मरीजों को भेजा जा सके।