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जम्मू में शहीद हुए पायलट की पत्नी बोलीं, पिता की तरह बेटी सेना में जाएगी तो नहीं रोकूंगी

Thu, 28 Feb 2019 11:23 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
‘मैं एक सैनिक की पत्नी हूं। मेरे पति ड्यूटी करते हुए देश के लिए अपनी जान दे देते हैं तो मैं या मेरा परिवार सेना से अलग नहीं हो जाता। मेरी दो साल की बेटी बड़ी होकर सेना में जाना चाहेगी तो मैं उसे नहीं रोकूंगी।’ यह कहना है बुधवार को जम्मू कश्मीर में शहीद हुए स्क्वाड्रन लीडर निनाद अनिल मांडवगणे की पत्नी विजेता का।

वायु सेना में अधिकारी निनाद की दो साल की बेटी है, जो दादा अनिल मांडवगणे, दादी सुषमा और मां विजेता के साथ नासिक में रहती है। मूलरूप से नासिक के रहने वाले निनाद ने वहीं से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद सेना में कमीशन मिलने के बाद एनडीए (पुणे) में उनका प्रशिक्षण पूरा हुआ।
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- फोटो : amar ujala
20 फरवरी को बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए सभी लोग उसके नाना-नानी के गोमतीनगर के विजयंतखंड स्थित घर आए हुए थे। निनाद ड्यूटी की वजह से नहीं आ सके। बेटी के दूसरे जन्मदिन के छठे दिन बुधवार को उनके शहीद होने की सूचना मिली। सेना से मिली सूचना के मुताबिक शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए नासिक ले जाया जा सकता है।
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- फोटो : amar ujala
सोशल मीडिया पर न करें युद्ध
विजेता का कहना है कि घर बैठे सोशल मीडिया पर राजनीति करते हुए युद्ध करना बहुत आसान होता है। युद्ध किसी के लिए भी अच्छा नहीं है। इससे होने वाला नुकसान एक शहीद का परिवार ही जान सकता है। युद्ध के वक्त ऐसा दोनों तरफ से होता है। लेकिन, आतंकियों को कहीं न कहीं रोकना ही होगा। इसके लिए सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे कदम उठाने जरूरी हैं।

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- फोटो : amar ujala
यूपी में रही अलग-अलग जगह तैनाती
अनिल मांडवगणे ने बताया कि दिसंबर 2009 में बेटे को कमीशन मिला। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद निनाद को सहारनपुर, गोरखपुर, गुवाहाटी में तैनाती मिली। जनवरी में उसे श्रीनगर भेजा गया। ड्यूटी के लिए वह हमेशा गंभीर रहता था। सेना में हो रही बातों को कभी परिवार के साथ साझा नहीं किया।

उसे बेटी के जन्मदिन पर लखनऊ आना था, लेकिन वायुसेना को जरूरत की वजह से कार्यक्रम टाल दिया। मंगलवार शाम भी उससे बात हुई। श्रीनगर जाने से पहले 15 दिन वह परिवार के साथ नासिक में था।
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- फोटो : amar ujala
ऐसा साहस सैनिक की पत्नी में ही संभव
पति के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद भी विजेता अपने साथ परिवार को संभालती दिखीं। हौसला दिखाते हुए कहा, सैनिक की पत्नी हूं। इस क्षण के लिए भी तैयार हूं। आंसू के साथ आंखों में पति की शहादत पर गर्व भी था। (शहीद की मां सुषमा व पिता अनिल मांडवगणे।)
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