लखनऊ के यासीनगंज में रविवार को सुन्नी मजलिसे अमल की ओर से आयोजित सामूहिक संवाद कार्यक्रम में मुस्लिम छात्राओं ने एसएसपी समेत कई अन्य अधिकारियों से दिल खोलकर बातें कीं। उन्होंने ये भी बताया कि 15 साल पहले जिस तरह के लड़के उनके आगे-पीछे लगने का प्रयास करते थे आज वैसे लोगों का क्या हाल है...
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मंजिल सैनी
एसएसपी मंजिल सैनी ने एक छात्रा के सवाल पर कहा कि वह जल्द ही बुर्का पहनकर थानों का औचक निरीक्षण करेंगी। इस दौरान छात्राओं ने परिवार और पुलिसिंग से जुड़े 21 सवाल किए।
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- फोटो : amar ujala
पुलिस की नौकरी में क्या आप पर भी राजनीतिक दबाव पड़ा है? नौकरी और परिवार में तालमेल कैसे बैठाती हैं? महिलाओं की नई टीम बनाने का मकसद क्या है? समाज और पुलिसिंग से जुड़े मुस्लिम छात्राओं के ऐसे 21 सवालों से रविवार को एसएसपी मंजिल सैनी और दूसरी महिला पुलिस अधिकारी रूबरू हुईं। अधिकारियों ने भी छात्राओं से दिल खोलकर बातें कीं।
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सामूहिक संवाद कार्यक्रम के दौरान छात्रा तबस्सुम के सवाल पर एसएसपी मंजिल सैनी ने पुलिस पर राजनीतिक दबाव से इंकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि पुलिस कप्तान के तौर पर लखनऊ उनका 10वां जिला है। अगर अधिकारी ईमानदारी से काम करते हुए जनता के दिल में जगह बनाने में कामयाब हो जाए तो समस्याएं कम हो जाती हैं।
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उन्होंने कहा कि पुलिस जनता पर नहीं बल्कि जनता के दिल पर राज करने वाली होनी चाहिए। एक छात्रा के सवाल पर उन्होंने कहा कि अब वह थानों का औचक निरीक्षण बुर्का पहन कर करेंगी। लड़कियों से छेड़छाड़ के सवाल पर उन्होंने पुरुषों को अपनी परिवार की महिलाओं की तरह ही दूसरी औरतों का सम्मान करने की नसीहत दी।
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मजाकिया लहजे में एसएसपी ने कहा कि 15 साल पहले जो लड़के उनके आगे पीछे लगने का प्रयास करते थे, वैसी जेहनियत के लोग आज 15 फीट दूर रहते हैं। ये कमाल वर्दी का है। उन्होंने छात्राओं को ज्यादा से ज्यादा तालीम हासिल करने को कहा। सवाल जवाब से पहले 2014 बैच की आईपीएएस अधिकारी डा. मीनाक्षी ने छात्राओं को बताया कि पुलिस में आने से पहले वह डाक्टर थीं।
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पहले एहसास होता था कि पुलिस में आकर गलती की लेकिन अब ऐसा नहीं है। पीपीएस अधिकारी ममता कुरील ने बताया कि वह पांच बहनें और दो भाई थे। भाइयों के देहांत के बाद माता-पिता का सहारा बनने का प्रण लिया। पुलिस की नौकरी उसी प्रण का नतीजा है।
सीओ आलमबाग अमिता सिंह ने बताया कि शुरुआती शिक्षा मां ने दी और बाद में अंग्रेजी एक मौलवी ने पढ़ाई। पिता पुलिस अधिकारी थे तो उनसे काफी सीखने को मिला। सीओ बीकेटी तनु उपाध्याय ने बताया कि वह पहले शिक्षक थीं। उन्हें आज भी बच्चों का साथ काफी पसंद हैं।