यूपी के बुंदेलखंड के महोबा शहर में एक ऐसा बैंक है जहां नोट नहीं रोटियां जमा की जाती हैं। इस इलाके के बुजुर्गों के मार्गदर्शन में यहां के युवाओं ने एक ऐसी पहल की है जिससे हर कोई प्रेरणा ले सकता है। इस अनूठे प्रयास से अब इस शहर में कोई गरीब भूखा नहीं सोता।
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रुपये नहीं रोटियां जमा कर रहा है यूपी का ये बैंक, जानें वजह
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महोबा के बुंदेली समाज ने यहां रोटी बैंक की शुरुआत करके गरीबों, बेसहारों और लाचारों को भर पेट खाना खिलाने का इंतजाम किया है। इतना ही नहीं उनके ठिकानों और घर तक हर रोज खाना भेजा जाता है। आगे जानें कैसे होता है ये काम...
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महोबा के लोगों ने बीते 15 अप्रैल को हजरत अली के जन्मदिवस से रोटी बैंक की शुरूआत की। पहले दिन सात बस स्टैंड व फुटपाथ पर सोने वाले गरीबों, लाचारों को खाना खिलाया गया। इसके बाद बुंदेली समाज के अध्यक्ष हाजी पावेज अहमद ने बैठक कर दस युवाओं को रोटी बैंक से जोड़ा। सबसे अच्छी बात ये है कि इस काम को हर समुदाय के लोग मिलजुल कर बड़े जोश के साथ कर रहे हैं।
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युवाओं ने पहले दिन कुछ शहर के कुछ मोहल्लों में घर-घर जाकर दो रोटी और सब्जी लोगों से इकट्ठी की, जिससे बैंक में 50 लोगों के लिए खाना जमा हो गया। इसके बाद रात आठ बजे यतीम और लाचार लोगों की तलाश करके उनको खाना खिलाया गया।
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इस समय में रोटी बैंक में 40 युवा काम कर रहे हैं। हर रोज 250 से 300 गरीबों की भूख मिटाई जा रही है। इस काम में लगे युवा रोजाना घर-घर से दो रोटी और सब्जी इकट्ठी करते हैं। इसके बाद शहर में ही एक खाली पड़े कमरे में खोली गई रोटी बैंक में जमा करते हैं।
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इसके बाद पॉलीथिन में रोटी और सब्जी के अलग अलग पैकेट बनाकर युवाओं की टीम रात आठ बजे यतीम बेसहारों के घरों और ठिकानों में जाकर लंच पैकेट पहुंचाकर उन्हें खाना खिलाते हैं।
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नए साल यानी जनवरी से पॉलीथिन का प्रयोग बंद किया जाएगा। इसके बजाय खाना टिफिन में पैक कर दिया जाएगा। फाइवर के टिफिन में गरीबों को भोजन मयस्सर कराया जाएगा।
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कुछ लोगों ने संस्था को एक हजार से ज्यादा टिफिन भेंट किए हैं। टिफिन में ले जाकर उनकी थाली में सब्जी और रोटी दी जाएगी और टिफिन वापस ले लिया जाएगा, जिससे अगले दिन फिर टिफिन में खाना भेजा जा सके, इससे खाने में गुणवत्ता बनी रहेगी। (कंटेंट, फोटो: ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा)