(गोसाईगंज) मॉडल जेल के बन्दियो की महापंचायत के चुनाव के लिए रविववार की दोपहर 3 बजे वोटिंग शुरू हुई। पांच पंचो व एक सरपंच के लिए कारागार के गंगा भवन के 415 बन्दियो ने मतदान किया। मतदान के दौरान जेल अधीक्षक आलोक सिह जेलर ए के मिश्रा सहित जेल कर्मी मौजूद रहे।
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PICS: अब यूपी में सरपंच चलाएंगे जेल
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आदर्श कारागार मे निरूध्द दोष सिद्घ बन्दियो की पंचायत चुनाव का प्रचार प्रसार रविवार सुबह 10 बजे थम गया। जेल प्रशासन ने चुनाव से सम्बन्धित सभी औपचारिकताएं शनिवार की शाम को पूरा कर लिया था। बन्दियो के इस महासमर मे 23 मई को पंच के लिये 14 बन्दियो ने व सरपंच पद के लिए 5 बन्दियो ने नामांकन किया था। पिछले सात दिनो से आदर्श कारागार मे चुनावी महौल है।
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इस चुनावी घमासान मे प्रत्याशी बन्दी व उनके समर्थक बन्दियो ने अपनी अपनी जीत सुनिशित करने के लिये अपने पक्ष मे मतदान की अपील की। चुनाव का उत्साह बन्दियो के चेहरो पर साफ झलक रहा था। भीषण गर्मी मे बन्दी मतदान के प्रति जागरूक दिखे और कडी धूप मे कतार मे खडे होकर अपने उम्मीदवार बन्दी के पक्ष मे मतदान किया।
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रविवार को 3 बजे शुरू हुई वोटिग शाम 7 बजे समाप्त हुई। जिसमे 415 बन्दियो ने मतदान किया। वोटिग समाप्त होने के मतपेटियो को सील कर कारागार के कार्यालय मे सुरक्षित रखा गया है। मतपेटिया बन्दी रक्षको के निगरानी मे रहेगी। मॉडल जेल के अधीक्षक आलोक सिह ने बताया सोमवार को दोपहर 11 बजे जेल के हाल मे मतगणना शुरू होगी।
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पंचायत का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। बन्दियो के मुताबिक सरपंच पद का चुनाव कांटे का है। सरपंच पद के उम्मीदवार गगन सिह व गिरिश वर्मा मे टक्कर है। - चुनाव समाप्त होने के बाद बन्दियो की निगाहे सोमवार को आने वाले चुनाव परिणाम पर अटकी है। रविवार की शाम बैरको मे जाने के बाद चुनाव परिणाम को लेकर उत्साहित रहे।
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मॉडल जेल आने के बाद ही मिलता है आदर्श बंदी का दर्जा प्रदेश की सेन्ट्रल जेलो से मॉडल जेल लखनऊ आने के बाद ही बन्दियो मे से पंचायत ही आदर्श बन्दी का दर्जा देती है। पंचायत की बैठक मे सरपंच व पांच पंचो की रिपोर्ट के बाद मॉडल जेल का अधीक्षक बन्दी को आदर्श बन्दी घोषित करता है। जिसके बाद बन्दी रात्रि आजादी प्राप्त कर लेता है और पंचायत की रिपोर्ट पर उसे जेल के बाहर जाकर व्यवसाय करने व मजदूरी करने की अनुमति जेल प्रशासन देता है।
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मॉडल जेल मे आने के बाद बन्दी पंचायत की ही निगरानी मे रहता है। बन्दी के चाल चलन व उसके आचरण पर पंचायत नजर रहती है उनके आचरण के आधार पर ही पंचायत अपनी रिपोर्ट लगाकर प्रस्ताव जेल अधीक्षक को भेजती है।
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मॉडल जेल के गंगा भवन के ही बन्दियो को पंचायत के चुनाव मे मताधिकार... - सूबे की जेलो से सेन्ट्रल जेल पहुचे ऐसे बन्दी जो सिगल मुकदमे मे न्यायालय द्वारा दोषी करार दिये जाते है उनके अच्छे आचरण पर उन्हे आदर्श बन्दी बन समाज से जुडने के लिये माडल जेल लखनऊ स्थानान्तरित किया जाता है। घिनौने अपराधों व एक से अधिक मामलो मे निरूध्द बन्दियो को मॉडल जेल नही भेजा जा सकता। मॉडल जेल मे प्रवेश करने पर बन्दियो को स्वागत भवन मे रखा जाता है। पंचायत स्वागत भवन मे आये बन्दी पर निगरानी रखती है।
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बन्दी के आचरण सही होने पर सरपंच व पंचो की रिपोर्ट पर छः माह बाद उसे यमुना भवन और छः माह बाद गंगा भवन मे स्थानान्तरित कर दिया जाता है। गंगा भवन मे आने के बाद बन्दियो को पंचायत के चुनाव मे वोटिंग का अधिकार प्राप्त हो जाता है। 18 माह गंगा भवन मे रहने के बाद 10 आजाद बन्दियो के प्रस्ताव पर पंचायत उसे रात्रि आजादी की रिपोर्ट अधीक्षक को भेजती है जिस पर अधीक्षक बन्दी को रात्रि आजादी प्रदान करता है।
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इस तरह होती है दोष सिध्द बन्दियो की पंचायत... बन्दियो मे सुधार व पुनर्स्थान के उद्देश्य से 1949 मे केन्द्रीय कारागार लखनऊ को परिवर्तित कर आदर्श कारागार लखनऊ के रूप मे विकसित करने का निर्णय लिया गया था। 29 सितम्बर 2009 को मोहनलालगंज-गोसाईगंज मार्ग पर स्थित नवनिर्मित कारागार भवन मे आदर्श कारागार स्थापित की गयी। आदर्श कारागार एक न्यूनतम सुरक्षा की कारागार है।
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इसका उद्देश्य आजीवन कारावास व लम्बी सजावधि के दण्डित स्टार क्लास के बन्दियो को समाज की मुख्य धारा से जोडने व उन्हे आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न व्यवसायो व कृषि कार्यो मे लगाकर उन्हे समाज मे पुनर्स्थापित करना है।
इसी मे बन्दियो की पंचायत व्यवस्था की गयी। बन्दियो मे अनुसाशन व कारागार के प्रबन्धक मे उनकी सक्रिय भागेदारी सुनिशिचत कराने के लिए कारागार मे बन्दियो की पंचायत की व्यवस्था की गयी। जिसमे उनके सरपंच और पंचो का चुनाव लोकतन्त्रात्मक प्रक्रिया के अन्तर्गत कराया जाता है।