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Building Collapse: मलबा हटा, बढ़ाए मदद के हाथ... मौत को दी मात; बीच में कंटेनर फंसने की वजह से भी बची जान

Sun, 08 Sep 2024 11:33 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में हुए हादसे के बाद मलबे का कई फीट ऊंचा ढेर लग गया। सबसे पहले पुलिस, फिर दमकल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहुंचीं। मलबा हटाकर जैसे-जैसे जवान आगे बढ़कर लोगों को खोज रहे थे, वैसे-वैसे जिंदगियां बच रही थीं। भीतर फंसे लोगों को मदद को जवान का हाथ नजर आता तो उम्मीद बंध जाती थी। 

 
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
यही वजह है कि अधिक से अधिक लोगों को रेस्क्यू टीमों ने जिंदा निकाला। हादसे की सूचना पर 15 थानों की फोर्स, सभी डीसीपी, पुलिस कमिश्नर, डीएम समेत अन्य आलाधिकारी पहुंचे। सीएम के निर्देश होते ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी पहुंची। शुरुआती दो घंटे में 30 लोगों को निकाला।

 
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
ड्रिलिंग की, सरिया काटकर निकाला
रेस्क्यू टीमें मलबे की ड्रिलिंग करती रहीं। सरिये को गैस कटर से काटा। टेक्निकल टीम की मदद से रेस्क्यू किया। बीच-बीच में मलबा दरक भी रहा है, इसलिए जवानों को संभलना भी पड़ रहा है।

 

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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
बीच में कंटेनर फंसने की वजह से भी बची जान
इमारत में नीचे हॉल में कंटेनर खड़ा था। इसका अगला हिस्सा बाहर था। आधे से अधिक हिस्सा मलबे में दबा था। वहां मौजूद लोग कंटेनर के उस हिस्से में आ गए, जिससे वह झुका था। इससे मलबा सीधे लोगों पर नहीं गिरा और उनकी जान बच सकी।
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
जलभराव, कीचड़ बना मुसीबत
घटनास्थल के सामने काफी जलभराव था। आसपास करीब बीस मीटर तक कीचड़ था। नगर निगम ने अंधेरा होने से आधे घंटे के भीतर ही लाइट का इंतजाम कराया, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन ने तेजी पकड़ी।

 
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी में घंटे भर तक अफरातफरी
लोकबंधु अस्पताल की इमरजेंसी में हादसे में घायलों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ तो अफरातफरी मच गई। हर तरफ चीख पुकार मची थी। इमरजेंसी में बेड कम पड़ गए तो दूसरे वार्ड में भी मरीज भर्ती किए गए।
 
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
अस्पताल में घायलों का इलाज करने के लिए 40 लोगों का स्टाफ इमरजेंसी में था। पौने छह बजे एंबुलेंस पहला मरीज लेकर पहुंची। एक घंटे के अंदर सभी घायल इमरजेंसी पहुंच गए। अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजनों के पहुंचने से इतना शोर होने लगा कि माइक से एनाउस करना पड़ रहा था। हादसे के घायलों के पहुंचने से सामान्य मरीजों को एक घंटे तक इमरजेंसी में इलाज नहीं मिला।
 

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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
ट्रॉमा सेंटर : घरों से लौट आए डॉक्टर
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर प्रशासन को जैसे ही घटना की सूचना मिली, आधे घंटे में डॉक्टरों की टीम पहुंच गई। यहां तीन घायल लाए गए, जिनमें से 27 वर्षीय रामकिशोर की जान नहीं बचाई जा सकी। 32 वर्षीय प्रवीण और 65 वर्षीय शांति देवी भर्ती हैं।

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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
केजीएमयू मीडिया सेल के फैकल्टी इंचार्ज प्रो. केके सिंह ने बताया कि शनिवार होने से पांच बजे तक डॉक्टर घर जा चुके थे। सिर्फ इमरजेंसी ड्यूटी वाले डॉक्टर ही संस्थान में थे। साढ़े पांच बजे के करीब जैसे ही घटना की जानकारी मिली तो आधे घंटे में डॉक्टरों की टीम लौट आई। सात बजे के करीब घायल ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।

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दस मिनट में खाली करा ली गई इमरजेंसी
हादसे की सूचना पर प्रशासन ने सभी सरकारी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया था। दस मिनट में इमरजेंसी को खाली करा लिया गया था। विशेषज्ञों की टीम भी बुला ली गई थी। शाम करीब साढ़े पांच बजे सभी अस्पताल प्रभारियों को हादसे की सूचना मिली। इसके बाद सिविल, लोकबंधु और बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी को खाली करा लिया गया। हालांकि, सभी घायल लोकबंधु अस्पताल भेजने का फैसला हुआ। अस्पताल प्रशासन ने रेजीडेंट डॉक्टरों को भी बुला लिया था।

 

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चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि 24 घायलों को अस्पताल लाया गया। इनमें से पांच गंभीर केजीएमयू रेफर किए गए। अभी राजेंद्र (25), भानु सिंह (22), शत्रुघ्न सिंह (60), आदर्श यादव (10), काजल यादव (14), आकाश कुमार (28), आकाश सिंह (24), विनोद यादव (45), आदित्य (21), आकाश कुमार (19), बहादुर (55), ओमप्रकाश (25), हेमंत पांडेय (37), सुनील (28), दीपक कुमार (28), विनीत कश्यप (28), लक्ष्मी शंकर (25), अतुल राजपूत (25), नीरज (35 भर्ती हैं।

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लखनऊ में बारिश के दौरान तीन मंजिला इमारत ढही, आठ की मौत, 24 घायल
आपको बता दें कि लखनऊ के ट्रांसपोर्टनगर में शनिवार शाम बारिश के दौरान शहीद पथ किनारे स्थित एक तीन मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे में एक कारोबारी समेत आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि मलबे में दबे 24 लोगों को निकालकर राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

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इनमें तीन लोगों की हालत गंभीर है, जिनका ट्रामा सेंटर में इलाज चल रहा है। मलबे में अभी कई और लोगों के दबे होने की आशंका है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल और पुलिस की टीमें राहत-बचाव कार्य में देर रात तक जुटी रहीं।
 

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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
आशियाना निवासी राकेश सिंघल का हरमिलाप (ग्राउंड प्लस 2) टावर था। टावर के ग्राउंड फ्लोर पर आशियाना निवासी जसमीत साहनी का मोबिल ऑयल और दूसरी मंजिल पर दवा का गोदाम था। पहली मंजिल पर मनचंदा का गिफ्ट सेंटर का गोदाम था। शनिवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे तेज बारिश शुरू हुई। आधे घंटे बाद अचानक पूरी बिल्डिंग ढह गई। इससे आसपास भगदड़ मच गई। 


 

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सबसे पहले पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद दमकल, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहुंचीं और राहत-बचाव शुरू किया। एक-एक कर 32 लोगों को निकाला गया। इसमें से कारोबारी जसमीत सिंह साहनी (45), पंकज तिवारी (40), धीरेंद्र गुप्ता उर्फ धीरज (48), अरुण सोनकर (28), राजकिशोर (27) और राकेश कुमार (32), जगरूप (24) और इंजीनियर रूद्र यादव (25) की मौत हो गई। घायलों का इलाज जारी है।

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अधिकारी मौके पर रहकर कराएं राहत कार्य : योगी
हादसे का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर तेजी से राहत कार्य कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही घटना में घायल लोगों के उपचार की समुचित व्यवस्था कराने को कहा है। सीएम ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ्य होने की कामना की है ।
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
सीएम ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी मौके पर रहकर राहत कार्य कराने को कहा है। गोरखपुर से सीएम ने डीएम से बातचीत करके घटना के बारे में जानकारी ली है। सीएम के निर्देश पर अपर मुख्य सचिव गृह दीपक कुमार व एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश ने भी मौके पर पहुंचकर राहत कार्य का जायजा लिया।
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