विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष अहमद हसन ने कहा कि प्रदेश सरकार पावर कॉर्पोरेशन में हुए डीएचएफएल पीएफ मामले में जिम्मेदार बड़े लोगों को बचा रही है। सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से काम नहीं चलने वाला है। पुलिस फर्जी एनकाउंटर में निर्दोषों को मार रही है। ऐसे में संविधान कैसे बचेगा?
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- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि स्थिति यह है कि प्रदेश में गरीबों की कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। हसन ने कहा कि अनगिनत बलिदानों के बाद हमें संविधान मिला है। आज यह समीक्षा करने का दिन है कि हमने क्या खोया और क्या पाया। फर्जी एनकाउंटर में सैकड़ों लोग मारे गए, क्या यही स्वतंत्रता है। यूपी की कानून-व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट भी सवाल उठा चुका है।
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पीएफ घोटाले में सरकार बड़ों पर कार्रवाई करने से भाग रही है। महाराष्ट्र के हालात से साफ है कि केंद्र सरकार प्रजातंत्र की तरफ नहीं, बल्कि तानाशाही की तरफ कदम बढ़ा रही है। अखिलेश सरकार ने 55 लाख महिलाओं को पेंशन दी थी, जिसे बंद कर दिया गया।
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हालात इमरजेंसी के बन गए हैं। प्राइवेट ट्रेन चलाकर सरकारी रोजगार और आरक्षण खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सीएम, पीएम को इशारा कर दें कि वे गलत कर रहे हैं, तो पीएम खुद को ठीक कर लेंगे। इस पर सदन में ठहाके गूंज उठे।
दिल में बहुत दर्द है...
अधिष्ठाता ने उन्हें ज्यादा देर बोलने पर टोका तो हसन ने कहा कि दिल में दर्द बहुत है। इसलिए थोड़ा ज्यादा समय ले रहा हूं। सरकार ने एक यूनिट बिजली पैदा नहीं की है। अस्पतालों में दवाएं नहीं हैं। हमने तो कैंसर का इलाज भी मुफ्त करने की योजना बनाई थी, पर सत्ता चले जाने से अमल नहीं कर पाए। अधिष्ठाता ने उन्हें समय को लेकर फिर टोकते हुए कहा कि सीएम को उनकी बातों का जवाब भी देना है। तो हसन ने कहा कि सीएम जवाब क्या देंगे, सिर्फ काम ही कर दें, वही बहुत है।