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महिलाओं ने शेयर की करवाचौथ से जुड़ी यादें, बोलीं- पति से ज्यादा तो सासू मां ने रखा था मेरा ध्यान

Sat, 27 Oct 2018 04:13 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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पति रजनीकांत के साथ प्रो.अमिता - फोटो : amar ujala
प्रो. अमिता बाजपेयी ने अपने पहले करवा चौथ की यादों को साझा करते हुए कहा कि आमतौर पर पति तो सभी का खयाल रखते ही हैं, लेकिन मेरा पहला करवा चौथ मेरी सासू मां के कारण बेहद स्पेशल और हमेशा के लिए यादगार बना था। 1995 में जब हमारी शादी हुई तो मैं जॉब में थी। शादी के बाद पहला करवाचौथ पड़ा तो उस दिन भी मुझे कॉलेज जाना था। व्रत तो रखना ही था, लेकिन इस बात की मुझसे ज्यादा चिंता मेरे पति रजनीकांत और सासू मां को थी। खासकर मेरी सास सुबह सरगी खाने से लेकर मेरे कॉलेज से वापस आने के बाद व्रत खोले जाने तक मुझे कोई काम न करने देना, मेरी तैयारी में हर चीज का खयाल रखा था।

 
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- फोटो : डेमो
सबको तैयार होते देख मिला उत्साह
प्रो. अमिता बताती हैं कि पहले करवाचौथ का व्रत बेहद मुश्किलों भरा था। दिनभर दौड़भाग के बाद शाम तक थक गई थी, लेकिन हमारी जॉइंट फैमिली थी। शाम होने पर जब मैंने सबको तैयार होते देखा तो एक अलग ही उत्साह से भर गई। मुझे यह पल हमेशा याद रहता है। व्रत खोलने के बाद उन्होंने मुझे गिफ्ट के तौर पर कान के टॉप्स दिए थे 
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पति डॉ. सौरभ के संग आकांक्षा - फोटो : amar ujala
साथ देने के लिए पति ने भी रखा था व्रत 
अपने पहले करवाचौथ की यादें साझा करते हुए आकांक्षा जुगियाल बताती हैं कि हमारी शादी 2006 में दशहरे के दिन हुई थी। जब मेरा करवा चौथ का पहला व्रत पड़ा उस दिन हम हनीमून से मनाली से वापस देहरादून जा रहे थे। सफर में ही मेरा पहला व्रत पड़ा था। संयोग से वो दिन मंगलवार था और मेरे पति रतीश का भी व्रत था। घूमते-फिरते पूरा दिन कैसे गुजर गया, कुछ पता ही नहीं चला। जब शाम तक घर पहुंची तो पूजा की तैयारियां चल रही थीं। सासू मां ने मेरे लिए भी सारी तैयारियां कर रखी थीं। घर के सभी लोग हमारा बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। पहले करवा चौथ का एक-एक पल हमेशा याद रहेगा।

 

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डेमो
हम दोनों ने मिलकर की थीं तैयारियां
डॉ. शीतल बताती हैं पहले करवाचौथ के समय मेरे साथ पति डॉ. सौरभ कश्यप भी जॉब में थे। वहां फैमिली भी साथ नहीं रहती थी। पहले करवा चौथ पर भी हम दोनों को छुट्टी नहीं मिल सकी थी। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ड्यूटी की। जब घर गए तो न तो पूजा की कोई तैयारी थी, न ही खाना बनाने की हिम्मत थी। यहां तक हमारे खुद के तैयार होने के लिए भी वक्त बहुत कम था। ऐसे में घर जाने के बाद तुरंत हम दोनों ने साथ मिलकर काम शुरू किया। पूजा की तैयारी से लेकर खाना बनाने तक में सौरभ ने मेरा साथ दिया। व्रत खोलने के बाद रात में हम घूमने गए। मेरा पहला करवाचौथ हमेशा यादगार रहेगा।
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पति राजीव के साथ डॉ तूलिका चंद्रा - फोटो : amar ujala
बहुत घबराहट थी, कभी नहीं रखा था कोई व्रत
डॉ. तूलिका चंद्रा अपने पहले करवाचौथ की याद करते हुए बताया कि मैंने बचपन से कभी कोई व्रत नहीं रखा था। शादी के बाद जब पहला करवाचौथ पड़ा तो दिनभर भूखे प्यासे रहने के खयाल से ही घबराहट हो रही थी। मैं उस समय प्रेग्नेंट भी थी। साथ ही पढ़ाई भी चल रही थी। ऐसे में मेरे साथ घर में भी सब लोग चिंतित थे। लेकिन शादी के बाद पहले व्रत का उत्साह ही अलग होता है। मैंने हिम्मत की और व्रत रख लिया। परिवार का हर सदस्य मुझे हौसला दे रहा था। पहले व्रत की वो केयर हमेशा याद रहेगी।

 
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- फोटो : डेमो
सोच-सोच कर लग रही थी भूख
मेरे घर में सब लोग मेरा कुछ ज्यादा ही खयाल रख रहे थे। मेरे घर में सासू मां से लेकर पति राजीव हर थोड़ी देर बाद मुझसे मेरा हालचाल पूछ रहे थे। मेरा इतना खयाल रखा गया कि मुझे सोच-सोच कर ही भूख लगने लगी, लेकिन जब दृढ़ इच्छा मजबूत हो तो कोई भी काम मुश्किल नहीं होता। मैंने अपना व्रत पूरा किया।
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पति रतीश के साथ आकांक्षा - फोटो : amar ujala
सफर में ही रखा था हम दोनों ने व्रत
अपने पहले करवाचौथ की यादें साझा करते हुए आकांक्षा जुगियाल बताती हैं कि हमारी शादी 2006 में दशहरे के दिन हुई थी। जब मेरा करवा चौथ का पहला व्रत पड़ा उस दिन हम हनीमून से मनाली से वापस देहरादून जा रहे थे। सफर में ही मेरा पहला व्रत पड़ा था। संयोग से वो दिन मंगलवार था और मेरे पति रतीश का भी व्रत था। घूमते-फिरते पूरा दिन कैसे गुजर गया, कुछ पता ही नहीं चला। जब शाम तक घर पहुंची तो पूजा की तैयारियां चल रही थीं। सासू मां ने मेरे लिए भी सारी तैयारियां कर रखी थीं। घर के सभी लोग हमारा बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। पहले करवा चौथ का एक-एक पल हमेशा याद रहेगा।
 

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डेमो
साथ मिलकर की थी तैयारी
आकांक्षा बताती हैं कि जब हम वापस घर पहुंचे तो शाम हो चुकी थी। मेरे पहुंचते ही सासू मां ने मेरे साथ ही तैयारी शुरू की। आज भी हर साल हम मेंहदी लगाने से लेकर सारी तैयारियां एक साथ ही करते हैं। 

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पति राजीव संग भावना मिश्रा - फोटो : amar ujala
शादी की तरह की थीं तैयारियां
भावना मिश्रा बताती हैं कि मेरा पहला करवाचौथ शादी के फंक्शन से कम नहीं था। वही सेलेब्रेशन, वहीं तैयारियां वैसा ही शृंगार। मेरा तो सुबह से शाम तक पूरा दिन सिर्फ तैयारियों में बीता था। दुल्हन की तरह मेंहदी लगाई थी। ब्राइडल मेकअप, और तो और फोटोशूट भी बिल्कुल शादी जैसा ही था। मैं उस दिन भी उतना ही उत्साहित थी जितना शादी के दिन थी। उन्होंने बताया कि 2003 में शादी हुई थी, इतने वर्षों में शादी के बाद पहला करवाचौथ ही सबसे यादगार दिन था। 
 

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डेमो
गिफ्ट का था इंतजार
मैं जितना उस दिन को लेकर उत्साहित थी, उतना ही इंतजार मुझे मेरे गिफ्ट का भी था। सोच रही थी कि पता नहीं राजीव मुझे क्या गिफ्ट करेंगे। शाम हुई व्रत खोला, उसके बाद उन्होंने मुझे बहुत खूबसूरत सी गोल्ड रिंग गिफ्ट की। मैं इतनी खुश थी कि दिनभर की थकान भूल गई।

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पति राजीव के साथ डॉ. शैली अवस्थी - फोटो : amar ujala
काम करते बीता दिन, पता ही नहीं चला
डॉ. शैली अवस्थी बताती हैं कि हमारी शादी 1982 में हुई थी। उस समय मैं और मेरे पति राजीव दोनों ही बतौर रेजिडेंट काम करते थे। पहले करवाचौथ पर हमने पहले से ही खूब प्लानिंग की थी। ट्रेडिशनल ड्रेस में तैयार होना, चूड़ियां, मेंहदी लगाना सब कुछ। लेकिन उस दिन हुआ कुछ ऐसा कि जैसा सोचा नहीं था। हमने व्रत रखा और हॉस्पिटल चले गए। उस दिन का काम आम दिनों से कहीं ज्यादा हो गया। काम करते-करते शाम हो गई। रात होते-होते घर पहुंचे और फटाफट जैसे-तैसे तैयारियां कीं। 

 
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डेमो
याद आता है पति का सहयोग 
शादी के बाद से ही हम दोनों जॉब करते थे और हॉस्टल में रहते थे। इतना समय भी नहीं मिला था कि उसके रीति-रिवाज सीख सकें। सुबह व्रत तो रख लिया लेकिन पूजा कैसे होगी क्या करना होता है मुझे जरा भी जानकारी नहीं थी। हम घर आए और जितना मुझे और राजीव को पता था उसी तरह पूजा कर व्रत खोला। उसके बाद के तो सारे व्रत हमने परिवार के साथ रीति-रिवाज से किए। लेकिन सादगी से होने के बाद भी पहला व्रत और उस दिन पति का सहयोग हमेशा याद आता है। 
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