कोई साथ नहीं था, इंटरनेट से जाना पूजा का तरीका
मुझे पहले करवा चौथ व्रत को लेकर बहुत उत्साह था। करवा चौथ के दिन जब महिलाओं को एकसाथ पूजा करते और व्रत खोलते देखती थी तो बहुत अच्छा लगता था, लेकिन मुझे कभी समूह में करवा चौथ की पूजा करने का मौका नहीं मिला। पति डॉ. हरि ओम आईएएस अधिकारी हैं, जिसके चलते ट्रांसफर होते रहते थे। इसलिए यह त्योहार अधिकतर ऐसी जगहों पर हुआ, जहां कोई जान पहचान नहीं थी। 1998 में हमारी शादी हुई थी और मेरा पहला व्रत प्रतापगढ़ में हुआ था। गायिका मालविका हरिओम बताती है कि उस समय व्रत के सिवाय कुछ भी पता नहीं था। न तो पूजा का तरीका, कथा जानती थी और न ही अन्य रीति रिवाजों की कोई जानकारी थी। पहली बार मैंने इंटरनेट पर देख कर पूजा करना सीखा। मेरे जेहन में आज भी मेरे पहले करवा चौथ की वो सुनहरी यादें ताजा है।
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डेमो
रात 12 बजे से ही शुरू कर दिया था व्रत
पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने का अलग ही उत्साह था। मुझे लगा पता नहीं मैं सुबह उठकर सरगी कर भी पाऊंगी या नहीं इसलिए मैंने रात 12 बजे से ही पानी पीकर अपना व्रत शुरू कर दिया था। अब शादी के 20 साल हो चुकें हैं, लेकिन उसके बाद से हमेशा रात 12 बजे से ही व्रत रखती हूं। कई बार तो ऐसा भी हुआ कि हम व्रत में ऐसी जगह रहे जहां भयंकर ठंड और धुंध में चांद नजर ही नहीं आया, घंटों इंतजार के बाद नेट से पता कर व्रत खोला।
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पति अनुराग के साथ श्वेता
- फोटो : amar ujala
पति ने खुद किया था मुझे तैयार, उनके हाथों से पहनी पायल हमेशा रहेगी याद
हमारी बहुत मिन्नतों के बाद घरवाले शादी के लिए तैयार हुए थे। ना उम्मीदी के बाद जब हमारी शादी हो गई तो यह जीवन की सबसे बड़ी खुशी थी। मुझे बहुत अच्छे से याद है पहले करवा चौथ में पति अनुराग ने मेरी सारी तैयारियां खुद अपने हाथों से करवाई थीं। चाहे वो मेंहदी लगवाने में मेरे साथ सुबह से दोपहर एक बजे तब बैठना हो या मुझे व्रत के लिए सारे रीति रिवाजों के बारे में समझाना हो। श्वेता सिंह ने अपने पहले करवा चौथ की खूबसूरत यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि मेरे लिए उस दिन का सबसे यादगार पल वो था जब मेरे तैयार होने के बाद अनुराग ने गिफ्ट के तौर पर लाईं वो खूबसूरत पायल खुद मुझे अपने हाथों से पहनाई थीं।
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- फोटो : डेमो
चांद दिखाने गाड़ी में बैठाकर बाहर ले गए थे
श्वेता बताती हैं कि उनकी शादी के 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पहले करवा चौथ की यादें ऐसे ताजा है मानो अभी कल की ही बात हो। सबसे ज्यादा यादगार वो चांद है जो बड़े इंतजार के बाद निकला था, लेकिन हमारे घर से नजर ही नहीं आ रहा था। हमने सारी तैयारियां कर ली थीं। मैं, वो और घर के अन्य लोग बेसब्री से चांद निकलने का इंतजार कर रहे थे। बाहर से पता चला चांद निकल आया है, लेकिन हमारे घर से तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं दिखाई दिया। इसके बाद अनुराग ने गाड़ी निकाली, मुझे बिठाकर थोड़ी दूर पर एक जगह थी वहां ले गए जहां से चांद साफ नजर आ रहा था। मैंने उसी जगह पूजा की, चांद देखा और व्रत खोला।
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राखी किशोर पति अनिल किशोर के साथ
- फोटो : amar ujala
फोन की रिंग पर लगे थे कान, पति की आवाज सुन खोला था व्रत
मेरी शादी में लगभग एक सप्ताह बाकी था। पहला व्रत था, लेकिन तब उनका घर आना जाना नहीं था। पति अनिल लखनऊ में थे और में अपने ननिहाल आगरा में थी। नानीजी ने सुबह-सुबह सरगी के लिए उठाया। मैंने सरगी खाई उसके बाद व्रत शुरू हुआ। 1993 में हमारी शादी हुई थी। उस समय सोशल मीडिया का चलन नहीं था। दिन में एक या दो बार लैंडलाइन के जरिए बड़ी मुश्किल से बात हो पाती थी। पहला करवा चौथ का व्रत खोलने के लिए मेरे साथ न तो पति थे न उनकी कोई फोटो। बस इंतजार था उनकी कॉल का। घर में एक लैंडलाइन फोन था, मेरे साथ घर के बाकी लोग भी फोन के पास बैठे थे और कान फोन की रिंग पर थी। चांद दिखते ही उनका फोन आया और उनकी आवाज सुनने के बाद मैंने विधि विधान से व्रत खोला। राखी किशोर ने अपने पहले करवा चौथ की अद्भुत यादें साझा करते हुए बताया कि यह मेरा 25वां करवा चौथ होगा, लेकिन पहला व्रत जीवन भर याद रहेगा।
सरप्राइज गिफ्ट में मिली थी साड़ी और परफ्यूम
मुझे परफ्यूम का बहुत शौक था। जब पहला करवा चौथ पड़ा तो मुझे अंदाजा भी नहीं था कि मुझे मेरे फेवरेट गिफ्ट मिलने वाले हैं। जब मैंने शाम को व्रत के लिए तैयारियां शुरू कीं तो मुझे घर से लाल रंग की बेहद खूबसूरत सिल्क साड़ी दी गई। साथ ही परफ्यूम का लाजवाब कलेक्शन भी था। उन्हें देखकर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बाद में मुझे बताया गया कि यह सरप्राइज गिफ्ट मेरे पति अनिल ने भिजवाए थे। अब बातचीत और मुलाकात के हजारों साधन हो गए हैं, लेकिन वो पहले वाला एक कॉल का इंतजार वो मुलाकात की खुशी हमेशा याद रहेगी।