सूत्रों का दावा है कि विधायक ने भाई अतुल के खिलाफ मुकदमा न दर्ज करने के लिए एसपी पर दबाव बनाया, यह काम भी आया। पुलिस ने पीड़िता के पिता को ही जेल भेज दिया। इतना ही नहीं, पीड़िता के पिता की पिटाई के आरोप में जब एफआईआर दर्ज कराने उसके परिवारीजन गए तो उन्हें थाने से ही भगा दिया गया। बाद में जिलाधिकारी व लखनऊ के अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद अगले दिन पीड़िता की एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसमें विधायक के भाई का नाम शामिल नहीं किया गया। यह तथ्य एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में भी शामिल किया है। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई जल्द ही ब्लॉक प्रमुख से पूछताछ कर सकती है।