लखनऊ के इटौंजा के कुम्हरावां कस्बे में ऐतिहासिक कारेश्वर महादेव मंदिर बाबा केभक्तों की मनौती पूरी करने के लिए क्षेत्रभर में प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि यहां आने वाला भक्त निराश नहीं जाता। यहां पर सदियों पुरानी शिवजी की प्रतिमा स्थापित है, रोजाना यहां शिवभक्त शिवजी की पूजा-अर्चना करते हैं।
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कारेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : amarujala
शिव मंदिर के पास ही गौशाला है। भक्तों की मनौती है कि यहां सावन में नियमित आराधना करने वाले के हर दुख और कष्ट भगवान शिव हर लेते हैं। शिवरात्रि केअलावा सावन के हर सोमवार, नागपंचमी पर बाबा के इस मंदिर पर मेले जैसा माहौल रहता है।
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कारेश्वर महादेव मंदिर
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यूं प्रकट हुए महादेव
भक्तों की मान्यता है कि यह स्वत: ही प्रकट हुई है। महिगंवा रियासत के राजा ने दशकों पहले इस शिव मंदिर का निर्माण कराया था। उनका कोई विशेष काम नहीं बन पा रहा था। वे उसे पूरा करने के लिये सारे प्रयास कर चुके थे।
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कारेश्वर महादेव मंदिर
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रियासत के कुछ बुजुर्गो-पुरखों से इसको लेकर चर्चा की। उन्होंने सलाह दी कि अगर बाबा किसी तरह प्रसन्न हो जाएं तो काम पूरा होगा। उसी के बाद राजा ने मनौती मानी और उनका लंबे समय से अटका काम पूरा हो गया। इसके बाद ही उन्होंने बाबा के मंदिर का निर्माण कराया।
कहते हैं भक्त
बीकेटी परसऊ निवासी शिवभक्त आदर्श शुक्ला कहते हैं कि बाबा ने इतना दिया है कि अब उनसे कुछ मांगने का मन नहीं करता। उन्होंने जिंदगी भर बिना मंागे हमें सब कुछ दिया, मेरी मनोकामना है कि जैसे हमे दिया वो हर भक्त को उसका मनचाहा वर दें।