लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक रहे सुजीत पांडेय ने संगीन वारदातों की पड़ताल और बेगुनाहों को जेल जाने से बचाकर मिसाल कायम की।
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- फोटो : डेमो
सीबीआई और एसटीएफ में लंबे समय तक तैनात रहे सुजीत पांडेय ने लखनऊ परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक का कार्य संभालते ही निष्पक्ष विवेचना को लेकर मातहतों की सख्त हिदायत दी। इसके साथ संगीन वारदात पर खुद मौके पर जाकर तफ्तीश का पर्यवेक्षण शुरू किया। नामजद आरोपियों या बेगुनाहों को जेल भेजकर फर्जी खुलासे पर उनकी सख्ती से थानेदारों से लेकर कप्तान तक सहम गए।
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आलम यह हुआ कि संगीन वारदात पर नागरिकों की ओर से पुलिस महानिरीक्षक से जांच की मांग की जाने लेगी। सनसनीखेज विवेक तिवारी हत्याकांड में मुख्यमंत्री के आदेश पर सुजीत पांडेय के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। तमाम आलोचनाओं को अनदेखा कर उन्होंने पड़ताल की। विवेक को गोली मारने वाले सिपाही को हत्या और उसके साथ रहे दूसरे सिपाही को सिर्फ डंडा मारने का दोषी बताया तो भी विवेचना पर अंगुली नहीं उठी।
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प्रत्यूषमणि त्रिपाठी हत्याकांड पर भाजपा कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने नामजद आरोपियों की हत्या के आरोप में गिरफ्तारी से इन्कार किया। प्रत्यूष के पांच साथियों की गिरफ्तारी के साथ सच उजागर हुआ और चार बेगुनाह जेल जाने से बचे। गुडंबा इलाके में कातिलाना हमले के मुकदमे में फर्जी नामजदगी पर तफ्तीश का खुद पर्यवेक्षण शुरू किया और बेगुनाहों को जेल जाने से बचाया।
विवेक तिवारी और प्रत्यूषमणि त्रिपाठी हत्याकांड से आक्रोशित नागरिकों के जोरदार प्रदर्शन से कानून व्यवस्था बिगड़ते देख सुजीत पांडेय उच्चाधिकारियों और मातहतों को पीछे कर खुद सामने आए। निष्पक्ष छवि के चलते उनके आश्वासन पर प्रदर्शन खत्म हुए। गहन छानबीन कर सज उजागर करने के साथ लोगों के सवालों का जवाब दिया।