लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इस कॉलम में हम आपको ऐसे ही ‘अलग बात’ वाले वर्दी वालों से परिचित कराते हैं। इनमें विजय प्रकाश सिंह की अलग पहचान है। उन्होंने विवेचना में वैज्ञानिक संसाधनों का इस्तेमाल और घोड़ी पर गश्त करके अपराधियों के हौसले पस्त किए थे।
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राजधानी की सड़कों पर दौड़ती लग्जरी गाड़ियों के बीच घोड़ी पर गश्त करने वाले कोतवाल विजय प्रकाश सिंह को लोग आज भी याद करते हैं। उन्होंने हिस्ट्रीशीटरों के साथ बैठक की तो आला अफसर नाराज हो गए। मगर, विजय प्रकाश ने इलाके की सुरक्षा में हिस्ट्रीशीटरों के दायित्व तय करके अपराधियों पर नकेल कसी। 16 साल से लापता हिस्ट्रीशीटर को हनुमान सेतु मंदिर से ढूंढ निकाला।
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संगीन वारदात की पड़ताल में तजुर्बे के साथ वैज्ञानिक संसाधनों का इस्तेमाल करके पुख्ता सुबूत जुटाने में विजय प्रकाश का अपना अलग तरीका था। एक महिला की चेन लुटेरे से भिड़ंत हुई। लुटेरे को पकड़ने में नाकाम महिला प्राथमिकी दर्ज कराने पहुंची।विजय प्रकाश ने उसकी हथेली पर चिपके लुटेरे के कुछ बाल कब्जे में लिए। संभावित स्थानों पर दबिशें देकर लुटेरे को पकड़ा और मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के साथ थाने में सुरक्षित रखे बालों को सुबूत के तौर प्रस्तुत किया। व्यापारियों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ इलाके में उच्चशक्ति के सीसीटीवी कैमरे लगवाए, जो अमीनाबाद की विधि छात्रा गौरी हत्याकांड के खुलासे में कारगर साबित हुए।
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यूपी पुलिस फाइल फोटो
कबाड़ ठिकाने लगाकर चमकाए थाने
विजय प्रकाश ने बरसों से थाने में खड़े सड़ रहे वाहनों की नीलामी की बात कहकर अफसरों को चौंकाया। दरअसल, लावारिस वाहनों की ही नीलामी की परंपरा थी। मुकदमों से संबंधित वाहनों को सुरक्षित रखना जरूरी माना जाता था। विजय ने नीलामी से संबंधित आदेशों का हवाला देते हुए मुकदमों से संबंधित वाहनों की भी नीलामी कराकर धन सरकारी कोष में जमा कराया। इस पर पुलिस महानिदेशक ने उन्हें पुरस्कृत करने के साथ सभी थानेदारों को वाहनों की नीलामी कराकर थाने चमकाने के आदेश दिए।
स्मैकियों को नशे से मुक्ति
चारबाग में बड़ी संख्या में स्मैकियों को देखकर विजय प्रकाश ने स्मैक का धंधा करने वालों की धरपकड़ में टीम लगाई। इसके साथ स्मैकियों को थाने ले जाकर नहलाकर उनके दाढ़ी, बाल बनवाने के साथ कपड़े बदलवाए। कुछ का नशा मुक्ति केंद्र से इलाज कराया, जबकि कुछ को उनके परिवारीजनों को सौंपा।