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लखनऊ के लोगों के दिलों में आज भी बसे हैं ये इंस्पेक्टर, काबा से फोन करके एक बुजुर्ग ने दी थी दुआएं

Thu, 12 Sep 2019 04:56 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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डिप्टी एसपी आईपी सिंह - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें आईपी सिंह की अलग पहचान थी। उन्होंने पुराने लखनऊ में बतौर इंस्पेक्टर तैनात रहते हुए हिंदू-मुस्लिम के बीच शांति, सद्भाव और समरसता बनाए रखने के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया।

 
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डिप्टी एसपी आईपी सिंह - फोटो : अमर उजाला
लखनऊ में तैनात रहे हजारों इंस्पेक्टर में आईपी सिंह का नाम सबसे अलग था। उन्होंने काम के वक्त कभी किसी का धर्म-संप्रदाय या जात-पात नहीं देखी। वह पहले ऐसे इंस्पेक्टर रहे जिन्हें सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील चौक कोतवाली की कमान तीन बार सौंपी गई थी। पुराने लखनऊ के लोगों ने उन्हें आज भी दिल में बसा रखा है। उन्होंने अपने कार्यकाल में हिंदू-मुस्लिम समुदाय को जोड़कर रखा।
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डिप्टी एसपी आईपी सिंह - फोटो : अमर उजाला
दोनों समुदाय के लोग, धार्मिक गुरू, कारोबारी और गणमान्य नागरिक उनके सौम्य व्यवहार और संतुलित कार्यशैली के मुरीद थे। शांत स्वभाव के इंस्पेक्टर आईपी सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान कभी सांप्रदायिक संघर्ष नहीं होने दिया। होली-दीपावली हो या ईद-बकरीद, वह सभी कार्यक्रमों में लोगों को न सिर्फ कोतवाली बुलाकर मिठाई खिलाते थे, बल्कि उनके घर जाकर खुशियों में शरीक होते थे।

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डिप्टी एसपी आईपी सिंह - फोटो : अमर उजाला
आईपी सिंह को सबसे पहले 31 मई 2015 को चौक कोतवाली की कमान सौंपी गई थी। वह वहां 22 अक्तूबर 2016 तक रहे। मात्र एक दिन बाद ही उन्हें दोबारा इंस्पेक्टर बनाया गया और दो मई 2017 को उन्हें वहां से हटा दिया गया। वक्त रमजान का था इसलिए नौ दिन में ही जुलूस और तरावीह की नमाज शांतिपूर्वक निपटाने के लिए उन्हें फिर वापस बुलाकर कोतवाली का चार्ज दिया गया।
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डिप्टी एसपी आईपी सिंह - फोटो : अमर उजाला
काबा से फोन करके बुजुर्ग ने दी थी दुआएं
सबकी मदद करने वाले आईपी सिंह को बुजुर्ग कुतुबुद्दीन ने काबा से फोन कर दुआएं दीं तो वह भाव विह्वल हो गए। घटना जून-जुलाई की तपती दोपहर की है। आईपी सिंह चौक कोतवाली में बैठे थे तभी एक बुजुर्ग को सिपाही से बात करने के बाद बाहर जाते देखा। उन्होंने पहरा ड्यूटी से कहकर बुजुर्ग को बुलवाया और उनकी समस्या पूछी।
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डिप्टी एसपी आईपी सिंह - फोटो : अमर उजाला
बुजुर्ग ने अपना नाम कुतुबुद्दीन बताते हुए हज पर जाने के लिए पासपोर्ट अटका होने की जानकारी दी। इस पर आईपी सिंह ने तुरंत संबंधी दरोगा को बुलवाकर उनका पासपोर्ट का सत्यापन पूरा कराया। तीन महीने बाद काबा से उनके मोबाइल पर कुतुबुद्दीन ने कॉल करके शुक्रिया अदा करते हुए दुआएं दीं तो उनकी आंखें खुशी से भीग गईं।
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