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कन्हैया कुमार का सवाल, अयोध्या में ही भाजपा को क्यों नजर आते हैं राम

Mon, 19 Sep 2016 08:44 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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(फैजाबाद)। वैष्णव परंपरा के राम और आरएसएस के राम में बड़ा फासला है। वैष्णव के राम शबरी के जूठे बेर खाते हैं, जबकि आरएसएस के राम के हाथों में धनुष की प्रत्यंचा चढ़ी है। हम वैष्णव के राम को पूजने वाले हैं जबकि संघ के राम नाथूराम गोडसे के राम है जो हिंसा में विश्वास रखते हैं।
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जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने सवाल उछाला कि जब कण-कण में राम बसते हैं तो आप को विवादित परिसर में ही राम क्यों दिखते है? वह सोमवार को फार्ब्स इंटर कॉलेज में आयोजित ‘शिक्षा बचाओ, संविधान बचाओ, रोजगार बचाओ और लोकतंत्र बचाओ’ विषय को लेकर जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
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कन्हैया कुमार ने सवालों के तीर छोड़ते हुए कहा कि वजीफा, शिक्षा और रोजगार की बात करना क्या देशद्रोह है? दलित, पिछड़ा, मजदूर और महिला के हक-हकूक की बात करना क्या देशद्रोह है? पीएम की नीतियों पर सवाल करना क्या देशद्रोह है? जवाब दिया, देशद्रोह उनको लग सकता है, जिनका देश से कोई लेना-देना नहीं है। देश की संप्रभुता को बराक ओबामा के चरणों में रख दिया गया। हम उस डोनाल्ड ट्रंप का भजन क्यों सुन रहे हैं जिसने बाहरियों को अमेरिका में नहीं घुसने देने का ऐलान कर रखा है?

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उन्होंने चेताते हुए कहा कि अल्लाह और ईश्वर के बीच किसी कमीशन एजेंट की जरूरत नहीं है। यह बिस्मिल और अशफाक की धरती है जहां हिंदू-मुस्लिम दोनों ने मिलकर आजादी की लड़ाई लड़ी लेकिन आज उन्हीं दोनों को लड़ाने की कोशिशें खूब की जा रही हैं। कहा कि मोहम्मद एखलाक कैसे मरा?
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यह सवाल उतना नहीं उठा जितना कि उसके यहां गाय का मांस था या कि भैंस का। रोहित ने आत्महत्या क्यों की? यह सवाल दब गया। मुद्दा यह बना कि वह दलित है या पिछड़ा।
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कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हैं कि परिधानमंत्री है। कपड़ा बदलने में जितने कुशल हैं, बात बदलने में भी उतने ही कुशल है। इसके पूर्व भाकपा के राज्य सचिव गिरीश ने कहा कि जो पीएम अपनी सेनाओं की रक्षा नहीं कर सकता, उसे इस्तीफा दे देना चाहिए।
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भाकपा राज्य कौंसिल के सदस्य अतुल सिंह ने कन्हैया कुमार का स्वागत किया। सभा का संचालन अशोक तिवारी ने किया। जनसभा का आयोजन भाकपा, ऑल इंडिया यू फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन, अखिल भारतीय नौजवान सभा, जनवादी नौजवान सभा ने किया था।

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‘अंडा फेंकने वाले मामा मारीच के अवतार’
नियांवा के पास फूल-माला लिए स्वागत करने को कुछ युवा खड़े थे। कन्हैया कुमार की गाड़ी युवाओं को देखकर रुक गई। माला लेकर जैसे ही युवा आगे बढ़े, पीछे से अंडा फेंक दिया गया जो शीशा पर लगा। इसके बाद टमाटर और ईंट के छोटे-छोटे टुकड़े भी फेंके गए। लाल झंडा लिए मोटरसाइकिल सवार युवाओं ने जब इन्हें खदेड़ा तो भाग गए।
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कन्हैया कुमार ने कहा कि मुझे आदत है इनसे निपटने की, घबराइए नहीं। चोर की तरह फूल लेकर आए और अंडा मारकर भाग गए। मिल-बैठ बहस कर लेते। जो हारता वह आमलेट बनाकर खिला देता। मेरे ऊपर कीचड़ उठाकर फेंक देते तो नाली साफ हो जाती।
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