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यादों के झरोखे से: जब प्रधानमंत्री नेहरू को अयोध्या आने से डीएम ने रोक दिया, पढ़ें ये किस्सा

Mon, 11 Nov 2019 06:37 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
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केरल के रहने वाले केके नैयर आईसीएस अधिकारी थे। वह गोंडा के जिलाधिकारी थे। वहीं से उनका फैजाबाद आना-जाना शुरू हुआ। उन्हें बलरामपुर के राजा ने बताया कि अयोध्या में किस तरह मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई। कहा जाता है कि इस जानकारी के बाद वह जब भी ढांचे को देखते तो अपने लोगों से मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने पर पीड़ा जताते। जून 1949 को उनका फैजाबाद स्थानांतरण हुआ।
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- फोटो : अमर उजाला
संबंधित स्थल पर जब मूर्तियां रखी गई तो यही फैजाबाद के जिलाधिकारी थे। मूर्तियां रखे जाने की खबर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री गोविंद वल्लभ पंत से मूर्तियां हटवाने को कहा, लेकिन नैयर ने पंत सरकार को लिखित रूप से भेज दिया कि इससे वहां दंगा भड़क जाएगा। नेहरू ने अयोध्या आने के लिए पंत को टेलीग्राम किया। पर, केके नैयर ने सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री को आने की अनुमति नहीं दी।
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- फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद नेहरू ने फिर पंत को अयोध्या आने के लिए लिखा। पर, सरकार ही चुप्पी साध गई। जिस पर नेहरू ने फिर नाराजगी में पंत को मूर्तियां हटवाने को लिखा। पंत ने नैयर से कहा, ‘मूर्तियां नहीं हट सकती। उससे पहले मुझे हटाना पड़ेगा।’ इसके बाद नैयर ने खुद त्यागपत्र दे दिया। त्यागपत्र देने के बाद वह बहराइच से और उनकी पत्नी शकुंतला नैयर कैसरगंज से जनसंघ की सांसद भी चुनी गईं।

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- फोटो : amar ujala
ठाकुर गुरुदत्त की भी भूमिका कम नहीं
नैयर जब जिलाधिकारी थे तो ठाकुर गुरुदत्त सिटी मजिस्ट्रेट होकर आए। उन्होंने भी जब इस स्थल को देखा तो उन्हें भी ग्लानि होने लगी। भाजपा के वरिष्ठ नेता विंध्यवासिनी कुमार बताते हैं कि जब नेहरू तुष्टीकरण की नीति पर चलते हुए मूर्तियां हटवाने पर अड़ गए और किसी भी कीमत पर यह करने का निर्देश मुख्यमंत्री को दिया तो प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हो गई।
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- फोटो : amar ujala
वैसे भी वर्षों पहले मंदिर की जगह जबरन मस्जिद बनाए जाने से आहत लोग रोष में थे। तनाव हो गया। जिस पर गुरुदत्त सिंह ने बुद्धिमानी दिखाते हुए इस स्थान को 145-146 के तहत कुर्क कर लिया और इस पर प्रशासन का ताला लगवा दिया। जिससे यह मामला अदालत में चला गया और नेहरू की मंशा पूरी न हो पाई।
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