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कॉलेज की लैब तक नहीं बता सके 'आप' के तोमर, टहलाते रहे

Fri, 12 Jun 2015 02:22 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को रिमांड पर लेकर आई दिल्ली पुलिस जांच को आगे बढ़ाने के लिए दूसरे दिन गुरुवार दोपहर 12 बजे साकेत कॉलेज पहुंची।
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प्राचार्य कक्ष में तोमर से तीन घंटे तक पूछताछ हुई। जांच टीम ने बीएससी वर्ष 1986-87 व 1987-88 के दस्तावेज कब्जे में लिए।
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तोमर के कॉलेज परिसर में प्रवेश करते ही छात्रों उग्र हो गए जिसके बाद उन पर अण्डे और टमाटर बरसने लगे।

कॉलेज की लैब तक नहीं बता सके 'आप' के तोमर, टहलाते रहे

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छात्रों का कहना था कि आप नेता तोमर ने विश्वविद्यालय का नाम बदनाम कर दिया है। दिल्ली पुलिस अभी भागलपुर के कुलपति प्रोफेसर रमाशंकर दूबे से की।
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यहां फिजिक्स के बाद वे केमिस्ट्री लैब में जाने के बजाय क्लास में चले गए। जांच के दौरान तोमर अंतिम वक्त तक साकेत में ही बीएससी की पढ़ाई करने की बात पर अड़े दिखे।
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साकेत के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्रनाथ दुबे ने बताया कि जितेंद्र तोमर बीएससी प्रथम वर्ष 1986-87 व अंतिम वर्ष 1987-88 में न यहां प्रवेश लिया और न ही एग्जाम दिया।
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विश्वविद्यालय से आई क्रॉस लिस्ट में उनका नाम व अनुक्रमांक नंबर तक नहीं है। प्रवेश के सभी रिकॉर्ड, उपस्थिति पंजिका, प्रेक्टिकल आदि कोई रिकॉर्ड जितेंद्र तोमर नाम के छात्र की पुष्टि नहीं करता।

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मार्कशीट पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. राजदेव मिश्र के हस्ताक्षर नहीं थे। दो कर्मियों के भी हस्ताक्षर फर्जी मिले हैं। मार्कशीट की छपाई, रोल नंबर, क्रम संख्या सब गलत पाई गई।

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दिल्ली पुलिस बार-बार उन्हें सुबूत दिखाती रही। मगर तोमर यह मानने को तैयार नहीं थे कि वे साकेत के स्टूडेंट नहीं थे। वे खुद को फर्जी डिग्री का शिकार मान रहे थे। लेकिन किसने दी, वे कुछ बता नहीं रहे थे।

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तोमर के पक्ष में कॉलेज की ओर से मार्च माह की एक आरटीआई में भी सभी जानकारी व हस्ताक्षर पैड आदि फर्जी थे। प्राचार्य ने कहा कि उन्होंने तोमर मामले में आरटीआई के तहत तीन पत्रों के जवाब दिए हैं।

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इसमें एडवोकेट दीपक बोहरा, विनय प्रकाश और प्रदीप शर्मा का आवेदन था। जिस पर कॉलेज ने मार्कशीट जारी न किए जाने की जानकारी दी है। दिल्ली पुलिस ने सभी दस्तावेज कब्जे में ले लिए। (इसी वाहन से कॉलेज आए थे तोमर।)

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मामले को कवर करने के लिए बड़ी संख्या में मीडिया के लोग मौजूद थे। मामले पर साकेत कॉलेज के प्राचार्य सुरेंद्र दुबे के अनुसार,जितेंद्र तोमर साकेत के कभी स्टूडेंट नहीं रहे। इसके तमाम सबूत दिल्ली पुलिस ले गई है। तीन आरटीआई से जुड़े प्रपत्र भी ले गई है। एक अन्य जिस आरटीआई जवाब में तोमर की डिग्री को स्वीकार करने की बात थी, वह पूर्णतया फर्जी निकली।
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