भीषण गर्मी में अकारण ट्रेनों की लेट लतीफी यात्रियों के पसीने छुड़ा रही है। रेलवे की इस नाकामी पर सोशल मीडिया पर जमकर फजीहत हो रही है। शुक्रवार को करीब 56 ट्रेनें लेटलतीफी का शिकार हुईं। इसके चलते 75 हजार से ज्यादा यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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स्टेशन पर खड़े यात्री
- फोटो : amarujala
मुंर्बई-गोरखपुर जनसाधारण एक्सप्रेस तो 35 घंटे की देरी से पहुंची। न पटरियों की मरम्मत हो रही है। न ही ब्लॉक लिया गया है और न ही कहीं डिरेलमेंट या अन्य हादसे हुए हैं। स्थितियां सामान्य हैं। इसके बावजूद ट्रेनों का संचालन समय की पटरी से उतरा हुआ है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। जो चारबाग रेलवे स्टेशन व लखनऊ जंक्शन पर पसीने से तरबतर हो रहे हैं।
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स्टेशन पर खड़े यात्री
शुक्रवार को मुंबई से गोरखपुर जाने वाली जनसाधारण एक्सप्रेस(12598) 35 घंटे की देरी से पहुंची। इसी क्रम में अमृतसर हावड़ा एक्सप्रेस (13050) 14.30 घंटे, हिमगिरि एक्सप्रेस(12332) 12 घंटे, सद्भावना एक्सप्रेस(14017) 14 घंटे, अकालतख्त एक्सप्रेस(12318) 11 घंटे, देहरादून गोरखपुर एक्सप्रेस(15006) 12.30 घंटे, कोटा पटना एक्सप्रेस(13238) 11 घंटे, लोहित एक्सप्रेस(15652) 15.30 घंटे, यशवंतपुर गोरखपुर एक्सप्रेस(12539) आठ घंटे, अमृतसर कटिहार एक्सप्रेस(15708) सात घंटे, सद्भावना एक्सप्रेस(14008) व पद्मावत एक्सप्रेस(14208) छह-छह घंटे, इलाहाबाद हरिद्वार एक्सप्रेस(14115) सवा आठ घंटे, चंडीगढ़ डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस(15904) व दून एक्सप्रेस(13009) चार घंटे, शहीद एक्सप्रेस(14674) नौ घंटे, दून एक्सप्रेस(13010) व आनंदविहार लखनऊ स्पेशल(04414) साढ़े पांच घंटे देरी से संचालित हुई। इन ट्रेनों की देरी से हजारों यात्रियों को असुविधाएं हुईं।
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स्पेशल ट्रेन हुई निरस्त
मुंबई से गोरखपुर जाने वाली जनसाधारण स्पेशल ट्रेन (02597) को रैक उपलब्ध नहीं होने की वजह से निरस्त कर दिया गया। ट्रेन के 36 घंटे देर से संचालित होने से यह फैसला रेलवे ने लिया। 12 मई को ट्रेन मुंबई से निरस्त रहेगी। जबकि वापसी में 02598 गोरखपुर मुम्बई जनसाधारण स्पेशल 13 मई को रद्द रहेगी।
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सोशल मीडिया पर फजीहत
ट्रेनों की लेटलतीफी पर सोशल मीडिया पर जमकर रेलवे की फजीहत हो रही है। पैसेंजर अतुल यादव ने जहां लिखा है कि रेलवे के निजीकरण की ओर बढ़ता हुआ पहला कदम है ट्रेनों की भयंकर लेटलतीफी। वहीं नेहा सिंह ने ट्वीट कर तंज कसा ‘गर्मी में ठंडक का एहसास करवा रही रेलवे’। वहीं प्रो. अमरेंद्र पाठक ने लिखा कि रेलवे को अत्याधुनिक बनाने के दावे हो रहे हैं पर, हकीकत इससे परे है। लेटलतीफी थम ही नहीं रही है।
इसलिए नहीं सुधर रही लेटलतीफी
पूर्व रेलकर्मी सुनीत त्रिवेदी बताते हैं कि टाइम मैनेजमेंट में सुधार कर ट्रेनों का संचालन सुधारा जा सकता है। मसलन, जब ट्रेन चारबाग या लखनऊ जंक्शन पहुंचती है तो उसे जल्द रवाना किया जा सकता है। जैसे कि गार्ड या लोको पायलट पहले से प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहें। पानी की व्यवस्था तत्काल हो जाए। साफ-सफाई से लेकर बोगी में यदि दिक्कत है तो उसे जल्द ठीक करवा दिया जाए और आउटडोर स्टेशन मास्टर लगातार पावर केबिन को सूचित करते रहें।