सत्रहवीं शताब्दी की वास्तुकला और नवाबी दौर की बेहतरीन कारीगरी को देख गुरुवार को देशभर से आए सैलानी अभिभूत हो गए। पर्यटकों ने लंबे इंतजार के बाद बड़ा इमामबाड़ा, भूलभुलैया और छोटा इमामबाड़ा का दिल खोलकर दीदार किया।
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- फोटो : amar ujala
मौका था छह माह बाद शहर के पर्यटन केंद्रों के ताले खुलने के पहले दिन का, जहां पहुंचकर लोगों ने धरोहरों को करीब से देखा और उनके साथ सेल्फी लेकर यादें संजोई।
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हुसैनाबाद ट्रस्ट को लिखित आदेश मिलने के बाद गुरुवार को इमामबाड़े के दरवाजे सैलानियों के लिए खोले गए। सुबह से ही पर्यटक इमामबाड़े का दीदार करने पहुंचना शुरू हो गए थे। शाम तक करीब 458 पर्यटकों ने इमामबाड़े और भूलभुलैया का दीदार किया। इसमें 13 बच्चे भी शामिल रहे।
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नई गाइडलाइन के मुताबिक प्रवेश से पहले सभी सैलानियों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई और हाथ सैनिटाइज करवाए गए। बगैर मास्क पहने आने वाले दर्शकों को प्रवेश नहीं दिया गया। इमामबाड़े के प्रभारी हबीबुल हसन ने बताया कि सभी पर्यटकों की रजिस्टर में एंट्री की गई।
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पहले दिन 22 हजार से ज्यादा की आमदनी बड़ा इमामबाडा के प्रभारी हबीबुल हसन ने बताया कि पहले दिन शाम पांच बजे तक 22 हजार 575 रुपये की आमदनी हुई है।
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पर्यटन स्थल खुलने पर महसूस हुई आजादी
इमामबाड़ा घूमने लालबाग से आई अदिति का कहना था कि पूरे छह महीने के बाद शहर के ऐतिहासिक इमारतों को खोला गया है। आज हमें आजादी महसूस हो रही है। पहली बार इमामबाड़ा देखने आई सपना का कहना था कि नवाबी दौर की बेहतरीन कारीगरी का नमूना बड़ा इमामबाड़ा, भूलभुलैया देखने की हसरत काफी दिनों से थी, जो आज पूरी हुई है।
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हमीरपुर राठ से सभासद जरीना लतीफ भी पहली बार इमामबाड़ा देखने पहुंची थीं। उन्होंने बताया कि इमामबाड़ा देखने की तमन्ना काफी दिन से थी। वाकई ये नवाबी दौर की बेहतरीन कारीगरी है।
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हमीरपुर के मुमताज खान का कहना था कि लॉकडाउन में सभी घरों में कैद थे। अब धीरे-धीरे सब खुल रहा है तो अच्छा लग रहा है, लेकिन हमें हर काम के साथ कोरोना से भी बचना है।
आश्वासन के बाद टला विरोध
धार्मिक गतिविधियों पर पाबंदी के रहते पर्यटकों के लिए इमामबाड़ों को खोलने से नाराज वक्फ बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष शमील शम्शी ने जिला प्रशासन से आश्वासन मिलने के बाद अपना विरोध टाल दिया। शमील का कहना था कि इमामबाड़ा धार्मिक स्थल है, इसलिए पहले बड़े इमामबाड़े में धार्मिक कार्यों पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं। इसके बाद पर्यटकों को इमामबाड़े में प्रवेश दिया जाए।