मीडिया में खबर आने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर प्रतापगढ़ के दो स्टूडेंट की मदद करने की होड़ मच गई। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मदद को आए। स्मृति ने चार साल की फीस माफ कर दी। मुख्यमंत्री ने रहने, खाने का इंतजाम कर दिया। तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया। क्या केंद्र और प्रदेश सरकार के नुमाइंदे अब इस मेधावी का दर्द सुनेंगे।
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किस तरह की जिंदगी जी रहा है ये आईआईटी टॉपर
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ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई) एडवांस 2015 में 472वीं रैंक पाने वाले नौबस्ता के उत्तम कुमार का भी आईआईटी में पढ़ाई करने का सपना टूटता नजर आ रहा है। जानें किन कठिन हालात में उन्होंने पढ़ाई की...
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उत्तम के पिता कृष्णा गौतम राजमिस्त्री हैं। महीने में चार हजार रुपये कमाते हैं, जिससे परिवार का खर्च नहीं चल पाता है। पूरे महीने काम भी नहीं मिलता है। जो कमाई हो पाती है, वह उत्तम, उनकी छोटी बहन रोशनी और भाई हिमांशु की पढ़ाई पर खर्च हो जाती है।
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घर का खर्च नहीं चल पाता इसलिए उत्तम की मां ज्योति ने घर पर ही छोटी दुकान खोल रखी है, जिसमें पांच सौ रुपये के सामान रखे हैं। राजमिस्त्री ने वर्ष 1998 में पांच हजार रुपये जमा करके केडीए से कालोनी ली थी लेकिन आर्थिक हालत खराब होने के कारण पिछले 15 साल से कालोनी की किस्त (प्रतिमाह 680 रुपये) नहीं भरी है।
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जेईई एडवांस में बढ़िया रैंक हासिल करने वाले उत्तम कुमार आईआईटी कानपुर से मैकेनिकल या फिर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करना चाहते हैं। वह कहते हैं, आईआईटी में एडमिशन के लिए कर्ज ढूंढ रहा हूं। काउंसलिंग 25 जून से शुरू होगी और अभी तक फीस का इंतजाम नहीं हो सका है।
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पिता राजमिस्त्री हैं, इसलिए कोई कर्ज देने को तैयार नहीं है। आईआईटी में चार साल रहना है। इस दौरान करीब पांच लाख रुपये खर्च हो जाएंगे।
ट्यूशन, मेस और हॉस्टल की फीस अलग-अलग देनी पड़ती है। चार साल की पढ़ाई कैसे पूरी होगी, यह सोचकर परेशान हूं। टेबल-मेज की जगह खाट पर बैठकर पढ़ाई की है। आईआईटी से पढ़ने का सपना है, जो अब फीस की वजह से टूटता दिख रहा है।