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नीट का पेपर खराब होने पर युवती ने उठाया ये कदम, परिवारीजनों के उड़े होश

Thu, 10 May 2018 03:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो - फोटो : डेमो
लखनऊ में अलीगंज के सेक्टर बी स्थित हॉस्टल में रहकर नेशनल एलिजीबिलिटी कम इंट्रेंस टेस्ट (नीट) की तैयारी कर रही नैंसी शुक्ला (21) ने बुधवार शाम फांसी लगा ली। सीतापुर के आवास विकास निवासी किसान संजय शुक्ला की बेटी नैंसी करीब 10 महीने से हॉस्टल में रहकर कोचिंग कर रही थी।
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डेमो
अपर पुलिस अधीक्षक ट्रांस गोमती हरेंद्र कुमार ने बताया कि नैंसी यहां महावीर प्रसाद अग्रवाल के घर पर संचालित हॉस्टल में रह रही थी। मंगलवार शाम को उसकी मां ने फोन किया लेकिन फोन उठा। उन्होंने कई बार फोन मिलाया, लेकिन बात नहीं हुई। बेटी के फोन न उठाने से परेशान मां ने महावीर प्रसाद को कॉल की। उन्होंने महावीर से कहा कि बेटी फोन नहीं उठा रही है। उसके कमरे में जाकर बात कराएं।
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- फोटो : डेमो
इस पर महावीर ने कहा कि वह अभी घर के बाहर हैं। कुछ देर में घर पहुंचेंगे और नैंसी से बात करा देंगे। करीब आठ बजे महावीर घर पहुंचे और नैंसी के कमरे की तरफ गए। कमरा भीतर से बंद था। उन्होंने दरवाजा खटखटाया लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं मिला।महावीर ने स्कूट लगाकर रोशनदान से भीतर झांका तो होश उड़ गए। नैंसी का शव दुपट्टे के सहारे फंदे से लटका हुआ था।

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dead body
उन्होंने परिवारीजनों के साथ ही पुलिस नियंत्रण कक्ष में फोन कर घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव उतारा। अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि कमरे की तलाशी ली गई लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। सूचना पाकर आए परिवारीजनों का कहना था कि नैंसी की छह अप्रैल को परीक्षा थी। उसका फिजिक्स का पेपर खराब हो गया था। 
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इससे वह बहुत परेशान थी। सोमवार को उसने पेपर खराब होने की जानकारी दी तो परिवारीजनों ने घर आने बुला लिया। नैंसी तनाव में थी। माता-पिता ने उसे समझाया। वह पिता से तनावरहित होकर फिर से तैयारी करने का वादा कर लौट आई और बुधवार शाम उसने खुदकुशी कर ली। शव का बृहस्पतिवार को पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
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- फोटो : डेंमो
नैंसी के परिवारीजनों ने बताया कि वह पढ़ने में तेज थी। स्कूल से लेकर कॉलेज तक वह अपनी कक्षा में हमेशा टॉपर रही। हाईस्कूल में उसने 95 प्रतिशत नंबर हासिल किए थे जबकि बारहवीं की परीक्षा में 87 प्रतिशत नंबर थे। नैंसी की मौत की खबर से परिवारीजनों पर कहर टूट पड़ा। संजय ने बताया कि बेटी मिलनसार और हंसमुख स्वभाव की थी। हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहती थी। हॉस्टल में रहने वाली अन्य युवतियों से उसकी खूब बनती थी। 
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हमारा मत: खुदकुशी से पहले जरा उनके बारे में सोचिए
उम्र चाहे जो हो, निराशा चाहे जितनी भी बड़ी हो, आत्महत्या जैसे कदम उठाना ठीक नहीं। आप तो चले जाएंगे, लेकिन जरा सोचिए आपके पीछे आपके अपने खासकर माता-पिता तो जीते जी मर जाएंगे। इसलिए जब भी खुदकुशी जैसे खयाल आएं, एक बार उनके बारे में जरूर सोचिए
 

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डेमो - फोटो : डेंमो
जीवन में नकारात्मकता ठीक नहीं, आत्महत्या के बारे में तो सोचना ही नहीं चाहिए। माना लक्ष्य को पाने के लिए आपने अपना सौ फीसदी दिया, सफलता नहीं मिली तो क्या? राहें और भी हैं, एक असफलता किसी के भी जीवन से बड़ी नहीं हो सकती। दुनिया में सफल हुए लोगों ने भी असफलता का स्वाद कई-कई बार चखा, पर उन्हीं अड़चनों के बीच उन्होंने मंजिल तक पहुंचने का रास्ता ढूंढा।
- चार्वी मोहन, लाइफ स्किल ट्रेनर
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पेपर खराब होना बड़ी बात नहीं, महत्वपूर्ण है कि हम दोबारा ऐसा न हो, इसके लिए क्या प्रयास करते हैं। निराशा तो मानव स्वभाव का हिस्सा है, लेकिन आत्मविश्वास को खोने न दें। सकारात्मक सोच वाले लोगों के साथ रहें। सफल लोगों के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ें और जानने की कोशिश करें कि उन्होंने संघर्ष के दिन में कैसे हिम्मत बनाए रखी। -  डॉ. सृष्टि श्रीवास्तव, मनोवैज्ञानिक
 
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