अपने भाई की बाइक से सीखने वाली प्राची जैन बताती हैं कि उनके लिए यह शौक था। बाइक का उपयोग रोजमर्रा के काम के दौरान मोड ऑफ ट्रांसपोर्ट के रूप में होता रहा, लेकिन बीते कुछ समय से महसूस करने लगी हैं कि बाइकिंग के जरिये वे अपने दिमाग से तनाव और उलझनों को दूर रख सकती हैं।
डेढ़ वर्ष पहले अपने इस शौक के लिए इनफील्ड बाइक खरीदी और अपना ग्रुप बनाकर लंबी राइड पर निकल जाती हैं।
भविष्य : मोटर बाइकिंग का पैशन रखने वाली लखनऊ की लड़कियों के लिए प्राची मानती हैं कि उन्हें समूह बनाकर ज्यादा सक्रिय होना होगा।
वे खुद नई दिल्ली और गुड़गांव के कुछ लड़कियों के ग्रुप से जुड़ी हैं। वहीं, लखनऊ में ‘बाइकरनी’ क्लब का चैप्टर भी अपने दोस्त वर्तिका जैन के साथ सक्रिय रखती हैं। वहीं लड़कियों में मोटरबाइकिंग के पैशन को बाहर लाने के लिए वे मानती हैं कि ज्यादा से ज्यादा इवेंट्स होने चाहिए।
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कक्षा 8 से दौड़ा रही है बाइक
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simarnjeet
- फोटो : amar ujala
बाइकर सिमरनजीत
एयरफोर्स ऑफिसर की बेटी सिमरनजीत को अपने घर में बेहद खुला और लड़कों से बराबरी का माहौल मिला। वे बताती हैं कि कक्षा आठ में ही उन्होंने बाइक चलाना सीख लिया और धीरे-धीरे लगभग हर तरह की बाइक चला डाली।
दोस्तों की बाइक चलाना उन्हें हमेशा आकर्षित करता रहा। भिलाई जैसे छोटे शहर में रहने के बावजूद कॉलेज भी बाइक पर जातीं थी।
ऐसे शहर में लड़की का बाइक पर कॉलेज आना लड़कों में चर्चा का विषय बना, लेकिन उन्होंने मुड़कर नहीं देखा। क्लास नौ में ही कार सीखी थी, वो अलग।
भविष्य : सिमरन बताती हैं कि बतौर बाइकर लखनऊ की लड़कियां स्पोर्ट्स बाइकिंग में जबरदस्त प्रदर्शन करने की क्षमता रखती हैं। इसके लिए जरूरी है कि यहां ज्यादा से ज्यादा इवेंट हों।
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आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास का सिंबल
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aysha ameen
- फोटो : amar ujala
बाइकर आयशा अमीन
मास कम्युनिकेशन की स्टूडेंट आयशा अमीन ने 18 वर्ष की होने पर अपना मोटरसाइकिल ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया और अब शान से एफ-जेड और पल्सर पर राइड करती हैं।
वे बताती हैं कि उन्होंने दो वर्ष पहले ही अपने भाई सुहैल की मदद से बाइक चलाना सीखा। वे इसे अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण अचीवमेंट मानती हैं। बताती हैं कि बाइक आपको कहीं भी ले जा सकती है, आप किसी पर निर्भर नहीं रहते।
भविष्य : फिलहाल अनुभव कम है, इसलिए चाहती हैं कि ज्यादा इवेंट लखनऊ में करवाए जाएं, जिनमें लड़कियों को मोटरबाइक स्किल्स दिखाने का मौका मिले।
शौक अब पैशन बन गया
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swati chandra
- फोटो : amar ujala
बाइकर स्वाति चंद्रा
पटना से लखनऊ आकर पढ़ाई कर रहीं स्वाति बताती हैं कि उन्होंने क्लास 7 में पढ़ते हुए बाइक चलाना सीखा था। उस समय में कुछ अलग करने का मन था इसलिए इसे सीखा, लेकिन फिर यह उनका पैशन बन गया।
भविष्य : स्वाति बताती हैं कि वे अपने कॅरिअर में कुछ अलग करना चाहती हैं और मौका मिले तो मोटर स्पोर्ट्स में जाना चाहेंगी।
हालांकि इसके लिए अधिक इवेंट्स होने की उम्मीद वे करती हैं ताकि अपने प्रतिभा का प्रदर्शन कर सके।
बैचलर स्टूडेंट अनिका ने अपने पड़ोस में रहने वाली दोस्त मनीषा को देखकर बाइक चलाना सीखा।
वे बताती हैं कि अक्सर उनके साथ बाहर जाती तो पीछे बैठी होतीं, उस दौरान जो एक्साइटमेंट महसूस होती उससे तय किया कि उन्हें भी इसे सीखना है।
भविष्य : कुछ समय पहले ही अनिका का बाइक से एक्सीडेंट हुआ, लेकिन वे कहती हैं कि गिरने पर अपनी गलती का पता चलता है, अगली बार ज्यादा सजग होकर राइडिंग करने की सीख भी मिलती है।